{"_id":"5d5c48e18ebc3e6c2f6ff412","slug":"yamuna-flud-rohtak-news-rtk512861849","type":"story","status":"publish","title_hn":"यमुना के बांध से पानी उतरकर 1000 एकड़ फसल डूबी, खेतों के रास्ते भी बह गए, टोकी में घुसा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यमुना के बांध से पानी उतरकर 1000 एकड़ फसल डूबी, खेतों के रास्ते भी बह गए, टोकी में घुसा पानी
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हरियाणा-यूपी को जोडने वाले पुल के नीचे पानी का तेज बहाव
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 8.28 लाख क्यसेक पानी सोनीपत में पहुंचने के बाद यमुना पूरी तरह से उफान पर आई हुई है। जहां सोमवार तक केवल यमुना के तटबंध के अंदर ही फसल डूबी थी, वहीं यमुना उफान पर आने के कारण पानी बांध से उतरकर खेतों में पहुंच गया और उससे लगभग एक हजार एकड़ फसल डूब गई। यमुना के पानी से खेतों में जाने वाले रास्ते भी बह गए तो टोकी गांव तक पानी घुस गया। प्रशासन के सोमवार को गांव खाली कराने के बाद लोग दोबारा वहां आ गए थे, लेकिन वहां मंगलवार दोपहर बाद पानी पहुंचा तो लोगों से दोबारा गांव खाली कराकर मंदिर में रोका गया। प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने गांवों में कैंप किया हुआ है तो डीसी समेत अन्य अधिकारी निरीक्षण कर रहे है। वहीं यमुना के पानी में डूबने से सब्जी की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है तो मक्का व धान की फसल में नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। हरियाणा - यूपी पुल के पास पानी मंगलवार शाम तक 216 मीटर के निशान पर चल रहा था, हालांकि इसके रात से लेकर बुधवार सुबह तक कुछ कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
पहाड़ों पर पिछले कई दिनों तक लगातार बारिश होने के कारण हथिनीकुंड बैराज से शनिवार रात से रविवार दोपहर तक लगभग 8.28 लाख क्यूसक पानी छोड़ा गया था। यह पानी सोमवार देर शाम से सोनीपत में पहुंचना शुरू हुआ और यह मंगलवार दोपहर तक बढ़ता रहा। जिससे यमुना पूरी तरह से उफान पर आ गई। जहां यमुना के अंदर की पूरी फसल सोमवार को डूब गई थी, वहीं यमुना उफान पर आने के कारण गढ़ मिर्कपुर के पास बांध के ऊपर से पानी उतरकर खेतों में घुस गया और वहां खेतों में जाने वाला रास्ता भी बंद हो गया तो गन्ने व ज्वार की फसल भी पानी में डूब गई। असदपुर के पास यमुना उफान पर आने के बाद खेतों की ओर जाने वाला रास्ता भी कई जगह से टूटकर बह गया और वहां भी फसल डूब गई। इसके अलावा टोकी गांव के आसपास खेतों में पानी भरने से सब्जी, मक्का व धान की फसल डूब गई। इस तरह यमुना के पानी में लगभग एक हजार एकड़ फसल डूब गई। फसल डूबने के बाद मंगलवार दोपहर को पानी टोकी गांव में पहुंचने लगा तो वहां से सभी लोगों को मंदिर में भेजा गया।
टोकी में दोबारा पहुंचे ग्रामीण तो पानी आने पर खाली कराया
टोकी गांव को सोमवार को पानी आने के डर से प्रशासन ने खाली करा दिया था। वहां सोमवार रात में पंद्रह से ज्यादा पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया था, जिनमें महिला पुलिस कर्मी भी शामिल थी। जिससे रात में पानी आने पर तुरंत वह मदद कर सके। लेकिन वहां रात में पानी नहीं आया तो मंगलवार सुबह को गांव के लोग दोबारा से अपने घरों में पहुंच गए। उस समय तक केवल खेतों में फसल डूबी थी और वहां दोपहर के बाद अचानक पानी बढ़ गया जो टोकी गांव में घुसने लगा। उसको देखते हुए अधिकारियों ने तुरंत ही गास्त्रत्त्ंव को खाली कराया और ग्रामीणों को मंदिर में रखा गया। ग्रामीण मंगलवार देर शाम तक मंदिर में डटे हुए थे और वहां प्रशासनिक अधिकारी कैंप किए हुए है।
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15 गांवों में बना रहा बाढ़ का खतरा
यमुना किनारे के लगभग 15 गांवों में बाढ़ का खतरा बना रहा। जिनमें गढ़ी असदपुर, मनौली, टोकी, बड़ौली, बेगा, पीरगढ़ी, गढ़ी बिलंदा, ग्यासपुर, पबनेरा, चंदौली, टिकौला आदि शामिल है। इसको देखते हुए ही प्रशासनिक अधिकारी यमुना किनारे के गांवों में दौरा करते रहे और वहां लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लेते रहे। वहां लोगों से बताया गया कि वह वह यमुना के पास जाने से बचे, क्योंकि यमुना का जलस्तर काफी ऊपर चल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जब तक यह पानी सोनीपत से आगे नहीं निकल जाता है, उस समय तक स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
डीसी की अभी ठीकरी पहरा लगाने की अपील
प्रशासन ने जहां लोगों के यमुना किनारे जाने पर रोक लगा दी है। प्रशासन का मानना है कि यमुना में पानी के तेज बहाव के कारण किनारों से मिट्टी का कटाव होगा और ऐसे में कोई यमुना के किनारे वहां देखने भी जाता है तो मिट्टी गिरने से हादसा हो सकता है। इसके साथ ही डीसी डा. अंशज सिंह ने अभी ठीकरी पहरा लगाए जाने की अपील लोगों से की है। डीसी ने कहा है कि जल स्तर बढ़ने की स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की परेशानी से निपटने को लेकर ठीकरी पहरे का प्रावधान किया गया है। गांवों के सभी युवा अपने - अपने क्षेत्र में पड़ने वाली यमुना नदी के तटबंधों को टूटने से बचाने के लिए ठीकरी पहरा देना चाहिए। इसके साथ ही सभी थानाध्यक्षों व बीडीपीओ को ग्रामीणों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
भाजपा हर संभव मदद करेगी : मोहन लाल
भाजपा के व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य मोहनलाल बड़ौली ने यमुना नदी में बढ़ते जलस्तर को लेकर मंगलवार सुबह को टोकी गांव का दौरा किया। मोहन लाल बड़ौली ने लोगों को आश्वस्त किया कि उनको किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और उनकी हर संभव मदद की जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत करते हुए समस्याएं जानकर उनके निस्तारण का आश्वासन भी दिया। मोहन लाल बड़ौली ने नायब तहसीलदार हवा सिंह से बात की तो वह भी वहां पहुंच गए और ग्रामीणों को बताया कि इस समय यमुना उफान पर चल रही है। यहां से पानी मंगलवार की रात में आगे निकलना शुरू हो जाएगा और उसके बाद किसी तरह का खतरा नहीं रहेगा। टोकी गांव के लोगों ने बताया कि यमुना के पानी में डूबकर सब्जी, धान व मक्का की फसल बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है।
गन्नौर क्षेत्र में यमुना किनारे दौरा करते रहे अधिकारी
एसडीएम सुरेंद्र पाल के नेतृत्व में बीडीपीओ जितेंद्र कुमार, तहसीलदार गुलाब सिंह, एसएचओ दिनेश कुमार, ओंकार कानूनगो, जय भगवान एससीपीओ, ग्राम सचिव, दिलावर पटवारी सहित अन्य ने घाटों को दौरा किया। वहीं इनमें से कई अधिकारी घाट पर डेरा जमाए रहे, जिससे किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। वहां लोगों ने बताया कि सब्जी की फसल में पानी भर गया है, जिससे उनमें काफी नुकसान हो सकता है।
हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी यहां पहुंचने से जलस्तर काफी बढ़ गया था। यहां किसी तरह की जान माल की हानि नहीं हुई है और अब यमुना का जलस्तर कम होने के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों की टीम लगातार दौरा करती रही और इसके अलावा यमुना के पास वाले गांवों में अधिकारी कैंप किए हुए थे। डॉ. अंशज सिंह, डीसी
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पहाड़ों पर पिछले कई दिनों तक लगातार बारिश होने के कारण हथिनीकुंड बैराज से शनिवार रात से रविवार दोपहर तक लगभग 8.28 लाख क्यूसक पानी छोड़ा गया था। यह पानी सोमवार देर शाम से सोनीपत में पहुंचना शुरू हुआ और यह मंगलवार दोपहर तक बढ़ता रहा। जिससे यमुना पूरी तरह से उफान पर आ गई। जहां यमुना के अंदर की पूरी फसल सोमवार को डूब गई थी, वहीं यमुना उफान पर आने के कारण गढ़ मिर्कपुर के पास बांध के ऊपर से पानी उतरकर खेतों में घुस गया और वहां खेतों में जाने वाला रास्ता भी बंद हो गया तो गन्ने व ज्वार की फसल भी पानी में डूब गई। असदपुर के पास यमुना उफान पर आने के बाद खेतों की ओर जाने वाला रास्ता भी कई जगह से टूटकर बह गया और वहां भी फसल डूब गई। इसके अलावा टोकी गांव के आसपास खेतों में पानी भरने से सब्जी, मक्का व धान की फसल डूब गई। इस तरह यमुना के पानी में लगभग एक हजार एकड़ फसल डूब गई। फसल डूबने के बाद मंगलवार दोपहर को पानी टोकी गांव में पहुंचने लगा तो वहां से सभी लोगों को मंदिर में भेजा गया।
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टोकी में दोबारा पहुंचे ग्रामीण तो पानी आने पर खाली कराया
टोकी गांव को सोमवार को पानी आने के डर से प्रशासन ने खाली करा दिया था। वहां सोमवार रात में पंद्रह से ज्यादा पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया था, जिनमें महिला पुलिस कर्मी भी शामिल थी। जिससे रात में पानी आने पर तुरंत वह मदद कर सके। लेकिन वहां रात में पानी नहीं आया तो मंगलवार सुबह को गांव के लोग दोबारा से अपने घरों में पहुंच गए। उस समय तक केवल खेतों में फसल डूबी थी और वहां दोपहर के बाद अचानक पानी बढ़ गया जो टोकी गांव में घुसने लगा। उसको देखते हुए अधिकारियों ने तुरंत ही गास्त्रत्त्ंव को खाली कराया और ग्रामीणों को मंदिर में रखा गया। ग्रामीण मंगलवार देर शाम तक मंदिर में डटे हुए थे और वहां प्रशासनिक अधिकारी कैंप किए हुए है।
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15 गांवों में बना रहा बाढ़ का खतरा
यमुना किनारे के लगभग 15 गांवों में बाढ़ का खतरा बना रहा। जिनमें गढ़ी असदपुर, मनौली, टोकी, बड़ौली, बेगा, पीरगढ़ी, गढ़ी बिलंदा, ग्यासपुर, पबनेरा, चंदौली, टिकौला आदि शामिल है। इसको देखते हुए ही प्रशासनिक अधिकारी यमुना किनारे के गांवों में दौरा करते रहे और वहां लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लेते रहे। वहां लोगों से बताया गया कि वह वह यमुना के पास जाने से बचे, क्योंकि यमुना का जलस्तर काफी ऊपर चल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जब तक यह पानी सोनीपत से आगे नहीं निकल जाता है, उस समय तक स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
डीसी की अभी ठीकरी पहरा लगाने की अपील
प्रशासन ने जहां लोगों के यमुना किनारे जाने पर रोक लगा दी है। प्रशासन का मानना है कि यमुना में पानी के तेज बहाव के कारण किनारों से मिट्टी का कटाव होगा और ऐसे में कोई यमुना के किनारे वहां देखने भी जाता है तो मिट्टी गिरने से हादसा हो सकता है। इसके साथ ही डीसी डा. अंशज सिंह ने अभी ठीकरी पहरा लगाए जाने की अपील लोगों से की है। डीसी ने कहा है कि जल स्तर बढ़ने की स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की परेशानी से निपटने को लेकर ठीकरी पहरे का प्रावधान किया गया है। गांवों के सभी युवा अपने - अपने क्षेत्र में पड़ने वाली यमुना नदी के तटबंधों को टूटने से बचाने के लिए ठीकरी पहरा देना चाहिए। इसके साथ ही सभी थानाध्यक्षों व बीडीपीओ को ग्रामीणों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
भाजपा हर संभव मदद करेगी : मोहन लाल
भाजपा के व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य मोहनलाल बड़ौली ने यमुना नदी में बढ़ते जलस्तर को लेकर मंगलवार सुबह को टोकी गांव का दौरा किया। मोहन लाल बड़ौली ने लोगों को आश्वस्त किया कि उनको किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और उनकी हर संभव मदद की जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत करते हुए समस्याएं जानकर उनके निस्तारण का आश्वासन भी दिया। मोहन लाल बड़ौली ने नायब तहसीलदार हवा सिंह से बात की तो वह भी वहां पहुंच गए और ग्रामीणों को बताया कि इस समय यमुना उफान पर चल रही है। यहां से पानी मंगलवार की रात में आगे निकलना शुरू हो जाएगा और उसके बाद किसी तरह का खतरा नहीं रहेगा। टोकी गांव के लोगों ने बताया कि यमुना के पानी में डूबकर सब्जी, धान व मक्का की फसल बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है।
गन्नौर क्षेत्र में यमुना किनारे दौरा करते रहे अधिकारी
एसडीएम सुरेंद्र पाल के नेतृत्व में बीडीपीओ जितेंद्र कुमार, तहसीलदार गुलाब सिंह, एसएचओ दिनेश कुमार, ओंकार कानूनगो, जय भगवान एससीपीओ, ग्राम सचिव, दिलावर पटवारी सहित अन्य ने घाटों को दौरा किया। वहीं इनमें से कई अधिकारी घाट पर डेरा जमाए रहे, जिससे किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। वहां लोगों ने बताया कि सब्जी की फसल में पानी भर गया है, जिससे उनमें काफी नुकसान हो सकता है।
हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी यहां पहुंचने से जलस्तर काफी बढ़ गया था। यहां किसी तरह की जान माल की हानि नहीं हुई है और अब यमुना का जलस्तर कम होने के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों की टीम लगातार दौरा करती रही और इसके अलावा यमुना के पास वाले गांवों में अधिकारी कैंप किए हुए थे। डॉ. अंशज सिंह, डीसी

असदपुर गांव में पानी के तेज बहाव के कारण टूटा रास्ता- फोटो : Sonipat

टोकी गांव में डूबी फसल व गांव तक पहुंचा पानी- फोटो : Sonipat