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Rohtak News: एमडीयू में होगा हिंदी में कामकाज, लगाए जाएंगे हिंदी नाम पट्ट
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रोहतक। मातृ भाषा हिंदी को बढ़ावा देने की दिशा में एमडीयू ने बड़ा कदम उठाया है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में अब सिर्फ अंग्रेजी भाषा में ही काम नहीं होगा। कर्मचारी हिंदी में कामकाज करेंगे। यही नहीं, विभागों, भवनों व मार्गों के नाम भी हिंदी में लिखे जाएंगे। साथ ही कर्मचारियों को हिंदी में काम करने के लिए प्रेरित करने के लिए कार्यशाला का भी आयोजन किया जाएगा। यह फैसला एमडीयू में हुई बुद्धिजीवियों की बैठक में लिया गया। यहां हिंदी को प्रोत्साहन देने के लिए सलाहकार समिति का भी गठन किया गया।
हिंदी आज के समय दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन गई है। हिंदी दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में बोली जाती है। एमडीयू में हिंदी को महत्व देने के लिए शिक्षकों व बुद्धिजीवियों ने सलाहकार समिति का गठन किया गया है। समिति हिंदी भाषा के महत्व पर जोर देते हुए विश्वविद्यालय के नियमित कार्यों में हिंदी माध्यम लागू करने के संबंध में विस्तार से विचार-विमर्श किया। एमडीयू के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग अध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्ण जून, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता सैनी, प्रो. संजीव कुमार वर्मा, प्रो. नरेश मिश्र, डॉ. जगदेव सिंह, महावीर शास्त्री समिति के सदस्य हैं।
कमेटी की ओर से मुख्य सात प्रस्ताव पास किए हैं। इसमें एमडीयू के सभी भवनों के नाम पट्ट प्रथम रूप में हिंदी व इसके बाद अंग्रेज़ी में लिखने, हिंदी नाम अंग्रेज़ी का ट्रांसक्रिप्शन नहीं होगा, इसका हिंदी अनुवाद लिखा जाने, एमडीयू के टैगोर ऑडिटोरियम, विवेकानंद पुस्तकालय व अन्य भवनों पर अंग्रेजी नाम पट्ट पर तात्कालिक प्रभाव से हिंदी नाम पट्ट भी दिए जाने को शामिल किया गया है। साथ ही एमडीयू के सभी शैक्षणिक विभागों, कुलपति व कुलसचिव कार्यालय के अलावा अन्य कार्यालयों में विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम पट्ट पहले हिंदी व इसके नीचे अंग्रेजी में लिखे जाने, कार्यालय कर्मचारियों के लिए ''''''''हिंदी में कामकाज'''''''' विषय पर व्यावहारिक कार्यशाला आयोजित करने, एमडीयू के सभी मार्गों पर हिंदी में नाम पट्ट होने, एमडीयू परिसर में राष्ट्रभाषा को गौरवान्वित करने वाले प्रेरक वाक्य लिखने व एमडीयू के कार्यालयों में हिंदी में कार्य को बढ़ावा दिया जाना शामिल है।
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वर्जन:
एमडीयूू में हिंदी को बढ़ावा देते हुए कामकाज मातृभाषा करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए सलाहकार समिति ने बैठक कर कुछ प्रस्ताव भी पास किए हैं। इसके तहत सभी विभागों, भवनों, पुस्तकालय, सभागार, मार्गों के नाम हिंदी में लिखे जाएंगे। कर्मचारियों को हिंदी में कामकाज के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कार्यशाला लगाई जाएगी।
-प्रो. कृष्णा जून, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, एमडीयू।
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हिंदी आज के समय दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन गई है। हिंदी दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में बोली जाती है। एमडीयू में हिंदी को महत्व देने के लिए शिक्षकों व बुद्धिजीवियों ने सलाहकार समिति का गठन किया गया है। समिति हिंदी भाषा के महत्व पर जोर देते हुए विश्वविद्यालय के नियमित कार्यों में हिंदी माध्यम लागू करने के संबंध में विस्तार से विचार-विमर्श किया। एमडीयू के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग अध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्ण जून, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता सैनी, प्रो. संजीव कुमार वर्मा, प्रो. नरेश मिश्र, डॉ. जगदेव सिंह, महावीर शास्त्री समिति के सदस्य हैं।
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कमेटी की ओर से मुख्य सात प्रस्ताव पास किए हैं। इसमें एमडीयू के सभी भवनों के नाम पट्ट प्रथम रूप में हिंदी व इसके बाद अंग्रेज़ी में लिखने, हिंदी नाम अंग्रेज़ी का ट्रांसक्रिप्शन नहीं होगा, इसका हिंदी अनुवाद लिखा जाने, एमडीयू के टैगोर ऑडिटोरियम, विवेकानंद पुस्तकालय व अन्य भवनों पर अंग्रेजी नाम पट्ट पर तात्कालिक प्रभाव से हिंदी नाम पट्ट भी दिए जाने को शामिल किया गया है। साथ ही एमडीयू के सभी शैक्षणिक विभागों, कुलपति व कुलसचिव कार्यालय के अलावा अन्य कार्यालयों में विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम पट्ट पहले हिंदी व इसके नीचे अंग्रेजी में लिखे जाने, कार्यालय कर्मचारियों के लिए ''''''''हिंदी में कामकाज'''''''' विषय पर व्यावहारिक कार्यशाला आयोजित करने, एमडीयू के सभी मार्गों पर हिंदी में नाम पट्ट होने, एमडीयू परिसर में राष्ट्रभाषा को गौरवान्वित करने वाले प्रेरक वाक्य लिखने व एमडीयू के कार्यालयों में हिंदी में कार्य को बढ़ावा दिया जाना शामिल है।
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एमडीयूू में हिंदी को बढ़ावा देते हुए कामकाज मातृभाषा करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए सलाहकार समिति ने बैठक कर कुछ प्रस्ताव भी पास किए हैं। इसके तहत सभी विभागों, भवनों, पुस्तकालय, सभागार, मार्गों के नाम हिंदी में लिखे जाएंगे। कर्मचारियों को हिंदी में कामकाज के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कार्यशाला लगाई जाएगी।
-प्रो. कृष्णा जून, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, एमडीयू।