फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   with dc meeting not fulfull, jobber boycutt crop purchasing

डीसी के साथ बैठक में नहीं बात तो आढ़तियों ने किया गेहूं खरीद का बायकाट

Sun, 19 Apr 2020 01:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2020 01:27 AM IST
विज्ञापन
with dc meeting not fulfull, jobber boycutt crop purchasing
नई अनाज मंडी में सरकार के आनलाइन गेहूं की खरीद के विरोध में शनिवार को अढ़तियों ने अपने लाइसेंस को - फोटो : RohtakCity
रोहतक। रबी सीजन की सबसे प्रमुख फसल गेहूं की 20 फरवरी से शुरू हो रही खरीद पर संकट खड़ा हो गया है। अपनी मांगे न माने जाने से नाराज आढ़तियों ने शनिवार को गेहूं खरीद के बायकाट का एलान कर दिया है। देर शाम डीसी आरएस वर्मा ने भी आढ़तियों के साथ बैठक की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
विज्ञापन

एक दिन पहले रोहतक की नई अनाज मंडी में सरसों की खरीद का जायजा लेने आए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के तेवरों से ही आढ़तियों का रुख स्पष्ट हो गया था। आढ़तियों की मांगों पर दुष्यंत ने दो टूक जवाब देते हुए कहा था कि खरीद तो पोर्टल के जरिये ही होगी। बाकी मांगों पर भी उन्होंने साफ इनकार कर दिया था। शनिवार दोपहर तक सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हुई। आढ़तियों ने अनाज मंडी में बैठक की, जिसमें गेहूं के बायकाट पर सहमति बन गई। साथ ही सभी आढ़तियों ने अपने लाइसेंस सरेंडर करने का भी फैसला कर लिया। बैठक में यह भी तय हुआ कि अगले दो दिन आढ़ती सरसों की खरीद करेंगे। सभी 85 आढ़तियों ने अपने लाइसेंस मंगवाए और उनके ढेर बनाकर मार्केट कमेटी सचिव दीपक लोहचब के पास सरेंडर करने पहुंच गए। लोहचब ने उन्हें समझाया कि लाइसेंस अपने पास रखें, उन्हें सिर्फ एक ज्ञापन बनाकर दें ताकि वे उच्च अधिकारियों तक पहुंचा सकें। आढ़तियों ने मौके पर ही ज्ञापन तैयार कर उन्हें सौंपा पर लाइसेंस वापस लेने से इनकार कर दिया और उन्हें मार्केट कमेटी के दफ्तर के बाहर ही छोड़कर चले गए। देर शाम डीसी आरएस वर्मा आढ़तियों को समझाने अनाज मंडी पहुंचे। उन्होंने करीब आधा घंटा आढ़ती एसोसिएशन के साथ बैठक की। डीसी वर्मा ने उन्हें कहा कि कोरोना को लेकर चल रहे संकट की स्थिति में वे गेहूं की खरीद प्रभावित न करें। इससे किसानों का बहुत नुकसान होगा। लेकिन आढ़ती अपने रुख पर अड़े रहे। आखिर में उपायुक्त वर्मा ने कहा कि यह मामला राज्य स्तर का है, वह मुख्यमंत्री तक उनकी बात पहुंचा देंगे। वहां से जो भी जवाब आएगा, सुबह आढ़तियों को बता दिया जाएगा। बायकाट की कॉल में रोहतक, महम और कलानौर पूरी तरह शामिल हैं। सांपला मंडी को लेकर असमंजस है। प्रशासन का दावा है कि सांपला में सरसों की तरह ही गेहूं की भी खरीद होगी। उधर, आढ़ती एसोसिएशन भी दावा कर रही है कि सांपला के आढ़ती भी रविवार तक उनके साथ आ जाएंगे।
विज्ञापन

आढ़तियों की प्रमुख मांगें
1. पिछले साल की तरह परंपरागत मैनुअल ढंग से गेहूं की खरीद करने दी जाए। ऑनलाइन पोर्टल सिस्टम न लागू किया जाए। क्योंकि ज्यादातर किसान पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन ही नहीं करवा सके हैं। आढ़ती प्रशासन द्वारा निर्धारित संख्या में किसानों को बुलाएंगे, सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

2. किसानों को अपनी मर्जी के मुताबिक फसल बेचने दी जाए। सरकार ने ब्लॉक-वाइज मैपिंग का प्रावधान किया है, जिसमें किसान अपने ब्लॉक की ही किसी मंडी में फसल बेच सकेगा और कहीं नहीं।
3. किसानों को अदायगी आढ़तियों के माध्यम से ही की जाए, ताकि वे अपना एडवांस काट कर बाकी रकम किसानों को दे दें।
4. पचास क्विंटल प्रतिदिन खरीद की शर्त हटाई जाए।
आसान नहीं प्रशासन की राह
सरसों की खरीद के समय भी आढ़तियों ने बायकाट किया था, तब प्रशासन ने खरीद एजेंसी हैफेड की सोसायटी के जरिये खरीद की तैयारी कर ली थी। हालांकि चुनिंदा आढ़ती साथ आ गए थे। पर गेहूं का रकबा बहुत है। प्रशासन के पास लेबर नहीं है। जिले भर के आढ़तियों के पास ही सौ से कुछ ज्यादा मजदूर हैं। ये बहुत कम हैं, मगर फिर भी धीरे-धीरे खरीद का काम चल सकता है। आढ़तियों के बगैर प्रशासन के पास अपने दम पर खरीद के लिए बिल्कुल भी संसाधन नहीं हैं।
चुनावी साल में मान गई थी सरकार
भाजपा सरकार ने पिछले साल मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर उसके माध्यम से फसलों की खरीद का सिस्टम शुरू किया था। पिछले साल भी आढ़तियों ने इसका विरोध किया था। पर चुनावी साल था, इसलिए सरकार ने मान लिया था और पिछले साल मैनुअल सिस्टम से ही गेहूं की खरीद की गई थी। आढ़तियों को उम्मीद है कि इस बार भी ऐसा हो जाएगा।
50 क्विंटल की शर्त बनी मुसीबत
सरकार ने सरसों में प्रावधान किया था कि एक दिन में एक किसान से प्रति एकड़ 25 क्विंटल फसल खरीदी जाएगी। लेकिन किसानों के विरोध के बाद इसे बढ़ाकर चालीस क्विंटल प्रतिदिन कर दिया। इसी तर्ज में गेहूं में भी प्रतिदिन प्रति किसान पचास क्विंटल की शर्त रखी गई है। सरकार का मानना है कि इससे तीन एकड़ तक के किसान कवर हो जाएंगे, जिनकी संख्या सबसे ज्यादा है। लेकिन आढ़तियों का कहना है कि इससे किसानों को बहुत नुकसान होगा, बार-बार फसल लाने से उन्हें किराया ज्यादा देना पड़ेगा, आमदनी घट जाएगी।
राज्य कमेटी मानी, चार जिले नहीं
गेहूं खरीद को लेकर सरकार की राज्य स्तर पर आढ़तियों के साथ बातचीत चल रही थी। इसके बाद शनिवार सुबह एक पत्र जारी कर उनकी मांगें मान ली गई थीं। अनाज मंडी के जिला अध्यक्ष हर्ष गिरधर ने बताया कि सरकार ने उनकी मांग पर पब्लिक फाइनांस मैनेजमेंट सिस्टम के बजाय आढ़तियों के पुराने बैंक अकाउंट्स से ही लेन-देन स्वीकार कर लिया था। किसानों को इसी के जरिये पेमेंट की बात भी मान ली थी। यह भी मान लिया था कि किसान जहां चाहे अपनी फसल बेच सकता है। लेकिन चार जिलों की एसोसिएशन पोर्टल के बजाय मैनुअल सिस्टम से खरीद पर अड़ गईं। जींद, पानीपत, सोनीपत और रोहतक की एसोसिएशन ने गेहूं खरीद के बायकाट का एलान कर दिया।
खरीद केंद्रों पर किसानों को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाएगा। कोरोना को देखते हुए सभी पक्षों को अपनी सामाजिक जिम्मेवारी का निर्वाह करना चाहिए। आढ़तियों से बात की जा रही है, जल्द समस्या हल होने की उम्मीद है।

आरएस वर्मा, डीसी, रोहतक।
हमने यही मांग रखी है कि पोर्टल के बजाय मैनुअल सिस्टम से खरीद करवाई जाए। आढ़ती चुनिंदा किसानों को बुलाकर सामाजिक दूरी बनाते हुए खरीद कर लेंगे। पचास क्विंटल प्रतिदिन की शर्त हटाई जाए, इसमें किसानों का नुकसान है। प्रशासन को स्पष्ट कर दिया है, अगर मांगे न मानी गईं तो गेहूं खरीद का बायकाट किया जाएगा।
डिंपल बधवार, प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन, रोहतक।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed