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कर्मचारियों के हक में आया फैसला, फिर भी नहीं मिल रही नियुक्ति
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 25 Apr 2017 02:30 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : Pintrest
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वैश्य संस्था में चल रहे विवाद के बीच सोमवार को इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़ा एक और नया मामला सामने आ गया। दो वर्ष पहले निकाले गए लैब टेक्नीशियन को लेबर कोर्ट से न्याय मिलने के बाद भी नौकरी नहीं दी जा रही है। नौकरी के लिए लैब टेक्नीशियन संस्था के पदाधिकारियों से भी गुहार लगा चुके हैं।
दरअसल, वैश्य कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में कुछ साल पहले लैब टेक्नीशियन की भर्ती हुई थी। इन्हें 5200 रुपये के पे ग्रेड पर रखा जा रहा था। करीब दो साल पहले आठ लैब टेक्नीशियन ने पे ग्रेड बढ़ाने की मांग की। मामला इतना बढ़ा कि कर्मचारियों ने कोर्ट में केस डाल दिया। इसी बीच कॉलेज प्रबंधन ने लैब टेक्नीशियन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया। केस वापस नहीं लेने पर उन्होंने सभी को नौकरी से निकाल दिया। इसमें तर्क दिया गया कि लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति नियमों के अनुसार नहीं थी। अब करीब दो साल बाद लेबर कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दे दिया। लैब टेक्नीशियन विकास और साहिल आदि का कहना है कि फैसला आने के बाद वह कई बार संस्था के पदाधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। प्रबंधन अब भी उन्हें नौकरी नहीं देना चाहता। इससे कर्मचारियों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
नहीं आया ऐसा कोई मामला सामने
ऐसा कोई भी मामला अभी तक मेरी जानकारी में नहीं आया है। मामले का पता कराया जाएगा।
- राजेंद्र बंसल, प्रधान वैश्य शिक्षण संस्था।
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दरअसल, वैश्य कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में कुछ साल पहले लैब टेक्नीशियन की भर्ती हुई थी। इन्हें 5200 रुपये के पे ग्रेड पर रखा जा रहा था। करीब दो साल पहले आठ लैब टेक्नीशियन ने पे ग्रेड बढ़ाने की मांग की। मामला इतना बढ़ा कि कर्मचारियों ने कोर्ट में केस डाल दिया। इसी बीच कॉलेज प्रबंधन ने लैब टेक्नीशियन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया। केस वापस नहीं लेने पर उन्होंने सभी को नौकरी से निकाल दिया। इसमें तर्क दिया गया कि लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति नियमों के अनुसार नहीं थी। अब करीब दो साल बाद लेबर कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दे दिया। लैब टेक्नीशियन विकास और साहिल आदि का कहना है कि फैसला आने के बाद वह कई बार संस्था के पदाधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। प्रबंधन अब भी उन्हें नौकरी नहीं देना चाहता। इससे कर्मचारियों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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नहीं आया ऐसा कोई मामला सामने
ऐसा कोई भी मामला अभी तक मेरी जानकारी में नहीं आया है। मामले का पता कराया जाएगा।
- राजेंद्र बंसल, प्रधान वैश्य शिक्षण संस्था।