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Rohtak News: पढ़ाई के समय मोबाइल देखने पर टोका किशोर ने घर छोड़ा

Sun, 26 Feb 2023 01:14 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 26 Feb 2023 01:14 AM IST
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Toka Kishore left the house after seeing the mobile while studying
रोहतक। गोहाना रोड की एक कॉलोनी में पढ़ाई करते वक्त मोबाइल फोन नहीं छूने की बात बच्चे को बुरी लगी। मां ने 14 साल के बेटे को डांटा तो वह घर छोड़कर चला गया। रातभर रेलवे स्टेशन पर रहने के बाद शनिवार की दोपहर इंस्टाग्राम से मैसेज भेजकर कहा, मैं ठीक हूं। दो दिन बाद शनिवार को घर लौट आया। इसके बाद पुलिस व परिजनों ने राहत की सांस ली।
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सुखपुरा पुलिस चौकी के एएसआई हरदयाल सिंह ने बताया कि शुक्रवार को गोहाना रोड स्थित एक कॉलोनी का व्यक्ति चौकी में आया। उसने कहा, उसकी एक बेटा व एक बेटी है। 14 साल का बेटा बड़ा है। वह शहर के नामी स्कूल में पढ़ता है। 23 फरवरी को दोपहर करीब तीन बजे घर आया। उसकी मां ने उसको फोन देखने पर डांट दिया। इससे नाराज होकर वह घर छोड़कर चला गया। वह उसे वीरवार शाम व रात ढूंढते रहे, रिश्तेदारों से भी बात की, लेकिन कहीं पता नहीं लगा। आखिर में शुक्रवार को वह पुलिस के पास पहुंचे। शाम साढ़े छह बजे पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की छात्र की तलाश शुरू की। शनिवार को वह खुद ही घर लौट आया।
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इंस्टाग्राम पर आया मैसेज, लिखा मैं ठीक हूं
छात्र की तलाश में जुटी पुलिस को परिजनों ने शनिवार दोपहर लापता छात्र का मैसेज इंस्टाग्राम पर आया है। उसने लिखा है कि वह ठीक है, लेकिन यह नहीं बताया कि वह कहां पर है। परिजनों को राहत तो मिली, लेकिन चिंता दूर नहीं हुई। दोपहर बाद करीब चार बजे किसी ने बताया कि छात्र लाढ़ोत रोड पर गली के किनारे पर बैठा हुआ है। परिजन मौके पर पहुंचे और छात्र को घर ले गए। साथ ही पुलिस को अवगत कराया।
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जांच में पता चला है कि छात्र जब स्कूल से आया तो मां ने कहा कि पढ़ाई की जगह मोबाइल पर ज्यादा जोर रहता है। इसी बात पर छात्र नाराज होकर चला गया था। एक रात वह स्टेशन पर रहा। बाद में शहर में ही इधर-उधर घूमता रहा। अब मर्जी से वापस आ गया है।

हरदयाल सिंह, जांच अधिकारी थाना सिटी

एमडीयू के मनोविज्ञान विभाग की सीनियर प्रोफेसर ने सुझाए पांच उपाए, यूं पेश आएं माता-पिता
माता-पिता एक दोस्त की तरह बच्चे से पेश आएं।
दिन में आधा घंटा जरूर बच्चों से हल्के माहौल में बातचीत करें।
सुविधा न मिलने पर धैर्य रखना भी सिखाएं। सुविधाओं में बैलेंस रखें।
बच्चों को महसूस करवाएं कि सुविधाएं आसानी से नहीं मिलती।
माता-पिता बच्चों का रोल मॉडल बने। सही व गलत में फर्क समझाएं।

किशोर अवस्था में बच्चों के अंदर शारीरिक के साथ-साथ मानसिक बदलाव भी होते हैं। ऐसे में माता-पिता की भूमिका बढ़ जाती है। रोल मॉडल बनकर बताना पड़ता है कि क्या सही है क्या गलत है। कई बार ज्यादा उम्मीदें पालने से भी बच्चों पर दबाव बढ़ता है। हर बच्चा ऑलराउंडर नहीं होता।
सोनिया मलिक, सीनियर प्रोफेसर मनोविज्ञान विभाग एमडीयू एवं निदेशक यूनिवर्सिटी कैंपस स्कूल
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