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कोरोना काल में दो से पांच हुआ बाघ सागर-आशा का परिवार
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मिनी जू में पानी में बाघ आशा और सागर के शावक पानी में अठखेलियां करते। अमर उजाला
- फोटो : RohtakCity
रोहतक। कोरोना काल भले लोगों की परेशानी का सबब बना, मगर बाघ सागर व आशा के लिए यह समय खुशी देने वाला साबित हुआ। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से आए इस जोड़े का परिवार अब पांच सदस्यों का हो गया है। आशा ने पहली बार नर शावक और दूसरी बार नर व मादा दो शावकों को जन्म दिया। बचपन छोड़ युवा अवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहे ये तीनों शावक लघु चिड़ियाघर में लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
कोरोना से पहले छत्तीसगढ़ से लाए गए बंगाल टाईगर के जोड़े (सागर व आशा) की दहाड़ ने चिड़ियाघर में छाया सन्नाटा दूर करने का काम किया। महामारी के चलते पिछले करीब ढाई साल चिड़ियाघर आम लोगों व पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद रहा। इस बीच यहां की शांति व चिड़ियाघर का माहौल इस जोड़े को रास आया। यही वजह रही कि अब यह परिवार पांच सदस्यीय हो गया है। परिवार में तीन शावक और शामिल हो गए हैं। इनमें से एक सफेद रंग का बाघ है। पहला शावक करीब ढाई वर्ष व इसके बाद जन्मा शावकों का जोड़ा करीब डेढ़ वर्ष का है। टाईगर जोड़ा व शावक चिड़ियाघर में आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
कर्मचारियों ने हाथों से दूध पिलाकर पाला
चिड़ियाघर में जन्मे तीन नन्हें शावकों का बचपन यहां के कर्मचारियों की गोद में बीता। मंडलीय अधिकारी से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक ने इन बच्चों की देखभाल की। इसमें विभाग के निरीक्षक, चिकित्सक व अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। किसी ने सेहत का हिसाब किताब रखा तो किसी ने खुराक का। इनके साथ खेल कूद कर इनकी कसरत कराना भी इनके लालन-पालन में अहम रहा। इन प्रयासों के चलते ही शावक अब वयस्क बनने की ओर अग्रसर हैं।
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- देवेंद्र हुड्डा, निरीक्षक, वन्य प्राणी विभाग।
वर्जन-
वन्य जीवों खास कर टाईगर जोड़ा पर्यटकों के लिए विशेष तौर पर चिड़ियाघर में लाया गया है। यहां इन्हें वन जैसा माहौल देने का प्रयास किया गया है। साथ ही इनकी बेहतर देखभाल की जा रही है। इसके चलते टाईगर परिवार पांच सदस्यों का हो गया है। इस जोड़े के शावक आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
- शिव रावत, मंडलीय अधिकारी, वन्य प्राणी विभाग।
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कोरोना से पहले छत्तीसगढ़ से लाए गए बंगाल टाईगर के जोड़े (सागर व आशा) की दहाड़ ने चिड़ियाघर में छाया सन्नाटा दूर करने का काम किया। महामारी के चलते पिछले करीब ढाई साल चिड़ियाघर आम लोगों व पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद रहा। इस बीच यहां की शांति व चिड़ियाघर का माहौल इस जोड़े को रास आया। यही वजह रही कि अब यह परिवार पांच सदस्यीय हो गया है। परिवार में तीन शावक और शामिल हो गए हैं। इनमें से एक सफेद रंग का बाघ है। पहला शावक करीब ढाई वर्ष व इसके बाद जन्मा शावकों का जोड़ा करीब डेढ़ वर्ष का है। टाईगर जोड़ा व शावक चिड़ियाघर में आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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कर्मचारियों ने हाथों से दूध पिलाकर पाला
चिड़ियाघर में जन्मे तीन नन्हें शावकों का बचपन यहां के कर्मचारियों की गोद में बीता। मंडलीय अधिकारी से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक ने इन बच्चों की देखभाल की। इसमें विभाग के निरीक्षक, चिकित्सक व अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। किसी ने सेहत का हिसाब किताब रखा तो किसी ने खुराक का। इनके साथ खेल कूद कर इनकी कसरत कराना भी इनके लालन-पालन में अहम रहा। इन प्रयासों के चलते ही शावक अब वयस्क बनने की ओर अग्रसर हैं।
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- देवेंद्र हुड्डा, निरीक्षक, वन्य प्राणी विभाग।
वर्जन-
वन्य जीवों खास कर टाईगर जोड़ा पर्यटकों के लिए विशेष तौर पर चिड़ियाघर में लाया गया है। यहां इन्हें वन जैसा माहौल देने का प्रयास किया गया है। साथ ही इनकी बेहतर देखभाल की जा रही है। इसके चलते टाईगर परिवार पांच सदस्यों का हो गया है। इस जोड़े के शावक आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
- शिव रावत, मंडलीय अधिकारी, वन्य प्राणी विभाग।