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एमडीयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के चुनाव में पहली बार टाई
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एमडीयू के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के चुनावी इतिहास में पहली बार प्रधान पद पर टाई हो गया। कर्मचारी प्रधान मंच के सुमेर अहलावत और कर्मचारी विकास मंच के सुमेर सिंह अहलावत को 277-277 वोट मिले। कुलसचिव प्रो. गुलशन लाल तनेजा की मौजूदगी में दोबारा मतगणना कराई गई, लेकिन नतीजा वही रहा। इसके बाद दोनों उम्मीदवारों के मतपत्र उनकी मौजूदगी में सील कर कुलसचिव कार्यालय में रख दिए गए हैं। सुबह सभी पक्षों की मौजूदगी में प्रधान पद पर फैसला लिया जाएगा। इस चुनाव में पांच पैनल मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला कुलवंत और सुमेर गुटों के बीच रहा।
प्रशासनिक भवन की दूसरी मंजिल पर स्थित कैंटीन में बनाए गए दो पोलिंग बूथों पर मंगलवार की सुबह मतदान शुरू हुआ। सुबह से ही मतदान की रफ्तार ठीक थी, लेकिन सुबह 11 बजे यह पीक पर पहुंच गई। शाम चार बजे मतदान खत्म हो गया। उसके बाद मतदान अधिकारी डॉ. राहुल ऋषि की देखरेख में मतगणना शुरू हुई। चार बजे मतदान खत्म होने तक 823 वोट पड़े थे। साथ ही मतगणना शुरू हो गई, शाम करीब साढ़े पांच बजे तक प्रधान को छोड़कर बाकी पदों के नतीजे घोषित कर दिए गए। लेकिन प्रधान पद को लेकर असमंजस बना हुआ था। नीचे प्रशासनिक भवन के बाहर दोनों के समर्थक छोटी सी खबर के बाद खुशी से झूम उठते। हर दो मिनट बाद कोई छत पर आकर कुछ कहता और नीचे शोर मच जाता। जब कुलवंत और सुमेर के वोट बराबर आए तो सनसनी फैल गई। दोबारा दोनों के मतों की गिनती की गई, नतीजा फिर वही रहा। काफी देर तक इस पर चर्चा चलती रही कि क्या किया जाए। फिर कुलसचिव प्रो. तनेजा ने कहा कि इस पर बुधवार सुबह फैसला किया जाएगा। उसके बाद विजेता अपने समर्थकों के साथ जश्न मनाते हुए चले गए।
छह-छह माह के लिए प्रधान बन सकते हैं दोनों
एमडीयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के निवर्तमान प्रधान रणधीर कटारिया ने कहा कि टाई होने की स्थिति में संघ का संविधान चुप है, इस बारे में कुछ भी स्पष्ट निर्देशित नहीं किया गया है। लेकिन परंपराओं के अनुसार इसके लिए तीन विकल्प हो सकते हैं। प्रधान पद का कार्यकाल एक साल का होता है, ऐसे में दोनों को छह-छह माह के लिए प्रधान बनाया जा सकता है। पहले कौन प्रधान बनेगा, इसके लिए भी दो विकल्प हैं। सुमेर उम्र में कुलवंत से ज्यादा हैं, पहले उन्हें प्रधान बनाया जा सकता है। टॉस उछाल कर भी इसका फैसला किया जा सकता है। अगर इस पर सहमति नहीं बनती है तो प्रधान पद के चुनाव दोबारा करवाए जा सकते हैं।
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पहले उप प्रधान पद पर हो चुका है टाई
एमडीयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के चुनाव में इससे पहले भी एक बार टाई हो चुका है। निवर्तमान प्रधान रणधीर कटारिया ने बताया कि 2012 में उप प्रधान पद पर रमेश ढाका और अनिल मल्होत्रा के बीच टाई हो चुका है। तब दोनों को छह-छह माह के लिए पद दिया गया था।
दोनों प्रधान बोले, वही रहेगा एजेंडा
टाई होने के बाद प्रधान पद पर विजेता हुए कुलवंत मलिक और सुमेर अहलावत ने कहा कि पदाधिकारी भले ही बदल गए हों लेकिन संघ का एजेंडा वही रहेगा। कर्मचारियों के हितों की बात ही सर्वोपरि रहेगी। इस समय सबसे बड़ा मुद्दा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रहार का है। जिसे लेकर सभी विश्वविद्यालयों में धरने चल रहे हैं। इसे लेकर बुधवार को एमडीयू में सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की बैठक होगी। उसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। बाकी जो मुद्दे निवर्तमान पदाधिकारियों की प्राथमिकता थे, अब भी वही रहेंगे।
तीन बार प्रधान रहे कुलवंत ने फिर दिखाया जलवा
एमडीयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के चुनाव में मुख्य मुकाबला कुलवंत मलिक और सुमेर अहलावत के गुटों के बीच रहा। तीन बार प्रधान रह चुके कुलवंत मलिक ने फिर अपना जलवा दिखाया लेकिन अहलावत गुट ने उन्हें कड़ी चुनौती दी। फूल कुमार बोहत गुट ने भी कुछ टक्कर दी, लेकिन बाकी दोनों पैनल पूरी तरह दरकिनार कर दिए गए।
प्रधान पद के लिए कुलवंत मलिक और सुमेर अहलावत को 277-277 वोट मिले तो तीसरे स्थान पर निवर्तमान काबिज गुट के फूल कुमार बोहत (187) रहे। प्रधान पद पर महिला प्रत्याशी के रूप में जोर-शोर से प्रोजेक्ट की जा रही राजबाला मलिक कुछ खास नहीं कर पाईं। उप प्रधान पर सुमेर गुट के विकास गिल ने कुलवंत गुट के योगेश बलाना पर आसान जीत दर्ज की, बोहत ग्रुप के राजेश शर्मा भी थोड़ा ही पीछे रहे। महासचिव पद पर कुलवंत गुट के सुरेश शर्मा (276) ने आसान जीत दर्ज की, बोहत गुट के राजेश गिरधर (230) दूसरे स्थान पर रहे। कोषाध्यक्ष पद पर कुलवंत गुट के अजमेर सिंह (267) और सुमेर गुट के दीपक कुमार (260) के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। वहीं, सह-सचिव पद पर कुलवंत गुट के सुनील सैनी ने (297) आसान जीत दर्ज की, सुमेर गुट के राजवीर (249) दूसरे स्थान पर रहे।
चुनाव परिणाम
प्रधान
कुलवंत मलिक - 277
सुमेर अहलावत - 277
फूल कुमार बोहत - 187
राजबाला - 63
राजेंद्र यादव - 14
वैध वोट - 818
उपप्रधान
विकास गिल - 283
योगेश बलाना - 229
राजेश शर्मा - 200
नरेंद्र मलिक - 103
वैध वोट - 815
महासचिव
सुरेश शर्मा - 276
जयपाल राठी - 28
कुलदीप ग्रोवर - 210
प्रवीण दलाल - 74
राजेश गिरधर - 230
वैध वोट - 818
कोषाध्यक्ष
अजमेर सिंह - 267
प्रदीप कुमार - 260
दीपक कुमार - 161
राजकुमार - 132
वैध वोट - 820
सह-सचिव
सुनील सैनी - 297
राजवीर - 249
राजवीर रोहिल्ला - 124
रणधीर - 149
वैध वोट - 819
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प्रशासनिक भवन की दूसरी मंजिल पर स्थित कैंटीन में बनाए गए दो पोलिंग बूथों पर मंगलवार की सुबह मतदान शुरू हुआ। सुबह से ही मतदान की रफ्तार ठीक थी, लेकिन सुबह 11 बजे यह पीक पर पहुंच गई। शाम चार बजे मतदान खत्म हो गया। उसके बाद मतदान अधिकारी डॉ. राहुल ऋषि की देखरेख में मतगणना शुरू हुई। चार बजे मतदान खत्म होने तक 823 वोट पड़े थे। साथ ही मतगणना शुरू हो गई, शाम करीब साढ़े पांच बजे तक प्रधान को छोड़कर बाकी पदों के नतीजे घोषित कर दिए गए। लेकिन प्रधान पद को लेकर असमंजस बना हुआ था। नीचे प्रशासनिक भवन के बाहर दोनों के समर्थक छोटी सी खबर के बाद खुशी से झूम उठते। हर दो मिनट बाद कोई छत पर आकर कुछ कहता और नीचे शोर मच जाता। जब कुलवंत और सुमेर के वोट बराबर आए तो सनसनी फैल गई। दोबारा दोनों के मतों की गिनती की गई, नतीजा फिर वही रहा। काफी देर तक इस पर चर्चा चलती रही कि क्या किया जाए। फिर कुलसचिव प्रो. तनेजा ने कहा कि इस पर बुधवार सुबह फैसला किया जाएगा। उसके बाद विजेता अपने समर्थकों के साथ जश्न मनाते हुए चले गए।
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छह-छह माह के लिए प्रधान बन सकते हैं दोनों
एमडीयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के निवर्तमान प्रधान रणधीर कटारिया ने कहा कि टाई होने की स्थिति में संघ का संविधान चुप है, इस बारे में कुछ भी स्पष्ट निर्देशित नहीं किया गया है। लेकिन परंपराओं के अनुसार इसके लिए तीन विकल्प हो सकते हैं। प्रधान पद का कार्यकाल एक साल का होता है, ऐसे में दोनों को छह-छह माह के लिए प्रधान बनाया जा सकता है। पहले कौन प्रधान बनेगा, इसके लिए भी दो विकल्प हैं। सुमेर उम्र में कुलवंत से ज्यादा हैं, पहले उन्हें प्रधान बनाया जा सकता है। टॉस उछाल कर भी इसका फैसला किया जा सकता है। अगर इस पर सहमति नहीं बनती है तो प्रधान पद के चुनाव दोबारा करवाए जा सकते हैं।
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पहले उप प्रधान पद पर हो चुका है टाई
एमडीयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के चुनाव में इससे पहले भी एक बार टाई हो चुका है। निवर्तमान प्रधान रणधीर कटारिया ने बताया कि 2012 में उप प्रधान पद पर रमेश ढाका और अनिल मल्होत्रा के बीच टाई हो चुका है। तब दोनों को छह-छह माह के लिए पद दिया गया था।
दोनों प्रधान बोले, वही रहेगा एजेंडा
टाई होने के बाद प्रधान पद पर विजेता हुए कुलवंत मलिक और सुमेर अहलावत ने कहा कि पदाधिकारी भले ही बदल गए हों लेकिन संघ का एजेंडा वही रहेगा। कर्मचारियों के हितों की बात ही सर्वोपरि रहेगी। इस समय सबसे बड़ा मुद्दा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रहार का है। जिसे लेकर सभी विश्वविद्यालयों में धरने चल रहे हैं। इसे लेकर बुधवार को एमडीयू में सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की बैठक होगी। उसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। बाकी जो मुद्दे निवर्तमान पदाधिकारियों की प्राथमिकता थे, अब भी वही रहेंगे।
तीन बार प्रधान रहे कुलवंत ने फिर दिखाया जलवा
एमडीयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के चुनाव में मुख्य मुकाबला कुलवंत मलिक और सुमेर अहलावत के गुटों के बीच रहा। तीन बार प्रधान रह चुके कुलवंत मलिक ने फिर अपना जलवा दिखाया लेकिन अहलावत गुट ने उन्हें कड़ी चुनौती दी। फूल कुमार बोहत गुट ने भी कुछ टक्कर दी, लेकिन बाकी दोनों पैनल पूरी तरह दरकिनार कर दिए गए।
प्रधान पद के लिए कुलवंत मलिक और सुमेर अहलावत को 277-277 वोट मिले तो तीसरे स्थान पर निवर्तमान काबिज गुट के फूल कुमार बोहत (187) रहे। प्रधान पद पर महिला प्रत्याशी के रूप में जोर-शोर से प्रोजेक्ट की जा रही राजबाला मलिक कुछ खास नहीं कर पाईं। उप प्रधान पर सुमेर गुट के विकास गिल ने कुलवंत गुट के योगेश बलाना पर आसान जीत दर्ज की, बोहत ग्रुप के राजेश शर्मा भी थोड़ा ही पीछे रहे। महासचिव पद पर कुलवंत गुट के सुरेश शर्मा (276) ने आसान जीत दर्ज की, बोहत गुट के राजेश गिरधर (230) दूसरे स्थान पर रहे। कोषाध्यक्ष पद पर कुलवंत गुट के अजमेर सिंह (267) और सुमेर गुट के दीपक कुमार (260) के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। वहीं, सह-सचिव पद पर कुलवंत गुट के सुनील सैनी ने (297) आसान जीत दर्ज की, सुमेर गुट के राजवीर (249) दूसरे स्थान पर रहे।
चुनाव परिणाम
प्रधान
कुलवंत मलिक - 277
सुमेर अहलावत - 277
फूल कुमार बोहत - 187
राजबाला - 63
राजेंद्र यादव - 14
वैध वोट - 818
उपप्रधान
विकास गिल - 283
योगेश बलाना - 229
राजेश शर्मा - 200
नरेंद्र मलिक - 103
वैध वोट - 815
महासचिव
सुरेश शर्मा - 276
जयपाल राठी - 28
कुलदीप ग्रोवर - 210
प्रवीण दलाल - 74
राजेश गिरधर - 230
वैध वोट - 818
कोषाध्यक्ष
अजमेर सिंह - 267
प्रदीप कुमार - 260
दीपक कुमार - 161
राजकुमार - 132
वैध वोट - 820
सह-सचिव
सुनील सैनी - 297
राजवीर - 249
राजवीर रोहिल्ला - 124
रणधीर - 149
वैध वोट - 819