{"_id":"6992092398e684afd0017938","slug":"there-is-a-need-to-connect-art-with-the-market-and-society-prof-rajbir-singh-rohtak-news-c-17-roh1020-810885-2026-02-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"कला को बाजार और समाज से जोड़ने की जरूरत : प्रो. राजबीर सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कला को बाजार और समाज से जोड़ने की जरूरत : प्रो. राजबीर सिंह
विज्ञापन
16-महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में रंग सृजन कार्यक्रम में प्रदर्शनी का अवलोकन करते कुलपति प्रो.
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में रंग बहार के अंतर्गत दो दिवसीय रंग सृजन कार्यक्रम का रविवार को शुभारंभ हुआ। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को मंच प्रदान कर उनकी सृजनात्मक क्षमताओं को निखारना है।
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि कला के कमर्शियल पहलू को पहचानते हुए उसे बाजार और समाज से जोड़ने की जरूरत है। रचनात्मकता तभी सार्थक है जब वह रोजगार सृजन और सामाजिक दिशा प्रदान करने में सहायक बने।
कुलपति ने कहा कि आत्मविश्वास के साथ किया गया सृजनात्मक कार्य अपनी अलग छटा बिखेरता है। आने वाले समय में ‘रंग सृजन’ और अधिक व्यापक स्वरूप ग्रहण करेगा। उन्होंने विद्यार्थियों को कला को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि करियर और उद्यमिता के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दृश्य कला विभाग में लगी फोटो व चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन कर विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की।
विज्ञापन
कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने कहा कि कला विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, नवाचार और आत्म-अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करती है। ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय परिसर को सृजनात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। डीन (शैक्षणिक कार्य) प्रो. एस.सी. मलिक ने कहा कि रचनात्मक कला शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मौके पर संयोजक एवं दृश्य कला विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. सपना गर्ग, डॉ. अंजलि दूहन, डॉ. राजेश कुमार, प्रो. हरीश कुमार, डॉ. शकुंतला बेनीवाल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि कला के कमर्शियल पहलू को पहचानते हुए उसे बाजार और समाज से जोड़ने की जरूरत है। रचनात्मकता तभी सार्थक है जब वह रोजगार सृजन और सामाजिक दिशा प्रदान करने में सहायक बने।
विज्ञापन
कुलपति ने कहा कि आत्मविश्वास के साथ किया गया सृजनात्मक कार्य अपनी अलग छटा बिखेरता है। आने वाले समय में ‘रंग सृजन’ और अधिक व्यापक स्वरूप ग्रहण करेगा। उन्होंने विद्यार्थियों को कला को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि करियर और उद्यमिता के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दृश्य कला विभाग में लगी फोटो व चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन कर विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की।
विज्ञापन
कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने कहा कि कला विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, नवाचार और आत्म-अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करती है। ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय परिसर को सृजनात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। डीन (शैक्षणिक कार्य) प्रो. एस.सी. मलिक ने कहा कि रचनात्मक कला शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मौके पर संयोजक एवं दृश्य कला विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. सपना गर्ग, डॉ. अंजलि दूहन, डॉ. राजेश कुमार, प्रो. हरीश कुमार, डॉ. शकुंतला बेनीवाल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

16-महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में रंग सृजन कार्यक्रम में प्रदर्शनी का अवलोकन करते कुलपति प्रो.