फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   The aim of the judiciary is to provide cheap, accessible and speedy justice: Balakrishnan

सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय देना ही न्यायपालिका का मकसद : बालाकृष्णन

Tue, 26 Oct 2021 02:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 26 Oct 2021 02:00 AM IST
विज्ञापन
The aim of the judiciary is to provide cheap, accessible and speedy justice: Balakrishnan
एमडीयू के आईएचटीएम में सोमवार को आयोजित सेमिनार को संबोधित करते पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बाला
रोहतक। सभी को सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय देना ही न्यायपालिका का मकसद होना चाहिए। इन तीनों बातों से न्यायपालिका की साख मजबूत होगी और सभी को इसका फायदा मिलेगा। यह बात सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने एमडीयू के इंस्टीट्यूट ऑफ होटल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट के सभागार में आयोजित सेमिनार में कही।
विज्ञापन

पूर्व न्यायाधीश बालाकृष्णन ने कहा कि अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे अपने मुवक्किलों को केस के दौरान अदालतों में आने वाली समस्याओं से अवगत कराएं। देश के आधे से ज्यादा केस मध्यस्थता से सुलझाए जा सकते हैं, लेकिन फिर भी मामले दायर होते हैं, जिससे न्यायपालिका पर बोझ लगातार बढ़ रहा है।
विज्ञापन

युवा अधिवक्ता न्यायिक क्षेत्र में मिलने वाले अवसरों पर दें विशेष ध्यान
पूर्व न्यायाधीश बालाकृष्णन ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से विधि क्षेत्र में आने वालों युवाओं के लिए भी उतने अवसर हैं, जितने कॉन्वेंट से आने वालों के लिए। वह भी ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक न्याय के विभिन्न क्षेत्रों के उच्च पदों तक पहुंचे। युवा अधिवक्ताओं को न्यायिक क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले अवसरों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था सुदृढ़ है। न्यायपालिका हर किसी को समान न्याय प्रदान कर रही है। आम आदमी के मन में न्यायपालिका के प्रति विशेष सम्मान है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में विद्यार्थियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। लॉकडाउन की वजह से वे उच्च शिक्षा से वंचित रहे। ज्यूडीशियल सर्विस की तैयारियों में चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थी सेलेक्टिव पाठ्यक्रम नहीं पढ़ रहे, वे पूरा पाठ्यक्रम पढ़ना चाहते हैं, जिसकी प्रतियोगी परीक्षा के लिए जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केकेएल गौतम ने कहा कि अधिवक्ता बनना एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें पहले बहुत समय देना पड़ता है, मेहनत करनी पड़ती है। बाद में इसके परिणाम आने शुरू होते हैं और सफलता के शिखर पर पहुंचा जा सकता है। काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के पूर्व चेयरमैन विजेंद्र अहलावत, लोकेंद्र फोगाट, डॉ. अरुण खत्री, एमडीयू विधि विभाग की अध्यक्ष कविता ढुल, सीआर लॉ कॉलेज के निदेशक आनंद देशवाल, कौटिल्य लॉ इंस्टीट्यूट की निदेशक रीना खत्री ने भी सेमिनार को संबोधित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed