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किसानों के रहनुमा थे सर छोटूराम : प्रधान फूलकुमार
Tue, 25 Nov 2025 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 25 Nov 2025 12:57 AM IST
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24जेएनडी33-जाट धर्मशाला में दीनबंधु सर छोटूराम की जयंती मनाते हुए जाट धमार्थ सभा पदाधिकारी। स्
- फोटो : credit
जींद। दीनबंधु सर छोटूराम की जयंती पर सोमवार को जाट धर्मशाला में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान पदाधिकारियों ने सर छोटूराम द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। प्रधान फूलकुमार मोर ने कहा कि दीनबंधु सर छोटूराम किसानों के रहनुमा थे।
उन्होंने किसानों को संदेश दिया था, भोले किसान तू बोलना सीख ले और अपना दुश्मन पहचान ले। अंग्रेजी शासनकाल में जब सर छोटूराम पंजाब के राजस्व मंत्री थे तब उन्होंने किसानों को शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए कई ऐतिहासिक कानून बनवाए।
इनमें 1934 का पंजाब ऋण मुक्ति अधिनियम, 1938 का साहूकार पंजीकरण एक्ट और 1938 का गिरवी जमीनों की मुफ्त वापसी एक्ट प्रमुख थे। इन कानूनों के लागू होने से किसानों को साहूकारों और सूदखोरों के चंगुल से बड़ी राहत मिली जिससे उनके जीवन में खुशहाली आई।
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सभा के उपप्रधान किताब सिंह भनवाला और कोषाध्यक्ष डाॅ. बलवंत सिंह ने कि एक बार जब अंग्रेज वायसराय ने किसानों से गेहूं कम कीमत पर खरीदने का प्रयास किया तो सर छोटूराम ने उनका विरोध किया। उन्होंने वायसराय को उच्च दर पर गेहूं खरीदने के लिए मजबूर कर दिया। ऐसे में सर छोटूराम ने किसानों को नया जीवन देने का काम किया है।
इस अवसर पर कार्यकारिणी सदस्य शीशपाल लोहान, एडवोकेट वीरेंद्र लाठर, कुलदीप मलिक, ओमसिंह पिलानिया, सुमन मान आर्य मौजूद रहे।
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उन्होंने किसानों को संदेश दिया था, भोले किसान तू बोलना सीख ले और अपना दुश्मन पहचान ले। अंग्रेजी शासनकाल में जब सर छोटूराम पंजाब के राजस्व मंत्री थे तब उन्होंने किसानों को शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए कई ऐतिहासिक कानून बनवाए।
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इनमें 1934 का पंजाब ऋण मुक्ति अधिनियम, 1938 का साहूकार पंजीकरण एक्ट और 1938 का गिरवी जमीनों की मुफ्त वापसी एक्ट प्रमुख थे। इन कानूनों के लागू होने से किसानों को साहूकारों और सूदखोरों के चंगुल से बड़ी राहत मिली जिससे उनके जीवन में खुशहाली आई।
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सभा के उपप्रधान किताब सिंह भनवाला और कोषाध्यक्ष डाॅ. बलवंत सिंह ने कि एक बार जब अंग्रेज वायसराय ने किसानों से गेहूं कम कीमत पर खरीदने का प्रयास किया तो सर छोटूराम ने उनका विरोध किया। उन्होंने वायसराय को उच्च दर पर गेहूं खरीदने के लिए मजबूर कर दिया। ऐसे में सर छोटूराम ने किसानों को नया जीवन देने का काम किया है।
इस अवसर पर कार्यकारिणी सदस्य शीशपाल लोहान, एडवोकेट वीरेंद्र लाठर, कुलदीप मलिक, ओमसिंह पिलानिया, सुमन मान आर्य मौजूद रहे।