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प्रदेश में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस टीम को झटका, कोर्ट ने खारिज की रिमांड की अर्जी
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ोहतक। प्रदेश के छात्रवृत्ति घोटाले में सोमवार को सीजेएम आशीष शर्मा की अदालत ने राजस्थान के निजी विवि के पूर्व चेयरमैन जोगेंद्र दलाल को सात दिन के रिमांड पर भेजने की विजिलेंस की अर्जी खारिज कर दी। बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि विजिलेंस ने आरोपी का आधार कार्ड व दूसरा रिकॉर्ड बरामद करने की बात कही है। जबकि आरोपी ने आधार कार्ड बनवा ही नहीं रखा। तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने रोहतक की रामगोपाल कॉलोनी निवासी जोगेंद्र दलाल को न्यायिक हिरासत के चलते सुनारिया जेल भेज दिया। बचाव पक्ष के वकील पीयूष गक्खड़ ने बताया कि स्टेट विजिलेंस 2016 से 2019 तक छात्र व छात्राओं को जारी होने वाली छात्रवृत्ति की गड़बड़ी की जांच कर रही है। आरोप है कि छात्रों के गलत आधार कार्ड व बैंक अकाउंट बनवाकर राशि हड़प ली गई। इस मामले में अब तक विजिलेंस कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। 22 जुलाई को विजिलेंस द्वारा अदालत मेें दाखिल रिमांड पत्र में बताया गया है कि जनवरी 2020 को रोहतक कोर्ट से राजस्थान के चूरू स्थित निजी विवि के मालिक जोगेंद्र दलाल के वारंट जारी करवाए गए। बाद में पता चला कि जोगेंद्र दलाल विदेश गए हुए हैं। 9 जुलाई को जोगेंद्र दलाल लंदन से वापस आए तो एयरपोर्ट पर उनको हिरासत में ले लिया गया। मामले की सूचना पाकर विजिलेंस की टीम दिल्ली पहुंची और आरोपी को रोहतक लाकर तिलियार झील पर सात दिन के लिए क्वारंटीन करवाया गया। 10 जुलाई को डीसी के आदेश पर जोगेंद्र दलाल को गौड़ ब्राह्मण आयुर्वेदिक कॉलेज ब्राह्मणवास में क्वारंटीन कर दिया गया। वहां पर 13 जुलाई को आरोपी का कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया गया। इसके बाद दोबारा 16 जुलाई को सैंपल लेकर टेस्ट किया गया। 17 जुलाई को आरोपी की रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद 22 जुलाई को स्टेट विजिलेंस ने आरोपी को जांच में शामिल कर गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने विजिलेंस की अर्जी पर आरोपी को चार दिन के रिमांड पर भेजा दिया। विजिलेंस ने तर्क दिया था कि आरोपी से छात्र व छात्राओं की पासबुक, बैंक बुक, एटीएम व अन्य कागजात बरामद करने हैं।
विजिलेंस ने मांगा था सात दिन का और रिमांड
सोमवार को रिमांड अवधि खत्म होने के बाद आरोपी को विजिलेंस ने अदालत में पेश किया। जांच टीम ने अर्जी दी कि अभी पूरे कागजात बरामद नहीं हुए हैं। आरोपी का आधार कार्ड व पैन कार्ड भी बरामद किया जाना है। ऐसे में आरोपी को सात दिन के रिमांड पर भेजा जाए। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि, आरोपी का आधार कार्ड नहीं बना हुआ है। इसकी ऑनलाइन जांच हो सकती है। दूसरा पैन कार्ड पहले ही जमा करवाया जा चुका है। जो अन्य रिकॉर्ड जांच टीम बरामद करने की बात कह रही है, वह बरामद हो चुका है। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद अदालत ने विजिलेंस की अर्जी खारिज कर दी और आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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विजिलेंस ने मांगा था सात दिन का और रिमांड
सोमवार को रिमांड अवधि खत्म होने के बाद आरोपी को विजिलेंस ने अदालत में पेश किया। जांच टीम ने अर्जी दी कि अभी पूरे कागजात बरामद नहीं हुए हैं। आरोपी का आधार कार्ड व पैन कार्ड भी बरामद किया जाना है। ऐसे में आरोपी को सात दिन के रिमांड पर भेजा जाए। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि, आरोपी का आधार कार्ड नहीं बना हुआ है। इसकी ऑनलाइन जांच हो सकती है। दूसरा पैन कार्ड पहले ही जमा करवाया जा चुका है। जो अन्य रिकॉर्ड जांच टीम बरामद करने की बात कह रही है, वह बरामद हो चुका है। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद अदालत ने विजिलेंस की अर्जी खारिज कर दी और आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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