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Rohtak News: यूपीएससी में 41वीं रैंक हासिल कर सुनारिया के सौरभ बने आईएएस
Tue, 29 Oct 2024 06:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 29 Oct 2024 06:06 AM IST
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रोहतक। सुनारिया के सुरेंद्र बुधवार के बेटे सौरभ बुधवार ने सोमवार को परिजनों और ग्रामीणों को गौरव का क्षण दिया। सौरभ के गांव के लोग गर्व के साथ इस बात को बता रहे हैं कि यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) सिविल सर्विस एग्जाम में 41वीं रैंक पाने वाले उनके गांव के बेटे हैं। उन्होंने तीसरी बार में यह सफलता हासिल की है। 25 अक्तूबर को पेडिंग लिस्ट का परिणाम जारी किया गया है।
यूपीएससी में 41वीं रैंक हासिल करने वाले सौरभ ने बताया कि असफलता मिलने के बाद एक बार तो ऐसा लगा था कि शायद उन्होंने गलत निर्णय ले लिया है लेकिन फिर यह सोचकर तैयारी में जुट जाता था कि शायद उनकी तैयारी में ही कोई कमी रह गई होगी। दो बार मिली असफलता ही उनकी प्रेरणा बनी।
सौरभ का मूल गांव सुनारियां कलां है और वर्तमान में वे रोहतक के वन सिटी सेक्टर 37 में रह रहे हैं। मॉडल स्कूल सेक्टर-4 में पढ़ते हुए उन्होंने आईआईटी की परीक्षा पास की तथा 2019 में आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी से पढ़ाई पूरी करने पर स्टार्टअप की तरफ़ रुझान रखकर एक सफल कंपनी की स्थापना की। बता दें कि सौरभ के पिता सुरेंद्र बुधवार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय देवरड, (जींद) में प्राचार्य हैं और माता अनिता देवी ने शिक्षिका रहकर समाज की सेवा की और अभी एक निजी कंपनी में डायरेक्टर के पद पर काम कर रही हैं।
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पापा ने निष्ठा से जो कार्य किया यह उसी का ही एक दर्पण
सौरभ ने कहा कि जिस शुद्ध अंतःकरण से मेरे पापा विद्यालय में सब बच्चों को अपने बच्चे मान कर निष्ठा से कार्य करते हैं, मेरी सफलता उसका ही एक दर्पण है। मेरे दादा चौधरी चेत सिंह नंबरदार गांव सुनारिया में ही रहते हैं। मेरे ताऊ-ताई, चाचा-चाची, भाई-भाभी, परिवार, संबंधियों और मार्गदर्शकों के आशीर्वाद का फल मुझे मिला है।
परीक्षा की तैयारी के समय स्वास्थ्य ने नहीं दिया साथ
सौरभ ने बताया उन्होनें दो बार प्रीलिम्स क्लियर कर लिया था, लेकिन मुख्य परीक्षा के समय वह बीमार पड़ गए, इस वजह से उन्हें दो बार असफलता का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होनें हार ना मानने का फैसला लिया और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई।
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यूपीएससी में 41वीं रैंक हासिल करने वाले सौरभ ने बताया कि असफलता मिलने के बाद एक बार तो ऐसा लगा था कि शायद उन्होंने गलत निर्णय ले लिया है लेकिन फिर यह सोचकर तैयारी में जुट जाता था कि शायद उनकी तैयारी में ही कोई कमी रह गई होगी। दो बार मिली असफलता ही उनकी प्रेरणा बनी।
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सौरभ का मूल गांव सुनारियां कलां है और वर्तमान में वे रोहतक के वन सिटी सेक्टर 37 में रह रहे हैं। मॉडल स्कूल सेक्टर-4 में पढ़ते हुए उन्होंने आईआईटी की परीक्षा पास की तथा 2019 में आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी से पढ़ाई पूरी करने पर स्टार्टअप की तरफ़ रुझान रखकर एक सफल कंपनी की स्थापना की। बता दें कि सौरभ के पिता सुरेंद्र बुधवार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय देवरड, (जींद) में प्राचार्य हैं और माता अनिता देवी ने शिक्षिका रहकर समाज की सेवा की और अभी एक निजी कंपनी में डायरेक्टर के पद पर काम कर रही हैं।
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पापा ने निष्ठा से जो कार्य किया यह उसी का ही एक दर्पण
सौरभ ने कहा कि जिस शुद्ध अंतःकरण से मेरे पापा विद्यालय में सब बच्चों को अपने बच्चे मान कर निष्ठा से कार्य करते हैं, मेरी सफलता उसका ही एक दर्पण है। मेरे दादा चौधरी चेत सिंह नंबरदार गांव सुनारिया में ही रहते हैं। मेरे ताऊ-ताई, चाचा-चाची, भाई-भाभी, परिवार, संबंधियों और मार्गदर्शकों के आशीर्वाद का फल मुझे मिला है।
परीक्षा की तैयारी के समय स्वास्थ्य ने नहीं दिया साथ
सौरभ ने बताया उन्होनें दो बार प्रीलिम्स क्लियर कर लिया था, लेकिन मुख्य परीक्षा के समय वह बीमार पड़ गए, इस वजह से उन्हें दो बार असफलता का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होनें हार ना मानने का फैसला लिया और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई।