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रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म व कॉलोनी सौर ऊर्जा से होगी जगमग
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विकास शुक्ल
रोहतक। रेल यात्रियों और कॉलोनीवासियों के लिए खुशी की खबर है कि प्लेटफॉर्म से लेकर समूचा परिसर अब सौर ऊर्जा से जगमग होगा। इसके लिए 225 किलोवाट क्षमता की सोलर प्लेटें प्लेटफार्म के टिनशेड पर लग गई हैं और ट्रायल भी शुरू हो गया है। इससे बिजली कटौती की समस्या से भी छुटकारा मिल जाएगा। वहीं रेलवे को रोजाना जहां 30 प्रतिशत बिजली की खरीद नहीं करनी पड़ेगी, वहीं इससे करीब 30 हजार रुपये की बचत होगी।
रेलवे के सेक्शन इंजीनियर पावर सप्लाई महावीर सिंह डांगर ने बताया कि रोहतक रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म और कॉलोनी में प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सोलर ऊर्जा प्लांट लगवाया गया है। दिल्ली की कंपनी मैसेज अज्योर को ठेका दिया गया। दिल्ली, मेरठ और शामली के बाद अब रोहतक रेलवे स्टेशन को भी सौर ऊर्जा से बिजली मिलने का ट्रायल शुरू कर दिया गया है। कंपनी ने प्लेटफार्म के टिन शेड के ऊपर 225 किलोवाट पावर क्षमता की सोलर प्लेटें लगवाई हैं। एक किलोवॉट में चार यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। इस तरह सौर ऊर्जा से यहां करीब नौ सौ यूनिट बिजली का प्रतिदिन उत्पादन होने लगा है। पिछले करीब डेढ़ महीने से इसे ट्रायल बेस पर चालू भी कर दिया गया है। सिर्फ औपचारिक रूप से इसकी शुरुआत होनी बाकी है। फिलहाल सोलर पैनल लगने के पहले रेलवे को निगम से साढ़े सात रुपये प्रति यूनिट की हिसाब से बिजली खरीदनी पड़ रही थी, जबकि सोलर पैनल से इसकी लागत महज चार रुपये 26 पैसे आएगी। इससे करीब सवा तीन रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बचत होगी। सेक्शन इंजीनियर के अनुसार इस तरह प्रतिदिन 28 से 30 हजार रुपये की बचत होगी।
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बिजली कटौती की समस्या से भी मिलेगा छुटकारा
सेक्शन इंजीनियर ने बताया कि निगम से बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की फाल्ट आने पर कटौती की समस्या आती है। इससे अभी तक रेलवे को जेनरेटर चलाना पड़ता था। सोलर सिस्टम लगने से जेनरेटर नहीं चलाना पड़ेगा और बिना ट्रिपिंग प्रकाश मिलता रहेगा। इससे डीजल पर होने वाले खर्चे की भी बचत होगी। वहीं रेलवे कॉलोनी के दो सौ घरों को भी निरंतर पथ प्रकाश मिलने से राहत मिलेगी।
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रेलवे ने देश भर के बड़े स्टेशनों पर सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने का ठेका दिल्ली की कंपनी को दिया है, जिसके तहत यहां सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इससे रेलवे यात्रियों को कर्मचारियों सभी को फायदा मिलेगा। वहीं रेलवे की भी आर्थिक बचत होगी।
-महावीर सिंह डांगर, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, पावर सप्लाई
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रोहतक। रेल यात्रियों और कॉलोनीवासियों के लिए खुशी की खबर है कि प्लेटफॉर्म से लेकर समूचा परिसर अब सौर ऊर्जा से जगमग होगा। इसके लिए 225 किलोवाट क्षमता की सोलर प्लेटें प्लेटफार्म के टिनशेड पर लग गई हैं और ट्रायल भी शुरू हो गया है। इससे बिजली कटौती की समस्या से भी छुटकारा मिल जाएगा। वहीं रेलवे को रोजाना जहां 30 प्रतिशत बिजली की खरीद नहीं करनी पड़ेगी, वहीं इससे करीब 30 हजार रुपये की बचत होगी।
रेलवे के सेक्शन इंजीनियर पावर सप्लाई महावीर सिंह डांगर ने बताया कि रोहतक रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म और कॉलोनी में प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सोलर ऊर्जा प्लांट लगवाया गया है। दिल्ली की कंपनी मैसेज अज्योर को ठेका दिया गया। दिल्ली, मेरठ और शामली के बाद अब रोहतक रेलवे स्टेशन को भी सौर ऊर्जा से बिजली मिलने का ट्रायल शुरू कर दिया गया है। कंपनी ने प्लेटफार्म के टिन शेड के ऊपर 225 किलोवाट पावर क्षमता की सोलर प्लेटें लगवाई हैं। एक किलोवॉट में चार यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। इस तरह सौर ऊर्जा से यहां करीब नौ सौ यूनिट बिजली का प्रतिदिन उत्पादन होने लगा है। पिछले करीब डेढ़ महीने से इसे ट्रायल बेस पर चालू भी कर दिया गया है। सिर्फ औपचारिक रूप से इसकी शुरुआत होनी बाकी है। फिलहाल सोलर पैनल लगने के पहले रेलवे को निगम से साढ़े सात रुपये प्रति यूनिट की हिसाब से बिजली खरीदनी पड़ रही थी, जबकि सोलर पैनल से इसकी लागत महज चार रुपये 26 पैसे आएगी। इससे करीब सवा तीन रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बचत होगी। सेक्शन इंजीनियर के अनुसार इस तरह प्रतिदिन 28 से 30 हजार रुपये की बचत होगी।
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बिजली कटौती की समस्या से भी मिलेगा छुटकारा
सेक्शन इंजीनियर ने बताया कि निगम से बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की फाल्ट आने पर कटौती की समस्या आती है। इससे अभी तक रेलवे को जेनरेटर चलाना पड़ता था। सोलर सिस्टम लगने से जेनरेटर नहीं चलाना पड़ेगा और बिना ट्रिपिंग प्रकाश मिलता रहेगा। इससे डीजल पर होने वाले खर्चे की भी बचत होगी। वहीं रेलवे कॉलोनी के दो सौ घरों को भी निरंतर पथ प्रकाश मिलने से राहत मिलेगी।
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रेलवे ने देश भर के बड़े स्टेशनों पर सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने का ठेका दिल्ली की कंपनी को दिया है, जिसके तहत यहां सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इससे रेलवे यात्रियों को कर्मचारियों सभी को फायदा मिलेगा। वहीं रेलवे की भी आर्थिक बचत होगी।
-महावीर सिंह डांगर, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, पावर सप्लाई