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प्रॉपर्टी टैक्स की रिकवरी बंद होने से निगम की आर्थिक हालत गड़बड़ाई, स्टांप ड्यूटी से मिले रुपयों से दिया जाएगा वेतन
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रोहतक। प्रॉपर्टी टैक्स की रिकवरी बंद होने से निगम की आर्थिक हालत गड़बड़ा गई है। लॉकडाउन के बीच कर्मचारियों के वेतन का इंतजाम सरकार से स्टांप ड्यूटी के तौर पर मिले 4 करोड़ से किया जाएगा। यह राशि निगम के खाते में पहुंच गई है। हालांकि निगम निजी एजेंसी की मासिक भुगतान रोक सकता है।
शहर में निगम की पौने दो लाख के करीब प्रॉपर्टी टैक्स की इकाई हैं। इनमें 50 हजार के करीब एक्टिव इकाई हैं, जो समय पर सालाना प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराती हैं। ऐसी सैकड़ों इकाईयां हैं, जिन्होंने 2011 से अब तक का टैक्स भी जमा नहीं कराया है। यहीं कारण है कि निगम का 28 करोड़ के करीब टैक्स बकाया है। इसमें 15 करोड़ से ज्यादा टैक्स व ब्याज सरकारी विभागों की तरफ है। निगम ने लॉकडाउन से पहले फरवरी व मार्च माह में टैक्स वसूली के लिए पूरा जोर लगाया था। बिल्डिंग सील की जा रही थी। परिणामस्वरूप लोग टैक्स जमा कराने लगे थे। टैक्स की राशि से ही निगम हर माह 9 करोड़ के करीब खर्च का भुगतान करवा पा रहा था, क्योंकि विकास शुल्क लंबे समय से नहीं आया। मार्च के आखिरी सप्ताह में कोरोना वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन लागू कर दिया गया। इस कारण निगम कार्यालय व दूसरी गतिविधियां जनता के लिए बंद कर दी गई।
32 करोड़ बकाया, आखिरी तिमाही के आए 4 करोड़
निगम के मुताबिक उनका सरकार की तरफ स्टांप ड्यूटी का 32 करोड़ रुपये बकाया है। जिसे लेने के लिए लॉकडाउन से पहले भी आयुक्त ने सरकार को पत्र लिखा था। हालंकि सरकार से अब विकट हालात के बीच 2019-20 की आखिरी तिमाही के 4 करोड़ रुपये ही मिले हैं। अब निगम इस राशि से कर्मचारियों को अप्रैल माह का वेतन देगा।
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सैलरी व वेतन ही निकल पाएगा, सफाई एजेंसी को बाद में भुगतान पर विचार
निगम की एक माह से ज्यादा समय से सारी गतिविधियां ठप हैं। प्रॉपर्टी टैक्स वसूली भी बंद पड़ी है। पिछले माह किसी तरह कर्मचारियों की सैलरी व पेंशन जारी हो गई थी। इस माह सरकार से स्टांप ड्यूटी के 4 करोड़ रुपये मिले हैं। उनसे सैलरी व पेंशन दे दी जाएंगी। क्योंकि विकट हालात में कर्मचारी काम कर रहे हैं। समय पर उनको सैलरी देना जरूरी है। दूसरा, निजी सफाई एजेंसी का मासिक भुगतान बाद में करने पर विचार कर रहे हैं।
-प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम
पिछले माह किसी तरह लोन व इधर उधर से राशि का जुगाड़ कर सैलरी व पेंशन जारी की थी। अब स्टांप ड्यूटी की राशि से भुगतान किया जाएगा। वे भी अपने स्तर पर लॉकडाउन से पहले सरकार से बजट की मांग करते रहे हैं।
-मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
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शहर में निगम की पौने दो लाख के करीब प्रॉपर्टी टैक्स की इकाई हैं। इनमें 50 हजार के करीब एक्टिव इकाई हैं, जो समय पर सालाना प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराती हैं। ऐसी सैकड़ों इकाईयां हैं, जिन्होंने 2011 से अब तक का टैक्स भी जमा नहीं कराया है। यहीं कारण है कि निगम का 28 करोड़ के करीब टैक्स बकाया है। इसमें 15 करोड़ से ज्यादा टैक्स व ब्याज सरकारी विभागों की तरफ है। निगम ने लॉकडाउन से पहले फरवरी व मार्च माह में टैक्स वसूली के लिए पूरा जोर लगाया था। बिल्डिंग सील की जा रही थी। परिणामस्वरूप लोग टैक्स जमा कराने लगे थे। टैक्स की राशि से ही निगम हर माह 9 करोड़ के करीब खर्च का भुगतान करवा पा रहा था, क्योंकि विकास शुल्क लंबे समय से नहीं आया। मार्च के आखिरी सप्ताह में कोरोना वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन लागू कर दिया गया। इस कारण निगम कार्यालय व दूसरी गतिविधियां जनता के लिए बंद कर दी गई।
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32 करोड़ बकाया, आखिरी तिमाही के आए 4 करोड़
निगम के मुताबिक उनका सरकार की तरफ स्टांप ड्यूटी का 32 करोड़ रुपये बकाया है। जिसे लेने के लिए लॉकडाउन से पहले भी आयुक्त ने सरकार को पत्र लिखा था। हालंकि सरकार से अब विकट हालात के बीच 2019-20 की आखिरी तिमाही के 4 करोड़ रुपये ही मिले हैं। अब निगम इस राशि से कर्मचारियों को अप्रैल माह का वेतन देगा।
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सैलरी व वेतन ही निकल पाएगा, सफाई एजेंसी को बाद में भुगतान पर विचार
निगम की एक माह से ज्यादा समय से सारी गतिविधियां ठप हैं। प्रॉपर्टी टैक्स वसूली भी बंद पड़ी है। पिछले माह किसी तरह कर्मचारियों की सैलरी व पेंशन जारी हो गई थी। इस माह सरकार से स्टांप ड्यूटी के 4 करोड़ रुपये मिले हैं। उनसे सैलरी व पेंशन दे दी जाएंगी। क्योंकि विकट हालात में कर्मचारी काम कर रहे हैं। समय पर उनको सैलरी देना जरूरी है। दूसरा, निजी सफाई एजेंसी का मासिक भुगतान बाद में करने पर विचार कर रहे हैं।
-प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम
पिछले माह किसी तरह लोन व इधर उधर से राशि का जुगाड़ कर सैलरी व पेंशन जारी की थी। अब स्टांप ड्यूटी की राशि से भुगतान किया जाएगा। वे भी अपने स्तर पर लॉकडाउन से पहले सरकार से बजट की मांग करते रहे हैं।
-मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम