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Rohtak News: निजी बस चालक छत पर बैठा रहे सवारियां, नहीं हो रही कार्रवाई
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01-रोहतक के सोनीपत रोड पर निजी बस की छत पर सवार जाते यात्री। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। निजी बस संचालक यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं पर क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण की ओर से इन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। बसों की छतों पर बैठाकर और दरवाजों पर यात्रियों को लटका कर सफर कराया जा रहा है।
जिले में वाली अधिकतर निजी बसों की छतों पर बैठकर और दरवाजों पर खड़े होकर यात्री सफर करते देखा जा सकते हैं। बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जा रही हैं। सीट नहीं मिलने पर सवारियां छत पर बैठकर या दरवाजे पर लटक कर यात्रा करती हैं। इससे हादसे का डर रहता है।
यात्री साहिल सांगवान का कहना कि है कि सुबह-शाम पीक आवर में हालात सबसे ज्यादा खराब होते हैं। छात्र, मजदूर और नौकरीपेशा लोग मजबूरी में ऐसे सफर करते हैं। पुलिस और आरटीए की टीमें सड़क पर खड़ी रहती हैं लेकिन इन बसों पर कार्रवाई नहीं होती है। यात्रियों ने आरोप लगाया कि आरटीए की मिलीभगत से ही बस संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
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वर्जन
ऐसे बस संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नियमित चेकिंग अभियान चलाकर ओवरलोड वाहनों के चालान किए जाएंगे ताकि आमजन व यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। -विरेंद्र ढुल, सचिव, आरटीए।
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रोहतक। निजी बस संचालक यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं पर क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण की ओर से इन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। बसों की छतों पर बैठाकर और दरवाजों पर यात्रियों को लटका कर सफर कराया जा रहा है।
जिले में वाली अधिकतर निजी बसों की छतों पर बैठकर और दरवाजों पर खड़े होकर यात्री सफर करते देखा जा सकते हैं। बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जा रही हैं। सीट नहीं मिलने पर सवारियां छत पर बैठकर या दरवाजे पर लटक कर यात्रा करती हैं। इससे हादसे का डर रहता है।
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यात्री साहिल सांगवान का कहना कि है कि सुबह-शाम पीक आवर में हालात सबसे ज्यादा खराब होते हैं। छात्र, मजदूर और नौकरीपेशा लोग मजबूरी में ऐसे सफर करते हैं। पुलिस और आरटीए की टीमें सड़क पर खड़ी रहती हैं लेकिन इन बसों पर कार्रवाई नहीं होती है। यात्रियों ने आरोप लगाया कि आरटीए की मिलीभगत से ही बस संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
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ऐसे बस संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नियमित चेकिंग अभियान चलाकर ओवरलोड वाहनों के चालान किए जाएंगे ताकि आमजन व यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। -विरेंद्र ढुल, सचिव, आरटीए।