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पीजी डॉक्टरों की हड़ताल जारी, प्रसूति व आपात सेवाएं शुरू होने से राहत
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पीजीआई की ओपीडी में इलाज के इंतजार में बैठे मरीज। संवाद
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नीट-पीजी की काउंसिलिंग में देरी के चलते फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के समर्थन में पीजीआई के पीजी डॉक्टरों की हड़ताल बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रही। यहां प्रसूति व आपात सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं। इसके चलते प्रसूति विभाग में सन्नाटा छाया रहा। सिविल अस्पताल में शाम तक छह महिलाओं की डिलिवरी हुई। संस्थान के आपात विभाग में मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। बुधवार शाम को डॉक्टरों ने बैठक कर वीरवार से प्रसूति व आपात सेवाएं बहाल करने का फैसला लिया है। इससे मरीजों को कुछ राहत मिलने की आस है।
बुधवार को भी मरीजों को राहत नहीं मिली। पीजीआई में पीजी डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कोई इलाज के लिए इधर-उधर घूमता रहा तो कोई मायूस घर लौटा। कुछ को दवा देकर घर भेज दिया गया। ओपीडी में भी मरीजों की संख्या कम रही। हालांकि यहां इनकी जांच व इलाज के लिए वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे। आपात विभाग में भी मरीजों को दवा देकर घर जाने की सलाह दी गई। स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग में बुधवार सुबह आठ बजे के बाद कोई डिलिवरी केस नहीं आया। इस कारण लेबर रूम में पहले से भर्ती प्रसूताओं की ही डिलिवरी कराई गई। यहां आए केस सिविल अस्पताल भेज दिए गए। यहां शाम तक छह डिलिवरी हुई।
इधर, डॉक्टरों का फोर्डा को समर्थन जारी है। इसके चलते दिनभर काम नहीं किया। नीट-पीजी की काउंसिलिंग की मांग के लिए विरोध प्रकट किया। शाम को बैठक कर आरडीए सदस्यों ने वीरवार से प्रसूति व आपात विभाग में सेवाएं सुचारु करने का फैसला लिया। इससे मरीजों को कुछ राहत मिलने की आस है। सुबह से प्रसूति केस लेने के साथ आपात विभाग में गंभीर मरीजों को इलाज देकर राहत पहुंचाई जाएगी। आरडीए अध्यक्ष डॉ. बलजीत सिंह ने कहा कि एसोसिएशन ने आपात सेवाएं बहाल करने का सर्वसम्मति से फैसला लिया है।
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यह बोले तीमारदार और मरीज
अपनी पुत्रवधू की डिलिवरी के लिए बुधवार सुबह आठ बजे यहां आए थे। उसे सुबह भर्ती कर लिया। दोपहर बाद तक भी उसकी जांच नहीं की गई। अब तक इंतजार में बैठे हैं।
- सीता देवी, जहांगीरपुर
पीजीआई में बुधवार सुबह इलाज के लिए आए थे। सीने में अचानक दर्द उठा था। इस कारण परिवार के लोग यहां ले आए। अब भी दर्द परेशान कर रहा है। भर्ती तक नहीं किया है। दवा देकर डॉक्टर ने घर जाने की सलाह दी है।
राजेंद्र, भाली
पीजीआई में एक सप्ताह पहले पथरी का ऑपरेशन हुआ था। आपरेशन के बाद इंफेक्शन हो गया। इंफेक्शन बढ़ने से जख्म हो गए हैं। यहां आए तो डॉक्टरों की हड़ताल का पता लगा। पट्टी तक नहीं हुई है। अब शुक्रवार को आने के लिए कहा है। अब फिर 1200 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
- सुनील, गोहाना
लंबे समय से गले की बीमारी परेशान कर रही है। पिछले तीन महीने से गले में नली लगी हुई है। इसी से खाना-पानी अंदर जा रहा है। दो दिन से परिजनों के साथ अस्पताल के चक्कर काट रही हूं। हड़ताल के बारे में बताते हुए बाद में आने को कहा गया है। अब इतनी दूर से फिर किराया लगाकर आना पड़ेगा।
- शकुंतला, बालू, कैथल
प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। इसलिए परिजन दोपहर बाद पीजीआई ले गए। यहां किसी ने भर्ती नहीं किया। पूछने पर सामान्य अस्पताल जाने के लिए कहा गया। इसलिए अब अस्पताल आए हैं। पीजीआई में अन्य प्रसूताओं को भी वापस भेजा गया।
- पूजा, रोहतक
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बुधवार को भी मरीजों को राहत नहीं मिली। पीजीआई में पीजी डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कोई इलाज के लिए इधर-उधर घूमता रहा तो कोई मायूस घर लौटा। कुछ को दवा देकर घर भेज दिया गया। ओपीडी में भी मरीजों की संख्या कम रही। हालांकि यहां इनकी जांच व इलाज के लिए वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे। आपात विभाग में भी मरीजों को दवा देकर घर जाने की सलाह दी गई। स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग में बुधवार सुबह आठ बजे के बाद कोई डिलिवरी केस नहीं आया। इस कारण लेबर रूम में पहले से भर्ती प्रसूताओं की ही डिलिवरी कराई गई। यहां आए केस सिविल अस्पताल भेज दिए गए। यहां शाम तक छह डिलिवरी हुई।
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इधर, डॉक्टरों का फोर्डा को समर्थन जारी है। इसके चलते दिनभर काम नहीं किया। नीट-पीजी की काउंसिलिंग की मांग के लिए विरोध प्रकट किया। शाम को बैठक कर आरडीए सदस्यों ने वीरवार से प्रसूति व आपात विभाग में सेवाएं सुचारु करने का फैसला लिया। इससे मरीजों को कुछ राहत मिलने की आस है। सुबह से प्रसूति केस लेने के साथ आपात विभाग में गंभीर मरीजों को इलाज देकर राहत पहुंचाई जाएगी। आरडीए अध्यक्ष डॉ. बलजीत सिंह ने कहा कि एसोसिएशन ने आपात सेवाएं बहाल करने का सर्वसम्मति से फैसला लिया है।
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यह बोले तीमारदार और मरीज
अपनी पुत्रवधू की डिलिवरी के लिए बुधवार सुबह आठ बजे यहां आए थे। उसे सुबह भर्ती कर लिया। दोपहर बाद तक भी उसकी जांच नहीं की गई। अब तक इंतजार में बैठे हैं।
- सीता देवी, जहांगीरपुर
पीजीआई में बुधवार सुबह इलाज के लिए आए थे। सीने में अचानक दर्द उठा था। इस कारण परिवार के लोग यहां ले आए। अब भी दर्द परेशान कर रहा है। भर्ती तक नहीं किया है। दवा देकर डॉक्टर ने घर जाने की सलाह दी है।
राजेंद्र, भाली
पीजीआई में एक सप्ताह पहले पथरी का ऑपरेशन हुआ था। आपरेशन के बाद इंफेक्शन हो गया। इंफेक्शन बढ़ने से जख्म हो गए हैं। यहां आए तो डॉक्टरों की हड़ताल का पता लगा। पट्टी तक नहीं हुई है। अब शुक्रवार को आने के लिए कहा है। अब फिर 1200 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
- सुनील, गोहाना
लंबे समय से गले की बीमारी परेशान कर रही है। पिछले तीन महीने से गले में नली लगी हुई है। इसी से खाना-पानी अंदर जा रहा है। दो दिन से परिजनों के साथ अस्पताल के चक्कर काट रही हूं। हड़ताल के बारे में बताते हुए बाद में आने को कहा गया है। अब इतनी दूर से फिर किराया लगाकर आना पड़ेगा।
- शकुंतला, बालू, कैथल
प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। इसलिए परिजन दोपहर बाद पीजीआई ले गए। यहां किसी ने भर्ती नहीं किया। पूछने पर सामान्य अस्पताल जाने के लिए कहा गया। इसलिए अब अस्पताल आए हैं। पीजीआई में अन्य प्रसूताओं को भी वापस भेजा गया।
- पूजा, रोहतक