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Rohtak News: 10 घंटे के ऑपरेशन में टाइटेनियम की कृत्रिम पसलियों में मरीज का दिल किया सुरक्षित

Fri, 26 Jan 2024 02:58 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jan 2024 02:58 AM IST
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Patient's heart saved with titanium artificial ribs in 10-hour operation
रोहतक। पीजीआईएमएस के चिकित्सकों ने एक बार फिर मौत के मुंह से मरीज को खींच निकाला है। चिकित्सकों की टीम ने 10 घंटे ऑपरेशन कर टूटी हुई पसलियों की जगह टाइटेनियम निर्मित कृत्रिम पसलियां लगाकर उसमें मरीज का दिल सुरक्षित किया। अब मरीज की हालत में सुधार बताया गया है। उसे नया जीवनदान देकर दिखा दिया कि क्यों समाज में चिकित्सक को भगवान का दर्जा दिया जाता है। पीजीआईएमएस में मरीज को नया जीवनदान देने का काम कार्डियक सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों की टीम ने कार्डियक एनेस्थीसिया और हड्डी रोग विभाग की टीम के साथ मिलकर किया है। पीजीआई निदेशक एवं कार्डियक सर्जन डाॅ. एसएस लोहचब ने बताया कि संस्थान में अज्ञात व्यक्ति पानीपत से लाया गया था। गंभीर ट्रेन दुर्घटना का शिकार यह व्यक्ति ट्रामा सेंटर पहुंचा। पुलिस इसे अत्यधिक गंभीर हालत में लेकर आई थी। जांच में उसका सीना सीधा फटा हुआ पाया गया।
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बाईं ओर से पसलियां पूरी तरह से टूटी मिलीं। उसका फेफड़ा और दिल बाहर निकले हुए थे। आघात सीने और पेट के ऊपर की त्वचा के खराब होने तक बढ़ गया, साथ ही मस्तिष्क में हेमेटोमा भी हो गया। ऐसे में चिकित्सकों ने मरीज के बचने की संभावना न के बराबर देखते हुए भी तुरंत उसे कार्डियक सर्जरी विभाग रेफर किया। यहां कार्डियक सर्जन ने अपने साथ कार्डियक एनेस्थीसिया से डाॅ. गीता, ऑर्थो सर्जन डॉ. राज सिंह, प्लास्टिक सर्जन डॉ. अभिषेक को टीम में शामिल कर मरीज का ऑपरेशन शुरू किया।
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निदेशक ने बताया कि मरीज की हालत ज्यादा खराब थी। ऐसे में ज्यादा सटीकता के साथ ऑपरेशन किया गया। ऐसा नहीं होने पर मरीज की जान जा सकती थी। ऑपरेशन करीब 10 घंटे चला। पूरी टीम हाई अलर्ट पर रही। ऑपरेशन में व्यापक चोटों के कारण टाइटेनियम की कृत्रिम पसलियों का उपयोग कर बाईं ओर की पसली के पुनर्निर्माण की आवश्यकता पड़ी। मरीज का ऑपरेशन सफल रहा। यह उपलब्धि सरकार व स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति डाॅ. अनीता सक्सेना की ओर से अस्पताल में उपलब्ध कराए गए संसाधनों से संभव हुई।
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अपनी तरह का पीजीआईएमएस में पहला केस
निदेशक ने बताया कि प्रारंभ में बेहोश अवस्था में होने के चलते मरीज अज्ञात था। उसे सोमवार रात को होश आया तो उसने अपना नाम और पता बताया। इससे कार्डियक सर्जरी आईसीयू में मेडिकल स्टाफ में खुशी की लहर दौड़ गई। मरीज के परिजनों को सूचित किया गया। रोगी गंभीर हालत से बाहर आ गया है। संक्रमण की रोकथाम और घावों के शीघ्र उपचार के लिए निरंतर देखभाल की जा रही है। यह अपनी तरह का पीजीआईएमएस में पहला केस था। कुलपति ने अटूट समर्पण के साथ कार्य करने वाली टीम को सराहा।
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