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रोहतक बस स्टैंड पर एक नंबर की दो निजी बसें चलती पकड़ी

Sat, 21 Dec 2019 12:54 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 21 Dec 2019 12:54 AM IST
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One number Two private buses caught moving at Rohtak bus stand
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रोहतक। भले ही आरटीए (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) सचिव सड़क पर दौड़ने वाले अवैध वाहनों की सघन चेकिंग का दावा करते हैं, मगर धरातल पर हकीकत की तस्वीर कुछ और ही दिखती है। बेधड़क दौड़ने वाले वाहन संचालक सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने से बाज नहीं आ रहे। रोडवेज की टीम ने शुक्रवार को एक नंबर की दो निजी बसें पकड़ी हैं, जो सिर्फ एक बानगी है। डिपो महाप्रबंधक ने दोनों बसों के फोटो के साथ आरटीए सचिव को मेल व पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, आरटीए सचिव इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।
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रोडवेज के कर्मचारी नेताओं ने पिछले दिनों महाप्रबंधक को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए ज्ञापन सौंपा था। जिसमें बस स्टैंड से बिना परमिट चलने वाली बसों पर अंकुश लगाने की मांग की गई। कर्मचारी नेताओं का आरोप था कि इन बसों से रोडवेज का लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। इस पर महाप्रबंधक ने प्राइवेट बसों की चेकिंग के लिए न सिर्फ टीम गठित की बल्कि प्रवेश द्वार पर बैरियर लगवा दिया। बैरियर पर तैनात कर्मियों को हिदायत दी गई है कि आरटीए सचिव से तय समय से पहले किसी भी प्राइवेट बस को स्टैंड में प्रवेश नहीं करने दिया जाए।
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शुक्रवार को रोडवेज ट्रैफिक विभाग के इंस्पेक्टर साधुराम अधीनस्थों के साथ स्टैंड पर प्राइवेट बसों को चेक कर रहे थे। तभी प्राइवेट बस एचआर-46ई- 4668 खड़ी मिली। जानकारी से पता चला कि इसका परमिट महम से होकर हिसार जिले के बास तक के लिए हैं। वह चेकिंग करते हुए बस स्टैंड के बाहर आए तो अस्थायी पार्किंग में पहुंचकर चकित रह गए, क्योंकि वहां भी एचआर-46ई-4668 नंबर की बस खड़ी थी। इस पर उन्होंने तुरंत बस की न सिर्फ फोटो खींची, बल्कि वीडियोग्राफी की। इसके बाद स्टैंड पर खड़ी बस की फोटो व वीडियोग्राफी की। इंस्पेक्टर साधुराम ने तुरंत महाप्रबंधक जोगेंदर रावल को फोटो दिखाकर पूरे मामले की जानकारी दी। महाप्रबंधक ने मामले की गंभीरता को देख आरटीए अफसरों को न सिर्फ फोन पर तत्काल सूचित किया बल्कि फोटो के साथ मेल व पत्र लिखकर कार्रवाई करने की संस्तुति की।
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वहीं, बस को नहीं पकड़ने अथवा कब्जे में लेने के मामले में महाप्रबंधक ने कहा कि वे स्टैंड पर खड़ी बस को वैध परमिट की मानते हैं, जो बस बाहर खड़ी थी उसको कब्जे में लेने का उनके पास कोई अधिकार नहीं है। हां, यदि वह बस स्टैंड के अंदर होती तो जरूर कब्जे में ले सकते थे। महाप्रबंधक जोगेंदर रावल का कहना है कि सचिव क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण को दोनों बसों की फोटो के साथ कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। वहीं, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण सचिव अजय कुमार से बात करने का प्रयास किया, मगर बात नहीं हो सकी।
दोनों बसों की पहचान भी लिखी जीएम ने
महाप्रबंधक ने पत्र में लिखा कि एक बस पर बाबरा नरवाल गांव रिंढाना जिला सोनीपत और दूसरी बस पर अत्री बस सर्विस मोनू मलिक व आनंद खत्री अंकित है, यह काफी गंभीर मामला है। आरटीए सचिव से कहा कि समिति की बसें उनके अधिकार क्षेत्र में हैं। इसलिए सख्त कार्रवाई कर उन्हें भी अवगत करवाए।
बिना परमिट की दौड़ रही बसें, पर कार्रवाई नहीं
आरटीए अफसरों और कर्मियों का अहम काम अवैध वाहनों के संचालन पर अंकुश लगाना है ताकि सरकार को आर्थिक नुकसान न हो। पिछले दिनों रोडवेज के कर्मचारी नेताओं ने प्रमुखता से आवाज उठाई थी कि बस स्टैंड से बिना परमिट की बसें संचालित हो रही हैं, फिर भी अवैध बस संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। इतना ही नहीं, पिछले दिनों जब रोडवेज महाप्रबंधक ने अपनी टीम को लगाया तब पता चला कि जिन बसों का परमिट पिल्लूखेड़ा तक बना है, वह जींद तक बेधड़क दौड़ रही हैं।
छात्राओं व बुजुर्गों को भी उतारा जा चुका है बसों से
सरकार की तरफ से जो सुविधाएं छात्राओं और बुजुर्गों को दी जाती हैं, वहीं सुविधाएं प्राइवेट बसों में भी मिलती हैं। प्रदेश सरकार के स्पष्ट आदेश है कि छात्राएं फ्री में प्राइवेट बस में सफर करेंगी और बुजुर्ग को आधा टिकट बनवाना होगा। कई बार रोडवेज के अधिकारियों को शिकायतें मिलती रही हैं कि छात्राओं व बुजुर्गों को निजी बस चालक नीचे उतार देते हैं। रोडवेज के अधिकारियों का कहना है कि वे सभी शिकायतों से आरटीए सचिव को अवगत करा चुके हैं।
कहां हैं मेल आईडी, कहां अंकित करवाई?
पिछले दिनों छात्राओं और बुजुर्गों को अपमानित करके बस से उतारने का मामला तेजी से उछला तो आरटीए के अफसरों ने बड़े-बड़े दावे करते हुए कहा था कि उन्होंने मेल आईडी बनवाई है, जिस पर आने वाली शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद कहा कि मेल आईडी को बस स्टैंड आदि स्थानों पर लिखवाया जाएगा ताकि लोगों को इसके बारे में जानकारी हो। मगर अफसोस की बता है कि अभी तक मेल आईडी कहीं लिखी नजर नहीं आ रही है।

इन सवालों का जवाब चाहते हैं आरटीए सचिव से
एक नंबर की दो बसें मिलने के मामले में सचिव आरटीए अजय कुमार को फोन मिलाया गया मगर बात नहीं हो सकी। इसके बाद व्हाट्सएप पर मैसेज भी किया गया, मगर बात नहीं बनी। उनसे कई बिंदुओं पर बात करनी थी, जिनके जवाब जनता जानना चाहती है।
- रोडवेज कर्मियों के आवाज उठाने पर भी चेकिंग क्यों नहीं हुई। यदि हुई तो कितनी बसें बिना परमिट की चलती मिली।
- कैसे एक नंबर की दो बसें संचालित हो रही है। जब रोडवेज की टीम पकड़ सकती है तो आरटीए टीम ने क्यों नहीं पकड़ा।
- छात्राओं और बुजुर्गों की शिकायत सुनने के लिए मेल आईडी बनाने का दावा किया था, वह क्यों नहीं लिखवाई गई है।
- रोडवेज महाप्रबंधक ने जिन शिकायती पत्रों को भेजा था, उनमें से कितने बस संचालकों पर कार्रवाई की गई।
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