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Rohtak News: हरतालिका तीज 6 को, विशेष रूप से विवाहित महिलाएं रखती हैं व्रत

Tue, 03 Sep 2024 11:47 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2024 11:47 PM IST
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On Hartalika Teej 6, especially married women observe fast
रोहतक। हरतालिका तीज इस बार 6 सितंबर को मनाई जाएगी। यह त्योहार विशेष रूप से विवाहित महिलाएं मनाती हैं। यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत अन्य व्रत से कठिन होता है। इस व्रत को निर्जला रखा जाता है। महिलाएं सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं।
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गुफा वाले मंदिर के पंडित ओमप्रकाश ने बताया कि इस दिन महिलाएं माता पार्वती के पार्थिव रूप की पूजा करती हैं। पूजा के दौरान पांच प्रकार के फल, 16 प्रकार के शृंगार का सामान अर्पित किया जाता है। अविवाहित युवतियां भी सर्वगुण संपन्न पति की इच्छा रख यह व्रत रखती हैं। अविवाहितों के लिए व्रत के नियम अलग हैं। वे व्रत के दौरान फल का सहारा ले सकती हैं। साथ ही जल भी ग्रहण कर सकती हैं। इस बार तीज पर तीन योग बन रहे हैं। एक रवि योग, दूसरा शुक्ल योग और तीसरा ब्रह्म योग बन रहा है। इस व्रत को दो दिन शेष हैं ऐसे में महिलाएं बाजारों में चूड़ी, शृंगार के आदि सामान की खरीदारी करने पहुंच रही हैं। इससे बाजारों में रौनक है।
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व्रत के नियम


-विवाहित और अविवाहित कन्याओं के लिए समान हैं नियम
-सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
-व्रत के नियमों को पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ करना चाहिए।
-व्रत के दौरान कम से कम बात करना चाहिए।
- व्रत के दौरान किसी का भी उपहास नहीं उड़ाना चाहिए।
-व्रत फलित करने के लिए मन में सात्विक विचार होना आवश्यक है।
-व्रत के दिन दौरान भोजन या पानी का सेवन नहीं करना चाहिए।
-अविवाहित फलाहार और जल के साथ व्रत कर सकती हैं।
-भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करनी चाहिए।
-भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र रखें।
- प्रतिमा के समक्ष फल, फूल और मिठाई आदि अर्पित करें।
-व्रत की पूजा शाम को की जाती है।
-विवाहित महिलाओं को पारंपरिक वस्त्रों के साथ सोलह शृंगार करना चाहिए।
-व्रत की अगली सुबह भोलेनाथ और मां पार्वती की पूजा करने के बाद ही पारण करना चाहिए।

शुभ मुहूर्त

हरितालिका तीज 6 सितंबर दोपहर 3:22 बजे शुरू होगी। रवि योग 6 सितंबर को सुबह 9:25 बजे से आरंभ होगा। इसके बाद शुक्ल योग सुबह से लेकर सुबह 10:15 बजे तक है। तत्पश्चात ब्रह्म योग शुरू होगा। साथ ही पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजे से सुबह 8:30 बजे तक रहेगा। यह अवधि करीब 2:30 घंटे की रहेगी।
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