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नगर निगम प्रशासन अज्ञात शवों के दाह संस्कार का नहीं कर रहा भुगतान
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रोहतक। रामबाग श्मशाम भूमि के प्रवेश द्वार पर बना मंदिर।
- फोटो : RohtakCity
रोहतक। शहर के शीला बाईपास स्थित रामबाग श्मशान भूमि में पहुंचने वाले शवों का अंतिम संस्कार रुक सकता है। यदि समय रहते रामबाग सेवा समिति को आर्थिक मदद नहीं मिली तो लकड़ियों का संकट गहरा सकता है। इस संकट की वजह नगर निगम प्रशासन की ओर से लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का लंबे समय से भुगतान नहीं करना है। समिति का निगम की ओर करीब नौ लाख रुपये बकाया होने का दावा किया जा रहा है। वहीं इस बारे में निगम आयुक्त कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं।
हर माह आते हैं औसतन 15-20 शव
रामबाग श्मशान भूमि में हर महीने औसतन 15 से 20 अज्ञात शव आते हैं। इन अज्ञात शवों का नगर निगम प्रशासन की ओर से अंतिम संस्कार कराया जाता है। निगम प्रत्येक शव के संस्कार के लिए 2610 रुपये देता है। यह राशि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद से जारी नहीं हुई है। इस कारण लकड़ी व अन्य चीजों की व्यवस्था करना समिति के लिए मुश्किल होता जा रहा है।
महेंद्रगढ़ से आती हैं लकड़ियां
रामबाग श्मशान भूमि में शवों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां महेंद्रगढ़ जिले से आती हैं। अरावली पर्वत शृंखला के जंगलों से काटी गई लकड़ी यहां भेजी जाती है। प्रशासन से मंजूरी के बाद आरा मशीन संचालकों के जरिये इसकी खरीद की जाती है।
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पहले हरियाणा अब रोहतक जोन के आते हैं शव
रामबाग श्मशान भूमि में पहले प्रदेश के विभिन्न जिलों में मिलने वाले अज्ञात शवों को लाया जाता था। इसकी वजह पीजीआईएमएस में इनका पोस्टमार्टम कराना व बाद में यहीं शव का अंतिम संस्कार कराना था। अब नए मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां केवल रोहतक जोन के जिलों के ही शव आते हैं। इसलिए पहले के मुकाबले अज्ञात शवों का आंकड़ा भी कम हो गया है।
इस बारे में जब कमिश्नर प्रदीप गोदारा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस बारे में बाद में बाद करता हूं। फिर उनका कोई जवाब नहीं आया। व्हाट्सएप पर पक्ष मांगा गया तो उसका भी जवाब नहीं आया।
समिति रामबाग श्मशान भूमि में आने वाले अज्ञात शवों का नगर निगम की ओर से अंतिम संस्कार करवाती है। इसका खर्च 2610 रुपये बनता है। पिछले विधानसभा चुनाव के चलते लागू हुई आचार संहिता के बाद से इन शवों के संस्कार की राशि नहीं मिली है। इस बारे में निगम को बिल देने के साथ कई बार अधिकारियों से मुलाकात भी की जा चुकी है। निगम ने कुल बकाया नौ लाख रुपये में से दो लाख रुपये दो दिन पहले ही मुहैया कराए हैं। इससे दो महीने की लकड़ियों का स्टॉक मंगवाया जाएगा। लकड़ियों की खरीद की मंजूरी ले ली गई है।
सुरेंद्र बतरा, उपप्रधान, रामबाग सेवा समिति।
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हर माह आते हैं औसतन 15-20 शव
रामबाग श्मशान भूमि में हर महीने औसतन 15 से 20 अज्ञात शव आते हैं। इन अज्ञात शवों का नगर निगम प्रशासन की ओर से अंतिम संस्कार कराया जाता है। निगम प्रत्येक शव के संस्कार के लिए 2610 रुपये देता है। यह राशि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद से जारी नहीं हुई है। इस कारण लकड़ी व अन्य चीजों की व्यवस्था करना समिति के लिए मुश्किल होता जा रहा है।
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महेंद्रगढ़ से आती हैं लकड़ियां
रामबाग श्मशान भूमि में शवों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां महेंद्रगढ़ जिले से आती हैं। अरावली पर्वत शृंखला के जंगलों से काटी गई लकड़ी यहां भेजी जाती है। प्रशासन से मंजूरी के बाद आरा मशीन संचालकों के जरिये इसकी खरीद की जाती है।
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पहले हरियाणा अब रोहतक जोन के आते हैं शव
रामबाग श्मशान भूमि में पहले प्रदेश के विभिन्न जिलों में मिलने वाले अज्ञात शवों को लाया जाता था। इसकी वजह पीजीआईएमएस में इनका पोस्टमार्टम कराना व बाद में यहीं शव का अंतिम संस्कार कराना था। अब नए मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां केवल रोहतक जोन के जिलों के ही शव आते हैं। इसलिए पहले के मुकाबले अज्ञात शवों का आंकड़ा भी कम हो गया है।
इस बारे में जब कमिश्नर प्रदीप गोदारा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस बारे में बाद में बाद करता हूं। फिर उनका कोई जवाब नहीं आया। व्हाट्सएप पर पक्ष मांगा गया तो उसका भी जवाब नहीं आया।
समिति रामबाग श्मशान भूमि में आने वाले अज्ञात शवों का नगर निगम की ओर से अंतिम संस्कार करवाती है। इसका खर्च 2610 रुपये बनता है। पिछले विधानसभा चुनाव के चलते लागू हुई आचार संहिता के बाद से इन शवों के संस्कार की राशि नहीं मिली है। इस बारे में निगम को बिल देने के साथ कई बार अधिकारियों से मुलाकात भी की जा चुकी है। निगम ने कुल बकाया नौ लाख रुपये में से दो लाख रुपये दो दिन पहले ही मुहैया कराए हैं। इससे दो महीने की लकड़ियों का स्टॉक मंगवाया जाएगा। लकड़ियों की खरीद की मंजूरी ले ली गई है।
सुरेंद्र बतरा, उपप्रधान, रामबाग सेवा समिति।