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Rohtak News: बलिदानियों की नारियों को आज भी लगानी पड़ती है लाइन, सम्मान सिर्फ कार्यक्रमों तक सीमित

Sat, 12 Sep 2026 02:46 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 02:46 AM IST
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The wives of martyrs still have to stand in queues; the honor accorded to them is limited merely to ceremonial events.

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रोहित राठौर
रोहतक। देश की रक्षा के लिए अपने सुहाग को कुर्बान करने वाली वीर नारियों के लिए सरकारी कार्यालयों में आज भी कोई विशेष प्रावधान नहीं है। मंचों से शहीदों के सम्मान में बड़े-बड़े दावे होते हैं लेकिन हकीकत यह है कि शहीद की पत्नी को अपने ही हक के छोटे से काम के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है।
कारगिल युद्ध को 25 साल से ज्यादा हो गए लेकिन वीर नारियों की प्रतीक्षा आज भी खत्म नहीं हुई। वीर नारियों ने का कहना है कि दफ्तरों में सैनिक परिवारों के लिए न तो अलग काउंटर है न कोई हेल्प डेस्क और यहां तक हेल्पलाइन या टोल फ्री नंबर भी मुहैया नहीं कराया गया है। महिलाओं ने हर विभाग, अस्पताल और कार्यालय में सैनिक परिवारों के लिए अलग लाइन, विशेष हेल्प डेस्क, टोल फ्री हेल्पलाइन और एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग की है।
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फोटो : 01
एक बार ही वीर नारी को किसी कार्यक्रम या विशेष दिवस पर याद किया जाता है। अन्य दिनों में कार्यालयों व किसी अस्पताल में पहुंचकर कोई काम नहीं होता है। न ही कोई विशेष काउंटर बनाए गए हैं न ही कोई सुनने वाला होता है। सैनिक के शहीदी के बाद परिवार को केंद्र सरकार से नौकरी देने वायदा किया जाता है लेकिन कागजों में ही रह जाता है।
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- सुमन राणा, वीर नारी, शहीद हवलदार सतीश कुमार
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फोटो : 02
कैंटीन में तो कार्ड को अलग कर दिया है लेकिन मेडिकल व कार्यालयों में अलग से लाइन की आज भी जद्दोजहद जारी है। हम लोगों को तब सम्मान मिलेगा जब हमारी समस्याओं का हल निकाला जाए। वादे करने से सम्मान मुनासिब नहीं होता है।
- सुनीता, वीर नारी, कारगिल शहीद जसबीर सिंह।
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फोटो : 03
शहीद रामधारी के सम्मान में बनाए स्टेडियम के लिए भी दो साल चक्कर काटने पड़े। जिला प्रशासन की ओर काम में ढील व जिम्मेदारी न लेने के करण काम में देरी हुई। वीर नारियों के एक नोडल अधिकारी भी होना चाहिए ताकि किसी प्रकार की समस्या को सुनकर समाधान किया जा सके।

- सोना देवी, वीर नारी, शहीद लांस नायक रामधारी अत्री।
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स्वतंत्रता, वीर चक्र विजेता व वीर नारियों आदि के लिए सभी विभागों में अलग से लाइन होनी चाहिए। अक्सर कार्यालयों में वीर नारियों को परेशानी उठानी पड़ती है। अस्पतालों व विभागीय कार्यालयों में अपने काम के लिए लंबी लाइन में खड़ा होकर इंतजार करना पड़ता है।
- उर्मिला, पुत्र वधु, वीर चक्र विजेता कैप्टन प्रहलाद सिंह।
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