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Rohtak News: जमीन अधिग्रहण के 17 साल बाद भी ग्रामीणों को नहीं मिला प्लॉट
Fri, 03 Feb 2023 09:46 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 03 Feb 2023 09:46 AM IST
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हुडा कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करते ग्रामीण। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। कांग्रेस सरकार के शासन में 2005 में अधिगृहीत की गई जमीन के बदले 5 गांवों के लोगों को ऑस्टीज कोटे के तहत सेक्टर-27 में प्लॉट मिलने थे, लेकिन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने आज तक उनको प्लॉट नहीं दिया। प्लॉट नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने हुडा के कार्यालय के बाहर विरोध प्रकट किया। साथ ही संपदा अधिकारी धीरेंद्र को ज्ञापन सौंपते हुए प्लॉट देने की मांग की।
ग्रामीणों ने बताया कि सेक्टर 27 के लिए 2005 में पांच गांव खेड़ी साध, गढ़ी बोहर, माजरा, पहरावर, बोहर की 400 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। उस जमीन को महंगे दाम पर सनसिटी के बिल्डर को बेच दिया गया। जबकि कानूनन सरकारी कार्य के लिए खरीदी गई जमीन को बेचा नहीं जा सकता है। इसके खिलाफ ग्रामीणों ने 2010 में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तो उन्हें इंसाफ मिला। इसके बाद सरकार ने मुआवजा देने व सेक्टर-27 में प्लॉट देने के लिए ओस्टीज कोटा बनाया था। न्यायालय के निर्णय के खिलाफ निजी बिल्डर ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की, जहां भी ग्रामीण केस जीत गए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि जमीन किसानों को वापस लौटाई जाए या उन्हें मुआवजा व ओस्टीज कोटे में प्लॉट दिया जाय। सरकार ने उन्हें मुआवजा तो देने शुरू कर दिया, मगर ओस्टीज कोटे के तहत प्लॉट अभी तक नहीं दिए। जबकि विभाग की तरफ से बोली करवाकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। वह ग्रामीणों को प्लॉट देने में आनाकानी कर रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर 20 दिन के अंदर उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन करने पर विवश होंगे।
आरटीआई लगाई, सीएम विंडो पर शिकायत की, लेकिन जवाब नहीं मिला
ग्रामीणों ने बताया कि सेक्टर-27 में ओस्टीज कोटे के तहत प्लॉट नहीं मिलने के कारण उन्होंने सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए जानकारी मांगी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद सीएम विंडो पर भी शिकायत की, लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी। ग्रामीणों की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिसके कारण प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
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कई शिकायत की पर नहीं मिला समाधान
सरकार ने गांव खेड़ी साध में 20 एकड़ जमीन खरीदी थी, जिसे एक बिल्डर को बेच दिया। कानूनी लड़ाई लड़कर बिल्डर के चंगुल से जमीन को छुड़वा ली, लेकिन सरकार ने उस पर सेक्टर-27 विकसित कर दिया। उन्हें ओस्टीज कोटे में प्लॉट और मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। मुआवजा तो मिलने शुरू हो गया, लेकिन प्लॉट अभी तक नहीं मिला है। कई बार अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। -इंद्र सिंह, निवासी, खेड़ी साध
मुआवजा भी कोर्ट के आदेश पर मिलने शुरू हुआ
2005 में कांग्रेस सरकार ने आठ एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था, जो अब सेक्टर-27 में शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार ग्रामीणों को ओस्टीज कोटे में अधिग्रहण हुई जमीन के हिसाब से प्लॉट मिलने थे, लेकिन आज तक उन्हें प्लॉट नहीं मिला है। मुआवजा भी उन्हें कोर्ट का निर्णय आने के बाद मिलना शुरू हुआ है। -हुक्म सिंह, निवासी गांव गढ़ी बोहर
प्लॉट देने में आनाकानी कर रहा हुडा
कांग्रेस सरकार ने 6 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन उसे एक बिल्डर को बेच दिया था। जबकि कानून के तहत सरकारी कार्य के लिए खरीदी गई जमीन को बेच नहीं सकते। उन्होंने न्यायालय का सहारा लिया और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके हक में निर्णय लिया। इसके बाद मुआवजा तो मिलना शुरू हो गया, लेकिन प्लॉट देने में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण आनाकानी कर रहा है। -रजनीश, निवासी गांव माजरा
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रोहतक। कांग्रेस सरकार के शासन में 2005 में अधिगृहीत की गई जमीन के बदले 5 गांवों के लोगों को ऑस्टीज कोटे के तहत सेक्टर-27 में प्लॉट मिलने थे, लेकिन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने आज तक उनको प्लॉट नहीं दिया। प्लॉट नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने हुडा के कार्यालय के बाहर विरोध प्रकट किया। साथ ही संपदा अधिकारी धीरेंद्र को ज्ञापन सौंपते हुए प्लॉट देने की मांग की।
ग्रामीणों ने बताया कि सेक्टर 27 के लिए 2005 में पांच गांव खेड़ी साध, गढ़ी बोहर, माजरा, पहरावर, बोहर की 400 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। उस जमीन को महंगे दाम पर सनसिटी के बिल्डर को बेच दिया गया। जबकि कानूनन सरकारी कार्य के लिए खरीदी गई जमीन को बेचा नहीं जा सकता है। इसके खिलाफ ग्रामीणों ने 2010 में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तो उन्हें इंसाफ मिला। इसके बाद सरकार ने मुआवजा देने व सेक्टर-27 में प्लॉट देने के लिए ओस्टीज कोटा बनाया था। न्यायालय के निर्णय के खिलाफ निजी बिल्डर ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की, जहां भी ग्रामीण केस जीत गए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि जमीन किसानों को वापस लौटाई जाए या उन्हें मुआवजा व ओस्टीज कोटे में प्लॉट दिया जाय। सरकार ने उन्हें मुआवजा तो देने शुरू कर दिया, मगर ओस्टीज कोटे के तहत प्लॉट अभी तक नहीं दिए। जबकि विभाग की तरफ से बोली करवाकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। वह ग्रामीणों को प्लॉट देने में आनाकानी कर रहा है।
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ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर 20 दिन के अंदर उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन करने पर विवश होंगे।
आरटीआई लगाई, सीएम विंडो पर शिकायत की, लेकिन जवाब नहीं मिला
ग्रामीणों ने बताया कि सेक्टर-27 में ओस्टीज कोटे के तहत प्लॉट नहीं मिलने के कारण उन्होंने सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए जानकारी मांगी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद सीएम विंडो पर भी शिकायत की, लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी। ग्रामीणों की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिसके कारण प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
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कई शिकायत की पर नहीं मिला समाधान
सरकार ने गांव खेड़ी साध में 20 एकड़ जमीन खरीदी थी, जिसे एक बिल्डर को बेच दिया। कानूनी लड़ाई लड़कर बिल्डर के चंगुल से जमीन को छुड़वा ली, लेकिन सरकार ने उस पर सेक्टर-27 विकसित कर दिया। उन्हें ओस्टीज कोटे में प्लॉट और मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। मुआवजा तो मिलने शुरू हो गया, लेकिन प्लॉट अभी तक नहीं मिला है। कई बार अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। -इंद्र सिंह, निवासी, खेड़ी साध
मुआवजा भी कोर्ट के आदेश पर मिलने शुरू हुआ
2005 में कांग्रेस सरकार ने आठ एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था, जो अब सेक्टर-27 में शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार ग्रामीणों को ओस्टीज कोटे में अधिग्रहण हुई जमीन के हिसाब से प्लॉट मिलने थे, लेकिन आज तक उन्हें प्लॉट नहीं मिला है। मुआवजा भी उन्हें कोर्ट का निर्णय आने के बाद मिलना शुरू हुआ है। -हुक्म सिंह, निवासी गांव गढ़ी बोहर
प्लॉट देने में आनाकानी कर रहा हुडा
कांग्रेस सरकार ने 6 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन उसे एक बिल्डर को बेच दिया था। जबकि कानून के तहत सरकारी कार्य के लिए खरीदी गई जमीन को बेच नहीं सकते। उन्होंने न्यायालय का सहारा लिया और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके हक में निर्णय लिया। इसके बाद मुआवजा तो मिलना शुरू हो गया, लेकिन प्लॉट देने में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण आनाकानी कर रहा है। -रजनीश, निवासी गांव माजरा