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एमडीयू ः पीएचडी स्कॉलर को सुरक्षा कर्मियों ने पीटा, जातिसूचक शब्द कहने का भी लगाया आरोप
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रोहतक। एमडीयू के गेट नंबर तीन के बाहर धरना देती पीएचडी स्कॉलर।
- फोटो : RohtakCity
एमडीयू का शारीरिक शिक्षा विभाग एक बार फिर चर्चा में है। इस बार पीएचडी स्कॉलर एवं असिस्टेंट प्रोफेसर (गेस्ट फैकल्टी) ने विवि के सुरक्षाकर्मियों पर पिटाई, अभद्रता करने व घसीटने के साथ एचओडी पर भी उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। स्कॉलर ने विवि के प्रवेश द्वार नंबर तीन पर धरना देकर रोष प्रकट किया। बाद में अधिकारियों को मामले की शिकायत देते हुए न्याय की गुहार लगाई। इधर, एचओडी ने स्कॉलर का पीएचडी में फर्जी तरीके से प्रवेश करने का दावा करते हुए इसे जानबूझ कर रची गई साजिश बताया है।
पीएचडी स्कॉलर का कहना है कि विवि के सुरक्षाकर्मियों ने उसे पीटा, अपशब्द कहे व घसीटा। यह सब दो दिन पहले भी हो चुका है। पिछले चार दिन से जब भी यूनिवर्सिटी आती हूं तो यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि उसकी एंट्री बैन है। सुरक्षाकर्मियों से इसका कारण पूछा जाता है तो कोई जवाब नहीं देता। वीरवार को छात्र एकता मंच के सदस्यों के साथ मिलकर गेट नंबर तीन पर धरने पर बैठ गई। स्कॉलर ने आरोप लगाया कि कि यह सब बिना किसी अधिकारिक पत्र या आदेश के मेरे विभाग के अध्यक्ष करा रहे हैं।
पिछले डेढ़ साल से मुझे मेरे विभाग के अध्यक्ष शारीरिक व मानसिक तौर से प्रताड़ित कर रहे हैं। जाति सूचक गालियां देना, किसी कारण से क्लास में देरी होने पर हाजिरी नहीं लगाने के साथ कई महीने का वेतनमान भी काटा गया है। इस मामले में सीएम विंडो, पुलिस अधीक्षक, कुलपति, कुलसचिव, अनुसूचित जाति/जनजाति सेल एमडीयू व यौन शोषण की शिकायत कमेटी एमडीयू को भी दी गई है। लेकिन किसी भी विश्वविद्यालय अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी ने मेरी अपील नहीं सुनी।
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यह है मामला
स्कॉलर ने कहा कि आठ दिसंबर 2018 को विभाग के पूर्व अध्यक्ष को पीएचडी में दाखिले के बाद पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। मेरे गाइड वर्तमान एचओडी बने। मेरे बार-बार आवेदन के बाद भी वे मुझे विद्यार्थी स्वीकार नहीं कर रहे थे। क्योंकि मैंने उनके शारीरिक शोषण के गलत इरादों को ठुकरा दिया था। उन्होंने मेरे साथ एक रात बिताने की बात कही। इसका मैने विरोध किया और शिकायत विवि प्रशासन को दी। इसके बाद 16 मार्च 2019 को पूर्व विभागाध्यक्ष को पंजीकरण के लिए आवेदन किया। इस पर कमेटी ने मेरा रजिस्ट्रेशन पास कर दिया। इसके चलते वर्तमान एचओडी ने मेरा रजिस्ट्रेशन रद्द कराने का प्रयास किया। पुलिस में भी शिकायत दी। इसमें दाखिला ही अवैध बताया। यह सब मुझ पर दबाव बनाने के लिए किया। यही नहीं पांच महीने में दस आरोप पत्र बगैर कारण जारी कर दिए। मेरा वेतन तीन महीने तक रोके रखा गया। हार कर मुझे वेतन के लिए ठंड में वीसी निवास के बाहर बच्चों के साथ बैठने को मजबूर होना पड़ा। तब जाकर मेरा आधा वेतन जारी हुआ।
पीएचडी स्कॉलर मेरी छवि खराब करने के लिए मनगढंत आरोप लगा रही है। पूर्व एचओडी ने उसका फर्जी तरीके से पीएचडी में प्रवेश किया था। इस बारे में एसपी को एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत भी दी थी। वर्ष 2018-19 में मेरे पास पीएचडी की दो सीटें थी। पूर्व एचओडी ने अपनी मर्जी से कमेटी बनाकर शिकायत करने वाली स्कॉलर को अपने पास प्रवेश दे दिया। यही नहीं कमेटी में नॉन टीचिंग कर्मचारी को सदस्य के रूप में लिया गया। जबकि शिक्षक को लेना चाहिए। यह सब भी मुझसे पूछे या बताए बगैर किया गया। पीएचडी रजिस्ट्रेशन में भी पूर्व एचओडी ने नियम विरुद्ध अपने तहत कर किया। डीआरसी की मीटिंग से पहले होने वाली आरएसी की बैठक ही नहीं बुलाई गई। डीआरसी के कुछ देर बाद ही आरएससी की बैठक दिखा दी गई। जबकि इसके लिए सात दिन का समय देना होता है। इन सब गड़बड़ियों की शिकायत अधिकारियों व पुलिस को दी गई है।
-डॉ. आरपी गर्ग, एचओडी, शारीरिक शिक्षा विभाग, एमडीयू।
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पीएचडी स्कॉलर का कहना है कि विवि के सुरक्षाकर्मियों ने उसे पीटा, अपशब्द कहे व घसीटा। यह सब दो दिन पहले भी हो चुका है। पिछले चार दिन से जब भी यूनिवर्सिटी आती हूं तो यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि उसकी एंट्री बैन है। सुरक्षाकर्मियों से इसका कारण पूछा जाता है तो कोई जवाब नहीं देता। वीरवार को छात्र एकता मंच के सदस्यों के साथ मिलकर गेट नंबर तीन पर धरने पर बैठ गई। स्कॉलर ने आरोप लगाया कि कि यह सब बिना किसी अधिकारिक पत्र या आदेश के मेरे विभाग के अध्यक्ष करा रहे हैं।
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पिछले डेढ़ साल से मुझे मेरे विभाग के अध्यक्ष शारीरिक व मानसिक तौर से प्रताड़ित कर रहे हैं। जाति सूचक गालियां देना, किसी कारण से क्लास में देरी होने पर हाजिरी नहीं लगाने के साथ कई महीने का वेतनमान भी काटा गया है। इस मामले में सीएम विंडो, पुलिस अधीक्षक, कुलपति, कुलसचिव, अनुसूचित जाति/जनजाति सेल एमडीयू व यौन शोषण की शिकायत कमेटी एमडीयू को भी दी गई है। लेकिन किसी भी विश्वविद्यालय अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी ने मेरी अपील नहीं सुनी।
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यह है मामला
स्कॉलर ने कहा कि आठ दिसंबर 2018 को विभाग के पूर्व अध्यक्ष को पीएचडी में दाखिले के बाद पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। मेरे गाइड वर्तमान एचओडी बने। मेरे बार-बार आवेदन के बाद भी वे मुझे विद्यार्थी स्वीकार नहीं कर रहे थे। क्योंकि मैंने उनके शारीरिक शोषण के गलत इरादों को ठुकरा दिया था। उन्होंने मेरे साथ एक रात बिताने की बात कही। इसका मैने विरोध किया और शिकायत विवि प्रशासन को दी। इसके बाद 16 मार्च 2019 को पूर्व विभागाध्यक्ष को पंजीकरण के लिए आवेदन किया। इस पर कमेटी ने मेरा रजिस्ट्रेशन पास कर दिया। इसके चलते वर्तमान एचओडी ने मेरा रजिस्ट्रेशन रद्द कराने का प्रयास किया। पुलिस में भी शिकायत दी। इसमें दाखिला ही अवैध बताया। यह सब मुझ पर दबाव बनाने के लिए किया। यही नहीं पांच महीने में दस आरोप पत्र बगैर कारण जारी कर दिए। मेरा वेतन तीन महीने तक रोके रखा गया। हार कर मुझे वेतन के लिए ठंड में वीसी निवास के बाहर बच्चों के साथ बैठने को मजबूर होना पड़ा। तब जाकर मेरा आधा वेतन जारी हुआ।
पीएचडी स्कॉलर मेरी छवि खराब करने के लिए मनगढंत आरोप लगा रही है। पूर्व एचओडी ने उसका फर्जी तरीके से पीएचडी में प्रवेश किया था। इस बारे में एसपी को एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत भी दी थी। वर्ष 2018-19 में मेरे पास पीएचडी की दो सीटें थी। पूर्व एचओडी ने अपनी मर्जी से कमेटी बनाकर शिकायत करने वाली स्कॉलर को अपने पास प्रवेश दे दिया। यही नहीं कमेटी में नॉन टीचिंग कर्मचारी को सदस्य के रूप में लिया गया। जबकि शिक्षक को लेना चाहिए। यह सब भी मुझसे पूछे या बताए बगैर किया गया। पीएचडी रजिस्ट्रेशन में भी पूर्व एचओडी ने नियम विरुद्ध अपने तहत कर किया। डीआरसी की मीटिंग से पहले होने वाली आरएसी की बैठक ही नहीं बुलाई गई। डीआरसी के कुछ देर बाद ही आरएससी की बैठक दिखा दी गई। जबकि इसके लिए सात दिन का समय देना होता है। इन सब गड़बड़ियों की शिकायत अधिकारियों व पुलिस को दी गई है।
-डॉ. आरपी गर्ग, एचओडी, शारीरिक शिक्षा विभाग, एमडीयू।