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Rohtak News: सरकार के नोटिफिकेशन के बाद असमंजस में एमबीबीएस विद्यार्थी

Fri, 23 Dec 2022 05:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 23 Dec 2022 05:30 AM IST
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MBBS students in confusion after the government's notification
बॉन्ड पॉलसी के विरोध में पीजीआई के निदेशक कार्यालय के बाहर अनशन पर बैठे एमबीबीएस के विद्यार्थी। ?
रोहतक। बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में चल रहे संघर्ष के 51वें दिन सरकार की ओर से जारी हुए नोटिफिकेशन ने आंदोलनरत एमबीबीएस विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। वीरवार को विद्यार्थी दिनभर सरकारी पत्र में दर्ज शर्तों की गहराई समझने में व्यस्त रहे। वे देर रात तक भी आंदोलन समाप्त करने या जारी रखने के संबंध में फैसला नहीं ले पाए। इस संबंध में दिनभर बैठकों का दौरा भी चला।
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वीरवार को पीजीआई के निदेशक कार्यालय के बाहर सन्नाटा पसरा नजर आया। विद्यार्थी निदेशक कार्यालय के पीछे ओपन थियेटर में बैठक करते दिखाई दिए। यहां बाहरी लोगों का प्रवेश निषेध रहा। यह भी एक बार नहीं, कई बार हुई। पहले विद्यार्थी सरकार के नोटिफिकेशन दर्ज शर्तों को गहराई से समझने व इसके बाद अपनी संतुष्टि या अधूरी मांगों को लेकर चर्चा करते दिखाई दिए। इसमें कुछ सरकार से सहमत तो कुछ असहमत नजर आए। हालांकि इस बारे में विद्यार्थियों ने मीडिया को फैसले से अवगत नहीं कराया है। इसकी वजह देर रात तक भी इस गंभीर मुद्दे पर फैसला नहीं होना बताया गया है। विद्यार्थियों ने कहा कि इस मामले में सभी से चर्चा करने के बाद ही कोई एक निर्णय लिया जाएगा। इसमें प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थी भी शामिल रहेंगे। फिलहाल मामले पर पूरी गंभीरता से चर्चा व मंथन जारी है। इस संबंध में कोई सटीक या अंतिम निर्णय होने पर ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
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इधर, शाम को नए विद्यार्थियों का दल अनशन पर बैठा। विद्यार्थियों ने रोज की भांति अपना अनशन शुरू किया है। यह कितना आगे तक चलेगा, इस बारे में अभी स्थिति अस्पष्ट है। विद्यार्थी शुक्रवार को आंदोलन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
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सरकार ने माना यह सेवा बॉन्ड नहीं, फीस वृद्धि है
ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एआईडीएसओ) के प्रदेश सचिव उमेश मौर्य ने कहा कि हरियाणा सरकार की अधिसूचना महज एक झांसा है। इसके अलावा कुछ नहीं है। अधिसूचना में सरकार ने स्वीकार किया है कि यह सेवा बॉन्ड नहीं, फीस वृद्धि है। इससे सरकार का छलपूर्ण चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है। इसने साबित कर दिया है कि मेडिकल विद्यार्थियों का संघर्ष जायज है। पत्र में साफ लिखा है कि विद्यार्थियों को प्रोविजनल डिग्री मिलेगी। यानी लोन की पूरी किश्त चुकाने पर ही विद्यार्थी को उसकी एमबीबीएस की डिग्री मिलेगी। बगैर डिग्री व न तो पीजी में प्रवेश ले सकता है और न ही प्रदेश से बाहर कहीं अपनी सेवा दे सकता है। पत्र में दर्ज अन्य शर्तें भी इसी तरह हैं। सभी मेें सवाल छिपे हैं। पीजी को लेकर स्थिति अस्पष्ट है। यूजी विद्यार्थियों को नौकरी एक साल के लिए दी जाएगी। वह भी अनुबंध पर। इसके बाद क्या होगा, स्थिति अस्पष्ट है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थी 40 लाख का लोन कैसे चुकाएंगे।

एक्सपर्ट बोले- विद्यार्थियों के संघर्ष ने नई पॉलिसी के लिए किया विवश
मेडिकल छात्रों ने 51 दिन लगातार जुझारू संघर्ष किया है। इसी के चलते सरकार को नई पॉलिसी लानी पड़ी। मेडिकल सर्विस सेंटर इसके लिए विद्यार्थियों व उनकी एकता को श्रेय देता है। नई पॉलिसी में भी अभी अस्पष्ट बिंदु हैं। ये मेडिकल छात्रों के लिए नुकसानदायक हैं। सरकार स्पष्ट रूप से स्वीकारती है कि यह फीस वृद्धि नीति है। डॉक्टर बनाने के लिए 30 लाख रुपये फीस वसूली जाएगी। यह घृणित कदम है। क्लॉज 5.ए.4 में आरएलएलआर का उल्लेख किया है। यानी ब्याज दर को मौजूदा मुद्रा स्फीति दर या महंगाई से जोड़ दिया है। इसका मतलब यह है कि अब छात्रों को भविष्य में बढ़ी हुई ब्याज दर के हिसाब से ज्यादा पैसा देना पड़ेगा। पीजी करने का रास्ता बंद हो जाएगा। अनुबंध पर नौकरी के नियम, शर्तें स्पष्ट नहीं हैं। वेतन कितना होगा, कितने साल के लिए होगा, कुछ भी स्पष्ट नहीं है। यदि एक वर्ष के बाद अनुबंध समाप्त होता है, तब क्या होगा। सरकार ईएमआई का भुगतान करेगी या नहीं। यही नहीं, सरकार ने खंड 11 में स्पष्ट कहा है कि कोई भी खंड किसी भी समय जोड़ा जा सकता है। नियम और शर्तें किसी भी समय बदली जा सकती हैं। सेवा बांड के नाम पर यह फीस वृद्धि नीति लागू होने पर आंदोलन की सभी उपलब्धियां पूर्ववत की जा सकती हैं। इसलिए मेडिकल सर्विस सेंटर पूरी फीस वृद्धि नीति को तुरंत वापस लिये जाने की मांग करता है।
- डॉ. अंशुमन मित्रा, राष्ट्रीय सचिव, मेडिकल सर्विस सेंटर।
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