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Rohtak News: बॉन्ड पॉलिसी में बदलाव को लेकर दूसरी बैठक में देरी से एमबीबीएस छात्रों में रोष
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कहा-कुछ दिन बाद भी बैठक नहीं हुई तो जाएंगे कोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। चिकित्सा बॉन्ड पॉलिसी में बदलाव को लेकर एमबीबीएस छात्रों में रोष बढ़ रहा है। शनिवार को एमबीबीएस बैच-2020 का आखिरी दिन था। अभी भी पॉलिसी में बदलाव को लेकर दूसरी बैठक का कुछ पता नहीं है। छात्रों ने 25 फरवरी को डीएमईआर (मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च निदेशालय) को पत्र लिखकर जल्द बैठक कराने की अपील की थी पर नहीं हुई।
बैठक को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है जिसकी वजह से छात्रों ने पॉलिसी को मानने के लिए हस्ताक्षर नहीं किए हैं। छात्रों का कहना है कि पॉलिसी पर हस्ताक्षर नहीं करने पर कोई दस्तावेज नहीं दिए जाएंगे। अगर कुछ दिनों में कोई कदम नहीं उठाया गया तो उन्हें काेर्ट का रास्ता चुनना पड़ेगा।
दूसरी ओर पीजीआई के डीन डॉ. अशोक चौहान का कहना है कि फिलहाल सरकार के साथ छात्रों की बैठक चल रही है। सरकार की तरफ से कोई निर्देश नहीं आया है। जैसा निर्देश आएगा वैसे किया जाएगा।
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डीएमईआर को कई बार लेटर लिखे गए लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। डीन का कहना है कि डीएमईआर से छात्रों को इंटर्नशिप व अन्य दस्तावेज नहीं जाए। फिलहाल दो दिन इंतजार करेंगे। कुछ नहीं किया गया तो मजबूरन कोर्ट की शरण की लेंगे। -डॉ. अक्षत मित्तल, एमबीबीएस छात्र।
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सरकार की तरफ से बातचीत से भी मुंह मोड़ा जा रहा है। बातचीत से ही हल निकलता है। हम सेवा करना चाहते हैं। सरकार की ओर से केवल घोषणाएं की जाती है लेकिन धरातल पर कुछ देखने को नहीं मिलता। छात्र बात करने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल समाधान का इंतजार है। -डॉ. विनय चौधरी, एमबीबीएस छात्र।
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चिकित्सा बॉन्ड को लेकर सरकार से एक बार बात की जा चुकी है। उसमें कुछ मांगों को लेकर सहमति बनी थी। अन्य मांगों पर अगली बैठक में चर्चा की बात कही गई थी। डीएमईआर को पहले ही पत्र भेजकर बैठक की अपील की थी लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। शनिवार को बैच खत्म हो गया है। अगर आगे भी कोई समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन कोर्ट का रास्ता अपनाना पड़ेगा। -डॉ. अंकित, अध्यक्ष, अंडर ग्रेजुएट स्टूडेंट एंड इंटर्न एसोसिएशन।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। चिकित्सा बॉन्ड पॉलिसी में बदलाव को लेकर एमबीबीएस छात्रों में रोष बढ़ रहा है। शनिवार को एमबीबीएस बैच-2020 का आखिरी दिन था। अभी भी पॉलिसी में बदलाव को लेकर दूसरी बैठक का कुछ पता नहीं है। छात्रों ने 25 फरवरी को डीएमईआर (मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च निदेशालय) को पत्र लिखकर जल्द बैठक कराने की अपील की थी पर नहीं हुई।
बैठक को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है जिसकी वजह से छात्रों ने पॉलिसी को मानने के लिए हस्ताक्षर नहीं किए हैं। छात्रों का कहना है कि पॉलिसी पर हस्ताक्षर नहीं करने पर कोई दस्तावेज नहीं दिए जाएंगे। अगर कुछ दिनों में कोई कदम नहीं उठाया गया तो उन्हें काेर्ट का रास्ता चुनना पड़ेगा।
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दूसरी ओर पीजीआई के डीन डॉ. अशोक चौहान का कहना है कि फिलहाल सरकार के साथ छात्रों की बैठक चल रही है। सरकार की तरफ से कोई निर्देश नहीं आया है। जैसा निर्देश आएगा वैसे किया जाएगा।
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डीएमईआर को कई बार लेटर लिखे गए लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। डीन का कहना है कि डीएमईआर से छात्रों को इंटर्नशिप व अन्य दस्तावेज नहीं जाए। फिलहाल दो दिन इंतजार करेंगे। कुछ नहीं किया गया तो मजबूरन कोर्ट की शरण की लेंगे। -डॉ. अक्षत मित्तल, एमबीबीएस छात्र।
सरकार की तरफ से बातचीत से भी मुंह मोड़ा जा रहा है। बातचीत से ही हल निकलता है। हम सेवा करना चाहते हैं। सरकार की ओर से केवल घोषणाएं की जाती है लेकिन धरातल पर कुछ देखने को नहीं मिलता। छात्र बात करने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल समाधान का इंतजार है। -डॉ. विनय चौधरी, एमबीबीएस छात्र।
चिकित्सा बॉन्ड को लेकर सरकार से एक बार बात की जा चुकी है। उसमें कुछ मांगों को लेकर सहमति बनी थी। अन्य मांगों पर अगली बैठक में चर्चा की बात कही गई थी। डीएमईआर को पहले ही पत्र भेजकर बैठक की अपील की थी लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। शनिवार को बैच खत्म हो गया है। अगर आगे भी कोई समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन कोर्ट का रास्ता अपनाना पड़ेगा। -डॉ. अंकित, अध्यक्ष, अंडर ग्रेजुएट स्टूडेंट एंड इंटर्न एसोसिएशन।