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Rohtak News: बलिदानी समुंद्र सिंह ने चिट्ठियों में छिपा लिया था कारगिल का मंजर
Fri, 25 Jul 2025 09:39 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 25 Jul 2025 09:39 PM IST
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11.-शहीद समुंद्र सिंह। स्रोत : परिवार
कारगिल के हीरो
-18 ग्रेनेडियर्स में नायक रहे रोहतक निवासी समुंद्र सिंह द्रास सेक्टर में हुए थे बलिदान
-बॉर्डर से पत्नी को भेजी चिट्ठियों में कभी नहीं किया था कारगिल युद्ध का जिक्र
विकास सैनी
रोहतक। सेना की 18 ग्रेनेडियर्स में नायक रहे रोहतक के सांघी गांव निवासी समुंद्र सिंह ने बॉर्डर से पत्नी सरोज बाला को कई चिट्ठियां भेजी थीं लेकिन कभी कारगिल युद्ध का जिक्र नहीं किया। द्रास सेक्टर में वे देश की रक्षा करते 3 जून 1999 को बलिदान हुए थे। परिजनों को 5 जून को उनकी शहादत की खबर मिली थी। उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।
रोहतक के सेक्टर-14 में रह रहीं वीरांगना सरोज बाला आज भी कारगिल की बात याद कर भावुक हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि पति समुंद्र सिंह ने कारगिल लड़ाई के वक्त कई चिटि्ठयां भेजीं लेकिन इनमें युद्ध का जिक्र नहीं किया। टीवी पर एक जवान की शहादत की खबर सुनकर समुंद्र को पहले ही अनहोनी की आशंका हो गई थी। इसलिए कभी पूछने पर भी कुछ नहीं बताते थे। कहते थे मुझे कुछ हो गया तो क्या करोगी। इस पर वे भी कुछ नहीं पूछती थीं।
सरोज ने बताया कि समुंद्र सिंह मार्च 1999 में छुट्टी खत्म होने के बाद कारगिल के द्रास सेक्टर गए थे। ड्यूटी पर जाने से पहले साढ़े 4 साल के बेटे अर्जुन को उसकी नानी के घर भेज दिया था। वह उसे बेहद प्यार करते थे। इसलिए जाने से पहले उससे मिलने से बच रहे थे। पता नहीं था कि वे उससे फिर कभी नहीं मिलेंगे। कारगिल में वे जिस दिन बलिदान हुए उसी रात आभास हुआ जैसे वे आवाज दे रहे हैं। बेटा भी देर रात चौंककर उठ गया था। दो दिन बाद उनकी शहादत की खबर आई। बेटा अर्जुन अब एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड में जेई है। बेटी स्वाति सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में काम कर रही है।
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अफसोस...न प्लॉट मिला न विजय द्वार बना
सरोज बाला कहती हैं कारगिल सपूतों की याद में शहर में विजय द्वार बनाया गया था। शांतमयी चौक पर बना यह द्वार बाद में सड़क चौड़ी कराने के नाम पर हटा दिया गया। इसके बाद यह दोबारा नहीं बन सका। यही नहीं, शहीद परिवारों को 200 गज का प्लाॅट देने की घोषणा की गई थी। यह घोषणा भी अब तक पूरी नहीं हुई है।
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-18 ग्रेनेडियर्स में नायक रहे रोहतक निवासी समुंद्र सिंह द्रास सेक्टर में हुए थे बलिदान
-बॉर्डर से पत्नी को भेजी चिट्ठियों में कभी नहीं किया था कारगिल युद्ध का जिक्र
विकास सैनी
रोहतक। सेना की 18 ग्रेनेडियर्स में नायक रहे रोहतक के सांघी गांव निवासी समुंद्र सिंह ने बॉर्डर से पत्नी सरोज बाला को कई चिट्ठियां भेजी थीं लेकिन कभी कारगिल युद्ध का जिक्र नहीं किया। द्रास सेक्टर में वे देश की रक्षा करते 3 जून 1999 को बलिदान हुए थे। परिजनों को 5 जून को उनकी शहादत की खबर मिली थी। उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।
रोहतक के सेक्टर-14 में रह रहीं वीरांगना सरोज बाला आज भी कारगिल की बात याद कर भावुक हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि पति समुंद्र सिंह ने कारगिल लड़ाई के वक्त कई चिटि्ठयां भेजीं लेकिन इनमें युद्ध का जिक्र नहीं किया। टीवी पर एक जवान की शहादत की खबर सुनकर समुंद्र को पहले ही अनहोनी की आशंका हो गई थी। इसलिए कभी पूछने पर भी कुछ नहीं बताते थे। कहते थे मुझे कुछ हो गया तो क्या करोगी। इस पर वे भी कुछ नहीं पूछती थीं।
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सरोज ने बताया कि समुंद्र सिंह मार्च 1999 में छुट्टी खत्म होने के बाद कारगिल के द्रास सेक्टर गए थे। ड्यूटी पर जाने से पहले साढ़े 4 साल के बेटे अर्जुन को उसकी नानी के घर भेज दिया था। वह उसे बेहद प्यार करते थे। इसलिए जाने से पहले उससे मिलने से बच रहे थे। पता नहीं था कि वे उससे फिर कभी नहीं मिलेंगे। कारगिल में वे जिस दिन बलिदान हुए उसी रात आभास हुआ जैसे वे आवाज दे रहे हैं। बेटा भी देर रात चौंककर उठ गया था। दो दिन बाद उनकी शहादत की खबर आई। बेटा अर्जुन अब एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड में जेई है। बेटी स्वाति सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में काम कर रही है।
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अफसोस...न प्लॉट मिला न विजय द्वार बना
सरोज बाला कहती हैं कारगिल सपूतों की याद में शहर में विजय द्वार बनाया गया था। शांतमयी चौक पर बना यह द्वार बाद में सड़क चौड़ी कराने के नाम पर हटा दिया गया। इसके बाद यह दोबारा नहीं बन सका। यही नहीं, शहीद परिवारों को 200 गज का प्लाॅट देने की घोषणा की गई थी। यह घोषणा भी अब तक पूरी नहीं हुई है।

11.-शहीद समुंद्र सिंह। स्रोत : परिवार

11.-शहीद समुंद्र सिंह। स्रोत : परिवार