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Rohtak News: महिलाओं को अधिकारों के प्रति किया जागरूक

Fri, 10 Mar 2023 01:46 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Fri, 10 Mar 2023 01:46 AM IST
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Made women aware of their rights
जिला विकास भवन में महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल महिलाएं। विज्ञप्ति
रोहतक । महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से जिला विकास भवन स्थित डीआरडीए हॉल में जिला स्तरीय अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किशोर न्याय अधिनियम, पोक्सो अधिनियम, बच्चा गोद लेने से संबंधित कानूनी प्रावधानों और अधिकारों की जानकारी दी गई।
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कार्यक्रम में विभाग की सभी सुपरवाइजर, महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्य, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य, जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्य व संबंधित संस्थाओं के सदस्यों ने भाग लिया।
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कार्यक्रम के दौरान जिला बाल संरक्षण अधिकारी कुलदीप ने किशोर न्याय अधिनियम के बारे में बताया कि यह अधिनियम दो श्रेणियों के बच्चों के लिए बनाया गया है। पहली श्रेणी में 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चे शामिल है, जो किसी अपराध की गिरफ्त में आ जाते है। इस प्रकार के बच्चों को विशेष किशोर पुलिस इकाई की तरफ से किशोर न्याय बोर्ड में पेश किया जाता है। अधिनियम के तहत ऐसे बच्चों को अधिकतम तीन वर्ष की सजा का प्रावधान है। किशोर न्याय बोर्ड की तरफ से ऐसे बच्चों को संप्रेक्षण गृह, विशेष गृह या सुरक्षित स्थान पर भेजा जाता है। दूसरी श्रेणी में जिन बच्चों को देखभाल और संरक्षण की जरूरत है, उनके कल्याण के लिए बाल कल्याण समिति का प्रावधान है।
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इस प्रकार के बच्चों को कमेटी की तरफ से बाल संस्थानों में भेजा जाता है। श्रेणी में बेसहारा, गुमशुदा, लावारिस, अनाथ, बाल भिक्षुक व बाल श्रम आदि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शामिल किया गया है। उन्होंने बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में बताया कि अनाथ, परित्यक्त और लावारिस बच्चों को ही विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी के माध्यम से गोद लेने के इच्छुक माता-पिता को गोद दिया जा सकता है। गोदनामे के अंतिम आदेश जिलाधीश की तरफ से जारी किएजाते है। जरूरतमंद 40 वर्ष से कम आयु के दंपत्ति को 0 से 2 वर्ष तक का बच्चा गोद दिया जा सकता है। 2 बच्चों वाले दंपत्ति को विशेष श्रेणी का तीसरा बच्चा ही मिल सकता है। बच्चा गोद लेने के लिए दंपत्ति की उम्र 55 वर्ष से कम होनी चाहिए तथा शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों को गोद लिया जा सकता है।
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