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विद्यार्थियों में बढ़ा समाजशास्त्र के प्रति रुझान

Tue, 20 Jul 2021 01:33 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 01:33 AM IST
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Increased tendency towards sociology among students
विद्यार्थियों में एमए के स्तर पर समाजशास्त्र विषय के प्रति रुझान बढ़ा है। बहुत से विद्यार्थी ऐसे हैं जो दूसरे विषयों से स्नातक करने के बाद एमए समाजशास्त्र में कर रहे हैं। यूपीएससी और एचपीएससी जैसी परीक्षाओं में चयन के लिए विद्यार्थी समाजशास्त्र को तरजीह दे रहे हैं। एमडीयू में समाज शास्त्र विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुप्रीति बताती हैं कि विभाग में एमए में 40 सीटें हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से विद्यार्थियों के बढ़ते रुझान को देखते हुए हर साल 10 सीटें अतिरिक्त लेनी पड़ती हैं। इस बार भी एमए-1 में 47 विद्यार्थी हैं। उन्होंने बताया कि दूसरे विषय या बैकग्राउंड वाले बहुत से विद्यार्थी आ रहे हैं, जिनमें बहुत से बीटेक वाले भी हैं। विद्यार्थियों के समाजशास्त्र को तरजीह देने का सबसे बड़ा कारण यूपीएससी और एचपीएससी जैसी परीक्षाएं हैं। पिछले कुछ सालों में यूपीएससी पास करने वालों में बड़ी संख्या में ऐसे हैं, जिनका एक विषय समाजशास्त्र रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा समाजशास्त्र करने वालों को समाज कल्याण विभाग में नौकरी मिल जाती है।
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लॉ और प्रशासन में मददगार
विभाग के प्रोफेसर डॉ. कंवर चौहान कहते हैं कि बड़ी संख्या में लॉ करने वाले विद्यार्थी समाजशास्त्र में एमए कर रहे हैं। क्योंकि यह विषय पढ़ने के बाद उन्हें केस लड़ने में मदद मिलती है। समाजशास्त्र उनकी प्रैक्टिस के लिए मददगार है। इसी तरह जो लोग प्रशासनिक सेवा में जाते हैं, उनके लिए भी समाजशास्त्र मददगार है। क्योंकि उन्हें समाज के बीच जाकर उनकी समस्याओं से जूझना होता है। ऐसे में समाजशास्त्र की पढ़ाई उनके काम आती है।
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आईएएस ने लिखी समाजशास्त्र पर किताब
डॉ. सुप्रीति ने बताया कि उनके विभाग से पढ़ने वाले आईएएस नितिन सांगवान ने तो बाकायदा एक किताब लिखी है। इससे लोग समाजशास्त्र को समझ सकते हैं। वह आईआईटी ग्रेजुएट थे, फिर समाजशास्त्र लिया। पहले उन्होंने एचपीएससी पास किया, फिर यूपीएससी की परीक्षा भी पास की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने बीटेक करने के बाद समाजशास्त्र से एमए किया, नेट पास किया और टीचर बन गए। यहां के विद्यार्थियों का चयन सेना, वायु सेना और हरियाणा पुलिस में भी हुआ है। यहां के विद्यार्थी सुनारिया जेल के कैदियों को पढ़ाते हैं, बहुत सारे एनजीओ में हैं।
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स्कूल स्तर पर हो पढ़ाई
डॉ. सुप्रीति ने कहा कि समाजशास्त्र विषय अगर स्कूल स्तर पर शुरू हो जाए तो विद्यार्थियों के लिए अच्छा है। स्नातक के पांच साल के इंटिग्रेटेड कोर्स में इसे शामिल किया जा चुका है। बारहवीं में भी यह विषय शुरू हो गया है। स्कूली पढ़ाई में भी होना चाहिए। एमडीयू में अभी एमए है, कोशिश कर रहे हैं कि बीए शुरू हो जाए। लेकिन फंड और स्टाफ की किल्लत है।
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