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होम्योपैथी विद्यार्थियों ने कुलपति कार्यालय पर दिया धरना

Thu, 17 Sep 2020 12:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 12:12 AM IST
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Homeopathy students sit on VC office
पीजीआईएमएस के कुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे होम्योपैथी के विद्यार्थी। - फोटो : RohtakCity
रोहतक। निजी होम्योपैथी कॉलेज के विद्यार्थियों ने कुलपति कार्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इनकी मांग है कि उनके तृतीय वर्ष की परीक्षाएं ली जाएं और उनके भविष्य को बर्बाद न किया जाए। धरने पर बैठे विद्यार्थियों के समर्थन में बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी भी पहुुंचे।
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता सन्नी नारा ने बताया कि जिस प्रकार पीजीआईएमएस प्रशासन होम्योपैथी के विद्यार्थियों के साथ नाइंसाफी कर रहा हैं, उससे उनके भविष्य के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। इस तानाशाही को परिषद बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर किसी भी छात्र का साल खराब होता है तो प्रशासन को इसकी सजा भुगतनी पड़ेगी। विद्यार्थी परिषद छात्रों की मांगों को पूरा कराने तक संघर्ष में छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ा है। छात्रों की मांगों को लेकर आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। विकट परिस्थितियों में जब सरकार लोगों को घर से ना निकलने की सलाह दे रही है, इन हालातों में छात्र अपने घर से निकल कर अपनी जान हथेली पर रखकर धरना स्थल पर बैठने को मजबूर हैं। पीजीआई प्रशासन को बिल्कुल भी होश नहीं है, क्योंकि एक भी अधिकारी अब तक छात्रों से मिलने तक नहीं आया। इसके अलावा उनकी मांगों को कोई सुनने को तैयार नहीं है। इस मौके पर आकाश पंघाल, मोहित यादव, अमित आदि मौजूद रहे।
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यह है मामला
होम्योपैथी के विद्यार्थियों को तृतीय वर्ष की परीक्षा देने से रोक लगा दी है। संस्थान हवाला दे रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार उनका पंजीकरण रद हो गया है, जबकि विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी पीजीआई ने लिखित परीक्षा लेकर और काउंसिलिंग के बाद सीट अलॉट की थी। दो साल की परीक्षा लेने के बाद अब कहा जा रहा है कि उनके कॉलेज की मान्यता ही नहीं है। इस मामले में निजी कॉलेज की बात करें तो उसने 50 सीट की जगह 100 सीट पर एडमिशन दिया था। इन सीटों को हाईकोर्ट से मंजूरी मिल गई थी। लेकिन सीसीआईएम 50 सीटों के विरोध में सुप्रीम कोर्ट गई थी और यहां इन सीटों को रद कर दिया गया था। अब इसके चक्कर में पहले 50 विद्यार्थियों का भविष्य भी संकट में आ गया है।
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