फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Haryana Air Pollution Rise in Premature Deliveries Alarming Impact on Pregnant Women and Newborns

प्रदूषण के कारण बढ़ रही प्रीमेच्योर डिलीवरी: अब गर्भवती और नवजात शिशुओं पर भी असर; इस रिपोर्ट से बड़ा खुलासा

Sun, 23 Nov 2025 10:08 AM IST
शाहरुख खान अभिषेक कीरत, अमर उजाला, रोहतक
अभिषेक कीरत, अमर उजाला, रोहतक Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 23 Nov 2025 10:08 AM IST
सार

हरियाणा में प्रदूषण के कारण प्रीमेच्योर डिलीवरी बढ़ रही हैं। पीजीआई में पिछले एक साल में 13,500 की डिलीवरी हुई, इनमें से 2430 के बच्चे तय समय से पहले हुए। पीजीआई रोहतक की सर्वे रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

विज्ञापन
Haryana Air Pollution Rise in Premature Deliveries Alarming Impact on Pregnant Women and Newborns
Haryana Air Pollution - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में वायु प्रदूषण का असर अब गर्भवती व नवजात शिशुओं पर भी पड़ने लगा है। प्रीमेच्योर डिलीवरी की संख्या बढ़ने लगी है। यह दावा पीजीआई रोहतक के गायनी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा दहिया ने किया है। उन्होंने बताया कि यहां एक साल में 13,500 की डिलीवरी हुई। इनमें से 18 प्रतिशत यानि 2430 बच्चे प्रीमेच्योर हुए।
विज्ञापन


इसका मुख्य कारण प्रदूषण भी है क्योंकि हवा में घुला जहर सांसों के जरिए शरीर में जा रहा है। यह खून में मिलकर गर्भस्थ शिशु तक पहुंच रहा है। हवा की खराब गुणवत्ता के कारण खांसी-जुकाम व अस्थमा की समस्या बढ़ गई हैं। 
विज्ञापन


यह स्थिति गर्भवती के लिए नुकसानदायक है। ज्यादा खांसी का भी गर्भ पर असर पड़ता है। ये सभी कारण बच्चे के समय से पहले जन्म लेने का कारण बनते हैं। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मलेरिया, डेंगू होने पर भी समय से पहले बच्चे के जन्म लेने की संभावना रहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

डॉ. दहिया के मुताबिक 36 सप्ताह से पहले जन्म लेने वाले बच्चे को प्रीमेच्योर कहा जाता है। कई बच्चे 28 सप्ताह से पहले, 28 से 32 सप्ताह के बीच और 37 सप्ताह से पहले जन्म ले रहे हैं। इनमें से सिर्फ 34 से 36 सप्ताह के बीच पैदा होने वाले बच्चों को ज्यादा समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। बच्चा जितना जल्दी पैदा होगा, जोखिम उतना ही अधिक होगा।

ऐसे सावधानी बरतें
डॉ. दहिया ने बताया कि नियमित जांच व डॉक्टर की सलाह से दवाई लेकर प्रीमेच्योर डिलीवरी को कम किया जा सकता है। एनिमिया ग्रस्त महिलाओं के जागरूक होने से प्रीमेच्योर डिलीवरी से बचा जा सकता है। हरी सब्जियां, दूध, लस्सी के सेवन से पोषण की कमी पूरी की जा सकती है।
 

बच्चों को आती हैं ये समस्याएं
समय पूर्व जन्मे बच्चे बाहरी तापमान सहन नहीं कर पाते हैं। उनमें हाइपोथेरेमिया, हाइपरग्लेसेमिया, पीलिया व इंफेक्शन होने का खतरा अधिक रहता है। इन्हें अधिक देखभाल की आवश्यकता पड़ती है। कमजोर होने के कारण उनके रेटिना यानि देखने की शक्ति में भी कमी आ सकती है। इंफेक्शन जल्दी होने की आशंका रहती है। बाल्यावस्था में ध्यान न देने पर आईक्यू कम हो सकता है।
 

गर्भवतियों के लिए हानिकारक है प्रदूषण
प्रदूषण महिलाओं में प्रीमेच्योर डिलीवरी का कारण बन सकता है। प्रदूषण के कारण महिलाओं को इंफेक्शन का खतरा रहता है। स्वास्थ्य खराब होने से महिला पोषण नहीं ले पाती है जिससे इम्युनिटी कम हो जाती है। शरीर में विटामिन व प्रोटीन जैसे पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इससे बच्चे को भी पोषण नहीं मिल पाता है। प्रदूषण के कारण प्लेसेंटा (गर्भाशय में बनने वाला एक अस्थायी अंग) बच्चे तक ऑक्सीजन भी सही से नहीं पहुंचा पाता है।- डॉ. सुरेंद्र मलिक, गायनी विभाग, नागरिक अस्पताल
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed