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Rohtak News: खेल के दौरान लगने वाली चोट के मैदान में ही प्रबंधन पर दिया जोर
Thu, 11 Apr 2024 01:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 11 Apr 2024 01:31 AM IST
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10सीटीके10... दक्षिण कोरिया के सियोल में योनसेई विश्वविद्यालय के खेल विज्ञान परिसर में खेल चिकि
रोहतक। दक्षिण कोरिया के सियोल में योनसेई विश्वविद्यालय के खेल विज्ञान परिसर में खेल चिकित्सा पर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति कार्यशाला हुई। इसमें पीजीआईएमएस के खेल चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश रोहिल्ला ने पांच से सात अप्रैल तक हुई इस कार्यशाला में हिस्सा लिया। कार्यशाला में आम खेल चोटों की रोकथाम व प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया गया। घुटने व कंधे की खेल चोटों के व्यापक प्रबंधन पर चर्चा हुई। तीव्र खेल चोटों के मैदान पर प्रबंधन का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया।
प्रतिनिधियों ने एईडी या स्वचालित बाहरी डिफाइब्रिलेटर का उपयोग सीखा। यह व्यायाम के दौरान अचानक कार्डियक अरेस्ट विकसित करने वाले खिलाड़ियों में बहुत उपयोगी है। यह उपयोग में आसान, परिष्कृत चिकित्सा उपकरण है। यह हृदय की लय का विश्लेषण कर सकता है और यदि आवश्यकता पड़ने पर हृदय की लय को बहाल करने के लिए विद्युत झटका, या डिफिब्रिलेशन दे सकता है। प्रतिनिधियों ने कंधे, पैर और टखने जैसी खेल चोटों के प्रबंधन में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड के उपयोग के बारे में भी सीखा। अल्ट्रासाउंड मार्गदर्शन में चोट के स्थान पर इंजेक्शन दिया जा सकता है। चोट के स्थान पर सीधे दवा का इंजेक्शन लगाने से खेल चोट तेजी से ठीक हो जाती है।
यूएचएस कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना व पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एसएस लोहचब ने डॉ. राजेश रोहिल्ला को कार्यशाला में भाग लेने के लिए सराहा। उनका यह अनुभव प्रदेश के खिलाड़ियों को अत्याधुनिक सेवाएं प्रदान करने में लाभदायक रहेगा।
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प्रतिनिधियों ने एईडी या स्वचालित बाहरी डिफाइब्रिलेटर का उपयोग सीखा। यह व्यायाम के दौरान अचानक कार्डियक अरेस्ट विकसित करने वाले खिलाड़ियों में बहुत उपयोगी है। यह उपयोग में आसान, परिष्कृत चिकित्सा उपकरण है। यह हृदय की लय का विश्लेषण कर सकता है और यदि आवश्यकता पड़ने पर हृदय की लय को बहाल करने के लिए विद्युत झटका, या डिफिब्रिलेशन दे सकता है। प्रतिनिधियों ने कंधे, पैर और टखने जैसी खेल चोटों के प्रबंधन में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड के उपयोग के बारे में भी सीखा। अल्ट्रासाउंड मार्गदर्शन में चोट के स्थान पर इंजेक्शन दिया जा सकता है। चोट के स्थान पर सीधे दवा का इंजेक्शन लगाने से खेल चोट तेजी से ठीक हो जाती है।
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यूएचएस कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना व पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एसएस लोहचब ने डॉ. राजेश रोहिल्ला को कार्यशाला में भाग लेने के लिए सराहा। उनका यह अनुभव प्रदेश के खिलाड़ियों को अत्याधुनिक सेवाएं प्रदान करने में लाभदायक रहेगा।

10सीटीके10... दक्षिण कोरिया के सियोल में योनसेई विश्वविद्यालय के खेल विज्ञान परिसर में खेल चिकि
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