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व्यक्ति के चरित्र, दृष्टिकोण व सामाजिक जिम्मेदारी को आकार देती है शिक्षा : प्रो. यादव
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संकाय विकास कार्यक्रम के समापन सत्र में भाग ले रहे प्राध्यापक और शोधार्थी। स्रोत : विवि
- फोटो : संकाय विकास कार्यक्रम के समापन सत्र में भाग ले रहे प्राध्यापक और शोधार्थी। स्रोत : विवि
बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम संपन्न
रोहतक (वि)। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का समापन हुआ। 21वीं सदी में राष्ट्र निर्माता के रूप में शिक्षक की पुनर्कल्पना: डिजिटल रूपांतरण, नैतिक नेतृत्व और समग्र कल्याण विषय पर आधारित कार्यक्रम में देशभर से 250 से अधिक शिक्षकों, प्राध्यापकों व शोधार्थियों ने भाग लिया।
कुलपति प्रो. बीएम यादव ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है बल्कि यह व्यक्ति के चरित्र, दृष्टिकोण और सामाजिक जिम्मेदारी को आकार देती है।
नई शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में समावेशी शिक्षा, भारतीय शिक्षा की समग्र अवधारणा, संस्कार व्यवस्था, सामाजिक उत्थान में शिक्षक की भूमिका, पंचकोश आधारित आत्म-विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और शिक्षा, डिजिटल शिक्षण की गुणवत्ता व युवाओं में उद्यमिता विकास जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि डिजिटल युग में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों को निरंतर स्वयं को अद्यतन करना होगा। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, हरियाणा प्रांत के पालक प्रो. हितेंद्र त्यागी, प्रांत संयोजक डॉ. देवी भूषण व कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. सतहंस और प्रो. इप्शिता बंसल ने भी विचार रखे।
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मंच संचालन प्रो. अरुणा अंचल (सह संयोजिका, हरियाणा प्रांत) द्वारा किया गया। आयोजन की सफलता में कोर कमेटी के सदस्यों-डॉ. रोहतास, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. सुदेश, डॉ. शोभा, डॉ. सुनीता मलिक, डॉ. अर्चना, डॉ. सीमा, डॉ. सुशीला, पूजा, मीनाक्षी व सभी शिक्षा केंद्र संयोजकों का विशेष योगदान रहा।
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रोहतक (वि)। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का समापन हुआ। 21वीं सदी में राष्ट्र निर्माता के रूप में शिक्षक की पुनर्कल्पना: डिजिटल रूपांतरण, नैतिक नेतृत्व और समग्र कल्याण विषय पर आधारित कार्यक्रम में देशभर से 250 से अधिक शिक्षकों, प्राध्यापकों व शोधार्थियों ने भाग लिया।
कुलपति प्रो. बीएम यादव ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है बल्कि यह व्यक्ति के चरित्र, दृष्टिकोण और सामाजिक जिम्मेदारी को आकार देती है।
नई शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में समावेशी शिक्षा, भारतीय शिक्षा की समग्र अवधारणा, संस्कार व्यवस्था, सामाजिक उत्थान में शिक्षक की भूमिका, पंचकोश आधारित आत्म-विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और शिक्षा, डिजिटल शिक्षण की गुणवत्ता व युवाओं में उद्यमिता विकास जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
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कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि डिजिटल युग में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों को निरंतर स्वयं को अद्यतन करना होगा। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, हरियाणा प्रांत के पालक प्रो. हितेंद्र त्यागी, प्रांत संयोजक डॉ. देवी भूषण व कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. सतहंस और प्रो. इप्शिता बंसल ने भी विचार रखे।
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मंच संचालन प्रो. अरुणा अंचल (सह संयोजिका, हरियाणा प्रांत) द्वारा किया गया। आयोजन की सफलता में कोर कमेटी के सदस्यों-डॉ. रोहतास, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. सुदेश, डॉ. शोभा, डॉ. सुनीता मलिक, डॉ. अर्चना, डॉ. सीमा, डॉ. सुशीला, पूजा, मीनाक्षी व सभी शिक्षा केंद्र संयोजकों का विशेष योगदान रहा।