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डॉ. ओंकार प्रकरण ः डॉ. गीता को क्लीन चिट मामले में सेशन कोर्ट से पुलिस को मिला स्टे
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पीजीआई के छात्र डॉ. ओंकार प्रकरण में महिला चिकित्सक गीता गठवाला को क्लीन चिट देने पर पुलिस को राहत मिल गई है। एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ स्टे आर्डर जारी किए हैं। साथ ही पुलिस की अर्जी पर 5 फरवरी को मामले की सुनवाई होगी।
मामले के अनुसार जून 2019 में पीजी छात्र डॉ. ओंकार का शव हॉस्टल के कमरे में फंदे पर लटका मिला था, जिसके बाद मामले को लेकर संस्थान में काफी हंगामा हुआ। हंगामे के बाद पुलिस ने बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला के खिलाफ केस दर्ज किया था। पुलिस की तरफ से मामले की जांच रिपोर्ट जेएमआईसी भरत सिंह की अदालत में दाखिल की गई थी। पुलिस ने जांच रिपोर्ट में अदालत को बताया था कि आरोपी बनाई गई सीनियर महिला चिकित्सक के खिलाफ सुबूत नहीं मिले हैं। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया जाए। अदालत ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद 10 जनवरी को जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। साथ ही कोर्ट ने जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी डीएसपी नारायण सिंह, सीआईए थ्री इंस्पेक्टर ललित कुमार, पीजीआईएमस थाना प्रभारी कैलाश चंद्र व एएसआई देवी सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए। साथ ही पूछा कि क्यों न इस तरह की रिपोर्ट तैयार करने पर चारों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 166ए, 167 व 218 के तहत केस दर्ज किया जाए। अदालत ने फैसले की कॉपी गृह मंत्रालय, जिला न्यायवादी व पुलिस अधीक्षक को भी भेजी थी। पुलिस ने जेएमआईसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ सेशन जज की कोर्ट में अपील की। सेशन जज ने मामले को एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में ट्रांसफर कर दिया। एडीजे कोर्ट ने पुलिस की अर्जी पर निचली कोर्ट के फैसले पर स्टे आर्डर जारी कर दिए।
सेशन कोर्ट से पुलिस को स्टे मिला है। मामले की अब एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में पांच फरवरी को सुनवाई होगी।
- राहुल शर्मा, पुलिस अधीक्षक
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मामले के अनुसार जून 2019 में पीजी छात्र डॉ. ओंकार का शव हॉस्टल के कमरे में फंदे पर लटका मिला था, जिसके बाद मामले को लेकर संस्थान में काफी हंगामा हुआ। हंगामे के बाद पुलिस ने बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला के खिलाफ केस दर्ज किया था। पुलिस की तरफ से मामले की जांच रिपोर्ट जेएमआईसी भरत सिंह की अदालत में दाखिल की गई थी। पुलिस ने जांच रिपोर्ट में अदालत को बताया था कि आरोपी बनाई गई सीनियर महिला चिकित्सक के खिलाफ सुबूत नहीं मिले हैं। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया जाए। अदालत ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद 10 जनवरी को जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। साथ ही कोर्ट ने जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी डीएसपी नारायण सिंह, सीआईए थ्री इंस्पेक्टर ललित कुमार, पीजीआईएमस थाना प्रभारी कैलाश चंद्र व एएसआई देवी सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए। साथ ही पूछा कि क्यों न इस तरह की रिपोर्ट तैयार करने पर चारों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 166ए, 167 व 218 के तहत केस दर्ज किया जाए। अदालत ने फैसले की कॉपी गृह मंत्रालय, जिला न्यायवादी व पुलिस अधीक्षक को भी भेजी थी। पुलिस ने जेएमआईसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ सेशन जज की कोर्ट में अपील की। सेशन जज ने मामले को एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में ट्रांसफर कर दिया। एडीजे कोर्ट ने पुलिस की अर्जी पर निचली कोर्ट के फैसले पर स्टे आर्डर जारी कर दिए।
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सेशन कोर्ट से पुलिस को स्टे मिला है। मामले की अब एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में पांच फरवरी को सुनवाई होगी।
- राहुल शर्मा, पुलिस अधीक्षक