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Rohtak News: धान की सीधी बिजाई से 20 प्रतिशत पानी की बचत

Thu, 12 Jun 2025 02:25 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Thu, 12 Jun 2025 02:25 AM IST
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Direct sowing of paddy saves 20 percent water
सांपला। जिले में अब धान रोपाई और बिजाई की तैयारी हो चुकी है। रोपाई के लिए किसानों की ओर से धान की नर्सरी तैयार की जा रही है। 25 जून के बाद धान की रोपाई का कार्य शुरू होगा। हालांकि, खेतों की तैयारी में मौसम में बार-बार हो रहा बदलाव बाधा डाल रहा है। धान की सीधी बिजाई करने से जहां पानी की 20 प्रतिशत तक बचत होती है, वहीं देरी से सिंचाई करने से खरपतवार की समस्या भी कम आती है।
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किसानों के अनुसार, ज्येष्ठ की जिस दोपहरी में चलने वाली लू खेतों के हानिकारक कीटों को नष्ट कर देती थी, उसी महीने में अक्सर होने वाली बारिश ने भूमि को तपने नहीं दिया। जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के प्रथम सप्ताह में अधिकतर किसान धान की रोपाई करेंगे।
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कृषि विभाग के अनुसार, जिले में हर वर्ष 75-76 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई की जाती है। इसमें से करीब 80 प्रतिशत क्षेत्र में किसानों का रुझान धान की बासमती किस्म पर होता है। वहीं, कृषि विभाग धान की सीधी बिजाई पर जोर देता आ रहा है। कृषि विभाग ने जिले में इस बार 15 हजार एकड़ में धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य रखा है।
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सीधी बिजाई कर 21 दिन बाद लगाएं पानी
कृषि विशेषज्ञों ने खेत में बिजाई के बाद पहला पानी 21 दिन बाद लगाने की सलाह दी है। देरी से पानी लगाने से पौधों की जड़ें गहरी चली जाएंगी। पौधे का जमीन से ऊपर का भाग कम बढ़ेगा। धान के पौधे की पानी देरी से लगाने पर जड़ों में अधिक वृद्धि होती है। इससे वे आसानी से भूमि से पोषक तत्व ले सकते हैं।
जमीन की ऊपरी सतह सूखी रहने से खरपतवार कम उगते हैं। सीधी बिजाई वाली धान की फसल अगर बारिश के कारण उगने से पहले सख्त हो जाती है तो नलाई की जा सकती है। इस अवस्था में भी पहली सिंचाई 21 दिन बाद ही करें।

पहली सिंचाई के बाद अगला पानी पांच से सात दिन के अंतराल पर दे सकते हैं। सीधी बिजाई वाले धान के खेत में पानी जमा रखने की जरूरत नहीं है। केवल खेत में नमी बनाए रखें। विभाग अधिकारी ने बताया कि जो किसान धान कि सीधी बुआई करेगा तो सरकार की तरफ से अनुदान भी दिया जाएगा।
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