फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Whom he accused, entrapment in case inquiry, rohtak police, case resisted

जिनपर केस में फंसाने का आरोप उसी ने की पूछताछ

Sat, 05 Nov 2016 01:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sat, 05 Nov 2016 01:51 AM IST
विज्ञापन
Whom he accused, entrapment in case inquiry, rohtak police, case resisted
पु‌ल‌िस - फोटो : file photo
युवक की हत्या के मामले का फर्जी खुलासा कर तीन युवकों को फं साने के मामले की जांच में नया मोड़ आ गया है। जिन युवकों को हत्या के केस में फंसाया गया था जांच टीम ने उनके बयान दर्ज किये हैं, लेकिन इस दौरान दो आरोपी पुलिस कर्मचारी भी मौजूद रहे। यही नहीं, एक आरोपी पुलिस कर्मी ने तो पीड़ित से सवाल-जवाब भी किये। इससे पुलिस की जांच पर उंगली उठने लगी है। एक पीड़ित की मानें तो मामले में आरोपी सीआईए-1 के पूर्व इंचार्ज इंस्पेक्टर ने ही उससे सवाल-जवाब किये। इस दौरान दूसरा आरोपी तत्कालीन लाखनमाजरा एसएचओ भी मौजूद था। पीड़ित से सवाल-जवाब के बाद जांच टीम ने वारदात के संबंध में उसके बयान दर्ज किये। 
विज्ञापन


जांच टीम में शामिल डीएसपी रोहताश सहित एक अन्य डीएसपी ने बलंभा निवासी विजय को महम थाने बुलाया था। ढाबा संचालक विजय ने बताया कि यहां पहले से मामले में आरोपी सीआईए-1 के पूर्व इंस्पेक्टर मनोज वर्मा और दूसरे आरोपी तत्कालीन लाखनमाजरा एसएचओ संदीप कुमार मौजूद थे। विजय का कहना है कि पहले तो सीआईए-1 के पूर्व इंचार्ज ने उससे सवाल-जवाब किये। इसके बाद डीएसपी के रीडर ने विजय के बयान दर्ज किये। 
विज्ञापन

बता दें कि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विशाल की हत्या के केस से निकालने के एवज में तत्कालीन सीआईए इंचार्ज ने 25 लाख और तत्कालीन लाखनमाजरा एसएचओ ने 10 लाख रुपये मांगे थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


आरोपी इंस्पेक्टर के पीड़ित से सवाल जवाब 
सवाल- तुझे होटल से उठाने की बात सच्ची थी या झूठी?
जवाब- तुम मुझे होटल में उठाने नहीं गये थे। हम निर्दोष थे इसलिए खुद पेश हुए। 
सवाल- मेरे ऊपर 25 लाख रुपये लेने का आरोप झूठा है या सच्चा? 
जवाब- आरोप सच्चा है।  

सवाल- मैंने 10 लाख रुपये लिए थे या नहीं? 
जवाब- तुमने साढ़े चार लाख रुपये लिए थे। 
सवाल- तुम्हारे ऊपर मर्डर के आरोप सच्चे थे या झूठे? 
जवाब- झूठा आरोप लगाकर गिरफ्तार किया था। 


हाईकोर्ट में विचाराधीन है मामला 
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस मामले की जांच में टालमटोल कर रही है। मामले में आठ आरोपियों में से अभी तक एक ही आरोपी पूर्व एसएचओ संदीप को ही गिरफ्तार किया गया है। मामले में पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील लगा रखी है, जिस पर 21 नवंबर को सुनवाई होनी है।  --

ऐसे हुआ था खुलासा 
दरअसल, एक अक्तूबर-2016 की रात को सीआईए-2 और कलानौर पुलिस ने एक गिरोह को पकड़ा था। गिरोह ने महम और कलानौर इलाके में लूट की ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम दिया था। गिरफ्तार 6 आरोपियों में गिरोह का सरगना भी शामिल था। इनमें करसौला निवासी पवन उर्फ  बादशाह, प्रदीप, मोखरा निवासी विजय उर्फ सोनू, रोहित उर्फ मोटा, सचिन और भिवानी के प्रेमनगर निवासी राजेश उर्फ धोला शामिल रहे। गिरोह ने पुलिस रिमांड में लूट की कई वारदातों सहित विशाल मर्डर केस का खुलासा किया था।

पुलिस ने आरोपियों से भारी मात्रा में हथियार बरामद किये थे। जबकि इस मामले में पुलिस फर्जी खुलासा कर बलंभा के ढाबा संचालक विजय, बंटी और प्रदीप को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी। असली आरोपियों के कबूलनामे के बाद पुलिस ने हत्याकांड में फर्जी तरीके से पकड़े गए बलंभा निवासी विजय, बंटी और प्रदीप को डिस्चार्ज कर दिया था। तभी मामले का खुलासा हुआ था। बाद में एसपी ने डीएसपी, इंस्पेक्टर और तत्कालीन थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया था। 

कुछ दिन बाद दर्ज हुआ था केस
मामले का खुलासा होने के बाद पीड़ित पक्ष आरोपियों के खिलाफ कोर्ट पहुंच गया था। कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन डीएसपी अमरजीत कटारिया, सीआईए इंस्पेक्टर मनोज वर्मा, लाखनमाजरा एसएचओ संदीप कुमार, लाखनमाजरा थाने में तैनात जांच अधिकारी राजबीर सिंह, एएसआई कश्मीर सिंह, सीआईए-वन से नफे सिंह, एसआई रमेश, एसआई अशोक पर केस दर्ज किया गया था। 


यह है मामला 
18 अगस्त-2015 की रात गुड़गांव निवासी युवक विशाल कार से हिसार जा रहा था। लाखनमाजरा क्षेत्र स्थित एक ढाबे पर वह कुछ खाने के लिए रुका। इसके बाद न तो विशाल के बारे में कोई सूचना मिली न ही उसकी कार के बारे में। तीन दिन बाद लाखनमाजरा माइनर में विशाल का शव मिला। विशाल की हत्या कर उसकी कार, सोने की चेन और अंगूठी लूट ली थी। लाखनमाजरा थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था। बाद में पुलिस ने बलंभा गांव के ढाबा संचालक विजय, बंटी और प्रदीप को झूठे केस में फंसाकर गिरफ्तार कर लिया था। कुछ दिन बाद जब असली आरोपी पकड़े गये और उन्होंने विशाल का मर्डर करने की बात कबूली तो पुलिस की कारगुजारी का खुलासा हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed