रोहतक का बहलबा कांड : 200 करोड़ की ठगी का मामला, 50-50 हजार के ईनामी आरोपी पिता-पुत्र गिरफ्तार
करीब एक साल पहले रोहतक के गांव बहलबा से करीब 200 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया था। जिस में रोहतक एसटीएफ ने आरोपियों को पकड़ने सफलता हासिल की है। तीनों आरोपियों पर पुलिस ने 50-50 हजार का ईनाम घोषित किया था।
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रोहतक के गांव बहलबा से करीब 200 करोड़ की ठगी के वांछित गेहूं कारोबारी सुरेश व उसके दोनों बेटों रुपेश उर्फ रूप व बसंत को एसटीएम रोहतक की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। तीनों पर एक तरफ पुलिस ने 50-50 हजार का ईनाम घोषित किया था, दूसरी तरफ महम के विधायक बलराज कुंडू ने भी अपनी तरफ से ईनाम देने की घोषणा की थी। साथ ही विधायक ने मामला विधानसभा में भी उठाया था।
पूरे परिवार सहित गांव छोड़कर चला था व्यापारी
एसटीएफ रोहतक यूनिट के इंचार्ज इंस्पेक्टर नरेंद्र पाल ने बताया कि 13 जून 2022 को बहलबा के ग्रामीणों ने महम थाने में गांव निवासी सुरेश व उसके बेटों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता मनोज ने शिकायत दी थी कि गांव निवासी सुरेश शर्मा गांव में करीब 20 सालों से फसल के व्यापार का काम करता था। गांव के किसानों के साथ सुरेश का काफी लेनदेन था। आठ जून को फसल व्यापारी सुरेश अचानक पूरे परिवार सहित गांव छोड़कर चला गया।
सुरेश की जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवाई
ग्रामीणों को सुबह के समय सुरेश के घर पर ताला लगा हुआ मिला। व्यापारी सुरेश की मनोज व अन्य गांव के किसानों व व्यापारियों के साथ 200 करोड़ के करीब की देनदारी है। जांच के बाद पुलिस टीम ने छापेमारी करते हुए आरोपी कृष्ण, सचिन व विकास निवासी गांव बहलबा को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि तीनों आरोपियों ने व्यापारी सुरेश कुमार से मिलीभगत करके सुरेश व उसके परिवार के नाम की जमीन को अपने व अपने जानकारों के नाम बिना पैसे दिए ही रजिस्ट्री करवा ली। आरोपियों ने सुरेश के फरार होने से कुछ दिन पहले ही सुरेश की जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवाई है।
नागपुर में किराये पर रह रहे थे पिता-पुत्र
एसटीएम की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी सुरेश अपने बेटों के साथ नागपुर में किराये पर रह रहा था। पुलिस लगातार उसकी तलाश में थी। अब वह रोहतक आया हुआ था। योजना के तहत पुलिस ने दबिश देकर सुरेश व उसके दोनों बेटों को दबोच लिया।
योजना के तहत फरार हुए थे पिता-पुत्र
ग्रामीणों का आरोप था कि व्यापारी पिछले कई दिन से भागने की तैयारी करता रहा, लेकिन ग्रामीणों को शक भी नहीं हुआ। उसने अपने गोदाम में जितनी भी फसल एकत्रित की थी वह सारी बेच चुका था। जिससे गोदाम खाली हो गए थे। जो पहले कभी भी खाली नहीं हुआ करते थे। इसके अलावा उसकी गांव में कपड़े की दुकान थी वह पिछले काफी दिनों से कपड़ा सस्ते दामों में बेच रहा था। दुकान खाली हो चली थी। इसके अलावा उसने अपनी प्रॉपर्टी पर या तो बड़ी मात्रा में बैंक लोन लिया हुआ है या फिर बेच चुका है।
दूध बेचकर भी व्यापारी में जमा करा देते थे रुपये
ग्रामीणों ने बताया था कि गांव में अति गरीबी के चलते कुछ परिवार दूध को खुद न पीकर बेच देते थे । उससे जो पैसा आता उसे भविष्य के लिए व्यापारी के पास जमा करा देते थे। इसी प्रकार दिहाड़ी, मजदूरी करने वाले व अन्य लोग व्यापारी के पास अपनी बचत जमा करा देते थे।