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निजी सुरक्षा गार्ड घोटाले में दो पर गाज
Updated Fri, 17 Nov 2017 02:30 AM IST
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निजी सुरक्षा गार्ड घोटाले में दो पर गाज
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में विवादों पर चल रही निजी सुरक्षा गार्ड कंपनी के घोटाले प्रकरण में एक नया मोड़ आया है। संस्थान ने इस मामले से जुडे़ होने पर दो सुरक्षा अधिकारियों पर गाज गिराते हुए निलंबित कर दिया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
संस्थान की सुरक्षा पिछले दो सालों से दिल्ली की ओरियॉन कंपनी कर रही थी। यहां कुछ समय पहले मामला उठा कि यहां 100 से अधिक संख्या में गार्डों की फर्जी सैलरी कंपनी ले रही है। इसकी जांच स्वयं संस्थान के एक चिकित्सक ने की और अपनी जांच रिपोर्ट अधिकारियों को भेज दी। इसके बाद निजी कंपनी ने संस्थान के अधिकारियों पर गंभीर आरोप जडे़। इसके बाद प्रशासन ने यह जांच डीन एकेडमिक अफेयर डॉ. रोहताश यादव को सौंप दी। उन्होंने मामले की जांच करने के बाद इसे स्टेट विजिलेंस को भेज दिया। पिछले कुछ समय से स्टेट विजिलेंस टीम आकर इसकी जांच कर रही थी। इसी बीच वीरवार को सूचना मिली कि संस्थान ने अपने दो अधिकारियों पर गाज गिराते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में किसी अधिकारी ने पुष्टि नहीं की है और संस्थान के पीआर विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. प्रशांत ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी घटनाक्रम की जानकारी नहीं है।
डॉक्टर लॉबी बचा रही डॉक्टर को
सुरक्षा गार्ड मामले में अब यह जांच चल रही है कि आखिर किसकी मिली भगत से संस्थान को लाखों रुपये का चूना लगाया गया। क्योंकि निजी कंपनी के गार्डों की संख्या की जांच करना संस्थान के अधिकारियों की जिम्मेदारी थी। जब मामला उजागर हुआ तो ही सारी पोल पट्टी खुली। इससे पहले किसी अधिकारी ने बगैर कर्मचारी के हाजिरी को अप्रूवल कैसे दी। यहां गार्डों में चर्चा है कि फिर सुरक्षा कर्मचारियों और उनके अधिकारियों पर ही निशाना साधा जा रहा है। जबकि इस मामले में जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में विवादों पर चल रही निजी सुरक्षा गार्ड कंपनी के घोटाले प्रकरण में एक नया मोड़ आया है। संस्थान ने इस मामले से जुडे़ होने पर दो सुरक्षा अधिकारियों पर गाज गिराते हुए निलंबित कर दिया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
संस्थान की सुरक्षा पिछले दो सालों से दिल्ली की ओरियॉन कंपनी कर रही थी। यहां कुछ समय पहले मामला उठा कि यहां 100 से अधिक संख्या में गार्डों की फर्जी सैलरी कंपनी ले रही है। इसकी जांच स्वयं संस्थान के एक चिकित्सक ने की और अपनी जांच रिपोर्ट अधिकारियों को भेज दी। इसके बाद निजी कंपनी ने संस्थान के अधिकारियों पर गंभीर आरोप जडे़। इसके बाद प्रशासन ने यह जांच डीन एकेडमिक अफेयर डॉ. रोहताश यादव को सौंप दी। उन्होंने मामले की जांच करने के बाद इसे स्टेट विजिलेंस को भेज दिया। पिछले कुछ समय से स्टेट विजिलेंस टीम आकर इसकी जांच कर रही थी। इसी बीच वीरवार को सूचना मिली कि संस्थान ने अपने दो अधिकारियों पर गाज गिराते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में किसी अधिकारी ने पुष्टि नहीं की है और संस्थान के पीआर विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. प्रशांत ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी घटनाक्रम की जानकारी नहीं है।
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डॉक्टर लॉबी बचा रही डॉक्टर को
सुरक्षा गार्ड मामले में अब यह जांच चल रही है कि आखिर किसकी मिली भगत से संस्थान को लाखों रुपये का चूना लगाया गया। क्योंकि निजी कंपनी के गार्डों की संख्या की जांच करना संस्थान के अधिकारियों की जिम्मेदारी थी। जब मामला उजागर हुआ तो ही सारी पोल पट्टी खुली। इससे पहले किसी अधिकारी ने बगैर कर्मचारी के हाजिरी को अप्रूवल कैसे दी। यहां गार्डों में चर्चा है कि फिर सुरक्षा कर्मचारियों और उनके अधिकारियों पर ही निशाना साधा जा रहा है। जबकि इस मामले में जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
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