क्राइम

Rohtak Bureau Updated Thu, 22 Feb 2018 03:00 AM IST
छेड़खानी के मामले में नाबालिग मुकरी, कोर्ट की टिप्पणी- इस तरह के मामलों में बर्बाद हो रहा समय, केस दर्ज
- शिकायतकर्ता नाबालिग ने महम थाने में दी थी एक वकील के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोनिका गोयल की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नाबालिग शिकायतकर्ता और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ केस दर्ज किया जाए। अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता नाबालिग लड़की और उसके रिश्तेदार बयानों से पलट गये। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह के शिकायतकर्ता और उनके रिश्तेदार अपनी कुछ इच्छाओं को पूरी करने के लिए पुलिस का टूल की तरह इस्तेमाल करते हैं। इस तरह के मामलों में कोर्ट का बहुत समय बर्बाद हो जाता है। जबकि उस समय को अन्य मुकदमों की सुनवाई में प्रयोग किया जा सकता है। आदेश में आगे कोर्ट ने कहा कि इस केस में नाबालिग शिकायत कर्ता ने मजिस्ट्रेट के सामने 164 के बयान दर्ज करवाए थे लेकिन ट्रायल के समय वह बयानों से पलट गई। इस कारण आरोपी बरी हो गया। ऐसा करके शिकायतकर्ता ने सरकारी कर्मचारी की अन्य महत्वपूर्ण ड्यूटी में बाधा पहुंचाई।
शिकायतकर्ता और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ एक क्रिमिनल केस आईपीसी की धारा 211 नुकसान पहुंचाने के आशय से झूठे आरोप लगाकर केस दर्ज करवाना, 193 झूठे सबूत पेश करना, 182 पुलिस को झूठी शिकायत देना और 186 सरकारी कर्मचारी के अन्य महत्वपूर्ण ड्यूटी में बाधा डालने का केस दर्ज किया जाए। जो मुकदमा नंबर 562 में अपने बयानों से मुकर गये। साथ ही अदालत ने आदेश दिये कि यदि जांच में सामने आये कि मुकदमे को खत्म करने को लेकर रुपयों का लेन देन हुआ तो एफआईआर में आईपीसी की धारा 389 को भी शामिल करने के आदेश दिये। यह धारा जब लगाई जाती है जब किसी व्यक्ति पर केस दर्ज करवाने का भय बनाकर उससे वसूली की जाती है।

ये था मामला
28 सितंबर 2017 को महम थाने में क्षेत्र के एक गांव निवासी नाबालिग लड़की ने एक वकील के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में नाबालिग का आरोप था कि वकील 27 सितंबर की रात को जबरन उसके घर में घुस गया। इसके बाद वकील ने नाबालिग के साथ छेड़खानी की। जब लड़की ने विरोध किया तो आरोपी उसे जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया। तब पुलिस ने वकील के खिलाफ पोक्सो एक्ट सहित छेड़छाड़, घर मेें घुसना और जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज किया था। तभी से यह मामला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोनिका गोयल की कोर्ट में विचाराधीन था। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता व उसके अन्य रिश्तेदारों ने बयान बदल दिये।

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