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दहेज हत्या में पति को उम्रकैद
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रोहतक। पति के लापता होने के सालभर बाद ही डोभ गांव की बेटी ने अपनी ससुराल आजादगढ़ में देवर जितेंद्र से पल्ला ओढ़ लिया। मायके से पैसे न लाने पर देवर से पति बने जितेंद्र ने उसे और खुद को गोली मार ली। पीजीआई में जितेंद्र की जान बच गई, लेकिन महिला की मौत हो गई। दहेज हत्या के मामले में अदालत ने जितेंद्र को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
मामले के अनुसार डोभ गांव निवासी अतर सिंह ने अक्तूबर 2017 में अर्बन एस्टेट थाने में शिकायत दी कि उसने बेटी प्रीति की शादी नवंबर 2010 में आजादगढ़ निवासी जसबीर के साथ की थी। जसबीर से प्रीति को एक लड़का हुआ। 2012 में जसबीर घर से लापता हो गया। 2013 में अतर सिंह ने प्रीति की शादी उसके देवर जितेंद्र उर्फ जयंडर के साथ पल्ला प्रथा से कर दी। जितेंद्र से प्रीति को दो लड़कियां हुईं। अतर सिंह का आरोप था कि जितेंद्र शराब पीने का आदी था। शराब पीकर उसकी बेटी के साथ मारपीट करता था। जितेंद्र कहता था कि अगर वह अपने मायके से पैसे नहीं लाई तो गोली मार दूंगा। अक्तूबर 2017 में वह मायके आई और पूरे मामले से अवगत कराया। तीन दिन बाद जितेंद्र घर आया। उसने प्रीति को समझा-बुझाकर उसके साथ भेज दिया। 29 अक्तूबर 2017 को उसे फोन पर सूचना मिली कि जितेंद्र ने प्रीति को गोली मारकर खुद को भी गोली मार ली। परिजनों ने दोनों को पीजीआई में दाखिल कराया, जहां प्रीति को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि जितेंद्र की जान बच गई। अर्बन एस्टेट थाने में जितेंद्र के खिलाफ हत्या, दहेज हत्या का मामला दर्ज किया गया। तभी से जिला अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी। शनिवार को अदालत ने जितेंद्र सिंह को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पिता बयान से मुकरा, फिर भी अदालत ने सुनाई सजा
सरकारी वकील ने बताया कि प्रीति के पिता अतर सिंह के बयान पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। साथ ही चालान पेश करते समय उसके कोर्ट में बयान दर्ज हुए। अतर सिंह ने वही बयान दिए, जो पुलिस को दिए थे। इसके बाद अदालत में बहस के दौरान उसने अपने बयान बदल दिए। कहा कि पूर्व में पुलिस के दबाव के चलते बयान दिए थे। अदालत ने फैसला सुनाते समय गवाह के पूर्व में दिए बयानों को अहम मानते हुए आरोपी को दोषी करार देकर सजा सुनाई।
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मामले के अनुसार डोभ गांव निवासी अतर सिंह ने अक्तूबर 2017 में अर्बन एस्टेट थाने में शिकायत दी कि उसने बेटी प्रीति की शादी नवंबर 2010 में आजादगढ़ निवासी जसबीर के साथ की थी। जसबीर से प्रीति को एक लड़का हुआ। 2012 में जसबीर घर से लापता हो गया। 2013 में अतर सिंह ने प्रीति की शादी उसके देवर जितेंद्र उर्फ जयंडर के साथ पल्ला प्रथा से कर दी। जितेंद्र से प्रीति को दो लड़कियां हुईं। अतर सिंह का आरोप था कि जितेंद्र शराब पीने का आदी था। शराब पीकर उसकी बेटी के साथ मारपीट करता था। जितेंद्र कहता था कि अगर वह अपने मायके से पैसे नहीं लाई तो गोली मार दूंगा। अक्तूबर 2017 में वह मायके आई और पूरे मामले से अवगत कराया। तीन दिन बाद जितेंद्र घर आया। उसने प्रीति को समझा-बुझाकर उसके साथ भेज दिया। 29 अक्तूबर 2017 को उसे फोन पर सूचना मिली कि जितेंद्र ने प्रीति को गोली मारकर खुद को भी गोली मार ली। परिजनों ने दोनों को पीजीआई में दाखिल कराया, जहां प्रीति को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि जितेंद्र की जान बच गई। अर्बन एस्टेट थाने में जितेंद्र के खिलाफ हत्या, दहेज हत्या का मामला दर्ज किया गया। तभी से जिला अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी। शनिवार को अदालत ने जितेंद्र सिंह को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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पिता बयान से मुकरा, फिर भी अदालत ने सुनाई सजा
सरकारी वकील ने बताया कि प्रीति के पिता अतर सिंह के बयान पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। साथ ही चालान पेश करते समय उसके कोर्ट में बयान दर्ज हुए। अतर सिंह ने वही बयान दिए, जो पुलिस को दिए थे। इसके बाद अदालत में बहस के दौरान उसने अपने बयान बदल दिए। कहा कि पूर्व में पुलिस के दबाव के चलते बयान दिए थे। अदालत ने फैसला सुनाते समय गवाह के पूर्व में दिए बयानों को अहम मानते हुए आरोपी को दोषी करार देकर सजा सुनाई।
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