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10 दिन में जल निकासी, अवैध टावरों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जिला परिषद चेयरमैन पार्षदों समेत धरना देंगे
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adc mahendrpal ko gyapan dete zp chairman satish bhalauth aur parshad
- फोटो : RohtakCity
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रोहतक। जलभराव, स्कूल के बाहर फीस, स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा की सूची चस्पा करने, अवैध मोबाइल टावरों पर कार्रवाई की बात कहने के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। अगर जिला प्रशासन की ओर से 10 दिनों में उनके प्रमुख मुद्दों का हल नहीं हुआ तो जिला परिषद कार्यालय में पार्षदों के साथ धरने दिया जाएगा। यह कहना है कि जिला परिषद चेयरमैन सतीश भालौठ का।
शुक्रवार को चेयरमैन भालौठ ने अपने कार्यालय में पार्षदों के साथ प्रमुख मुद्दों पर बातचीत की। इसके बाद एडीसी महेंद्रपाल को उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने कहा कि बार-बार समस्या बताने पर भी समाधान नहीं हो रहा है। ये जनहित के मुद्दे थे, जिन पर संबंधित विभागों का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। ज्ञापन में उन्होंने छह मुद्दों का जिक्र किया है। पहला मुद्दा बारिश और जलभराव से फसलें बर्बाद होने से संबंधित है। कई बार सिंचाई विभाग से कहा गया कि वे जगह चिह्नित करें जहां जलभराव होता है। पहले से ही वहां मोटर-पंप का इंतजाम करें ताकि बारिश का पानी समय पर निकाला जा सके लेकिन आज तक समाधान नहीं हुआ है। इसके अलावा पीएचसी, सीएचसी और पशु अस्पताल में उपलब्ध दवा की सूची और निजी स्कूलों में वसूली जा रही फीस व फंड की सूची मेन गेट पर चस्पा करने और सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद मेंबरों को व्हाट्सएप पर उपलब्ध करवाई जाए, लेकिन इस मसले पर भी कुछ नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में लगे सिर्फ 61 मोबाइल टावरों से 19 लाख रुपये फीस वसूल की गई है। बाकी 236 टावरों की फीस वसूलने का मुद्दा कई बार बैठकों में उठा पर अब तक कुछ नहीं किया गया। कोरोना से बचाव के संबंधित उपायुक्त व जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय को कई पत्र लिख कर पूछा गया कि कितनी कमेटी बनीं, कौन सदस्य हैं, कितनी मीटिंग हुई और क्या सामान खरीदा गया, लेकिन कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। विकास व पंचायत विभाग के निदेशक को कई पत्र लिख कर पीआरआई फंड में ब्याज के 24-25 लाख रुपये से विकास कार्य करवाने के बारे में मार्गदर्शन मांगा गया पर कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दस दिनों में इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो सभी पार्षद जिप कार्यालय में धरना देंगे।
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शुक्रवार को चेयरमैन भालौठ ने अपने कार्यालय में पार्षदों के साथ प्रमुख मुद्दों पर बातचीत की। इसके बाद एडीसी महेंद्रपाल को उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने कहा कि बार-बार समस्या बताने पर भी समाधान नहीं हो रहा है। ये जनहित के मुद्दे थे, जिन पर संबंधित विभागों का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। ज्ञापन में उन्होंने छह मुद्दों का जिक्र किया है। पहला मुद्दा बारिश और जलभराव से फसलें बर्बाद होने से संबंधित है। कई बार सिंचाई विभाग से कहा गया कि वे जगह चिह्नित करें जहां जलभराव होता है। पहले से ही वहां मोटर-पंप का इंतजाम करें ताकि बारिश का पानी समय पर निकाला जा सके लेकिन आज तक समाधान नहीं हुआ है। इसके अलावा पीएचसी, सीएचसी और पशु अस्पताल में उपलब्ध दवा की सूची और निजी स्कूलों में वसूली जा रही फीस व फंड की सूची मेन गेट पर चस्पा करने और सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद मेंबरों को व्हाट्सएप पर उपलब्ध करवाई जाए, लेकिन इस मसले पर भी कुछ नहीं हुआ।
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उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में लगे सिर्फ 61 मोबाइल टावरों से 19 लाख रुपये फीस वसूल की गई है। बाकी 236 टावरों की फीस वसूलने का मुद्दा कई बार बैठकों में उठा पर अब तक कुछ नहीं किया गया। कोरोना से बचाव के संबंधित उपायुक्त व जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय को कई पत्र लिख कर पूछा गया कि कितनी कमेटी बनीं, कौन सदस्य हैं, कितनी मीटिंग हुई और क्या सामान खरीदा गया, लेकिन कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। विकास व पंचायत विभाग के निदेशक को कई पत्र लिख कर पीआरआई फंड में ब्याज के 24-25 लाख रुपये से विकास कार्य करवाने के बारे में मार्गदर्शन मांगा गया पर कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दस दिनों में इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो सभी पार्षद जिप कार्यालय में धरना देंगे।
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