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Rohtak News: नपा के 1956 के रिकॉर्ड के आधार पर मिलेगा मुआवजा, एक से छह लाख तक का फायदा

Mon, 27 Feb 2023 01:44 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 27 Feb 2023 01:44 AM IST
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Compensation will be given on the basis of NAPA's 1956 record, benefit of one to six lakhs
माई सिटी रिपोर्टर
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रोहतक। एलिवेटेड ट्रैक के विस्थापितों को राहत मिली है। नगर निगम नगर पालिका के 1956 के रिकॉर्ड के आधार पर ही मुआवजा देगा। रविवार को छुट्टी के दिन एसडीएम कार्यालय में हुई बैठक में विस्थापितों और प्रशासन के बीच सहमति बनी। बैठक में विस्थापितों के अलावा व्यापारी नेता व एलिवेडेट प्रोजेक्ट स्पेशल ऑफिसर भी मौजूद रहे।
शहर के बीचों-बीच रोहतक-पानीपत रेललाइन पर बने एलिवेटेड ट्रैक को बिछाने के लिए 2018 में 32 दुकान व मकान तोड़े गए थे। अब सड़क निर्माण के लिए 25 और दुकानें तोड़ी जानी हैं। सहमति बनाने के लिए नगर निगम प्रशासन की तरफ से दुकानदारों को नोटिस दिया था। नोटिस में साफ किया था कि दुकानदारों को उसी जमीन का मुआवजा मिलेगा, जो रेलवे ने छोड़ी है। इससे दुकानदारों की जमीन एक से छह गज तक रजिस्ट्री के बावजूद कम हो गई थी। परेशान दुकानदार एक दिन पहले पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर से मिले। साथ में व्यापारी नेता राजेश उर्फ टीनू लुंबा भी रहे। ग्रोवर ने प्रशासन के अधिकारियों से बात की और रास्ता निकालने की हिदायत दी।
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एसडीएम को सौंपी 1956 की नगर पालिका द्वारा दी गई रसीद
बैठक सुबह करीब 11 बजे एसडीएम कार्यालय में शुरू हुई। विस्थापित दुकानदारों के अलावा प्रोजेक्ट ऑफिसर प्रदीप रंजन भी मौजूद रहे। डेढ़ से दो घंटे तक चली बैठक में तीन विस्थापित व्यापारियों ने रजिस्ट्री के साथ-साथ नगर पालिका द्वारा 1956 में दी गई रसीद भी सौंपी। एसडीएम ने नगर निगम के एलओ संदीप बत्रा से उस समय का रिकॉर्ड मांगा, लेकिन निगम के पास उस समय का रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। ऐसे में सहमति बनी कि दुकानदारों की रजिस्ट्री में जितनी जमीन है उसका मुआवजा दिया जाए।
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ये हैं मुआवजे की दरें
रेलवे रोड के विस्थापित दुकानदारों और मकान मालिकों की संख्या 57 है। जो दुकानदार जमीन के बदले पॉवर हाउस चौक के नजदीक जमीन लेगा, उसे एक लाख रुपये रुपये प्रति गज राशि मिलेगी। जो दुकानदार मुआवजा लेगा, उसे डेढ़ लाख रुपये प्रति गज के हिसाब से मुआवजा मिलेगा। साथ ही दुकानदारों को पावर हाउस चौक पर दो लाख 40 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से जमीन मिलेगी।

दुकानदारों को तत्कालीन नगर पालिका की तरफ से 15.5 गज की दुकानें अलॉट की थी। इसकी रसीद दुकानदारों ने दी है, जबकि निगम उस समय का रिकॉर्ड नहीं दे सका। रेलवे ने अपनी एक से छह गज तक जमीन अपनी मानी थी। अब तय हुआ कि विस्थापितों को 1956 के रिकॉर्ड के हिसाब से ही मुआवजा मिलेगा।

राकेश कुमार, एसडीएम रोहतक

गठित कमेटी की अनदेखी कर रहा प्रशासन
नगर निगम की तरफ से विस्थापितों को मुआवजे के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसमें मेयर मनमोहन गोयल, महिला पार्षद मुक्ता नागपाल, कंचन खुराना व राधेश्याम ढल को शामिल किया गया था। इसके बावजूद मीटिंग में मेयर व पार्षदों को नहीं बुलाया गया।
अशोक खुराना, पूर्व पार्षद नगर निगम
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