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रेलवे कैशियर की अपील पर कोर्ट के आदेशों पर रिटायर्ड एसआई समेत तीन पर धोखाधड़ी समेत 9 बड़ी धाराओं में केस दर्ज
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रोहतक। गांव बलियाणा निवासी रेलवे कैशियर ने पुलिस जांच से असंतुष्ट होकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पीड़ित की अपील पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए तत्कालीन जांच अधिकारी रिटायर्ड एसआई समेत तीन पर कड़ा संज्ञान लिया है। करीब 5 साल पहले जमीन को लेकर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के मामले में कोर्ट ने रिटायर्ड एसआई समेत तीन के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। जिसके बाद आईएमटी थाना पुलिस ने धोखाधड़ी, षड्यंत्र रचने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
कोर्ट में डाली अपील के मुताबिक गांव बलियाणा निवासी राजपाल रेलवे में कैशियर के पद पर कार्यरत है। राजपाल की तरफ से करीब एक माह पहले जेएमआइसी विक्रांत की कोर्ट में अपील दायर की गई थी। इसमें बताया कि वर्ष 1986 में उसके परदादा ने पैतृक मकान उसके नाम पर कर दिया था। जिसमें राजपाल और उसका परिवार तभी से रह रहा है। इसके बाद वर्ष 2007 में राजपाल के पिता भीम सिंह ने राजपाल के हक में एक प्लाट को लेकर शपथ पत्र दिया, जिसके बाद प्लाट पर राजपाल का कब्जा हो गया। कुछ साल बाद राजपाल और उसके पिता भीम सिंह के बीच विवाद हो गया। तब भीम सिंह ने उस प्लाट को अपने दूसरे बेटे कृष्ण के नाम कराना चाहा। तब तक राजपाल ने उसकी रजिस्ट्री अपनी पत्नी निर्मला के नाम करा दी थी। ऐसे में राजपाल और उसकी पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य कई धाराओं में केस दर्ज करा दिया गया था। आर्थिक अपराध शाखा में एसआई रामकरण को मामले की जांच सौंपी गई। जांच के दौरान राजपाल ने अपने सभी दस्तावेज पेश किए, लेकिन जांच अधिकारी ने उन दस्तावेजों को संज्ञान में नहीं लिया। एसआई ने भीम सिंह और कृष्ण के साथ मिलकर गलत दस्तावेज लगाकर राजपाल को ही आरोपी ठहरा दिया। जिसके बाद राजपाल ने मामले की जांच के लिए आईजी को शिकायत दी। इस पर डीएसपी रमेश कुमार ने मामले की जांच की। जांच के दौरान भीम सिंह से भी पूछताछ की गई। जिसमें भीम सिंह ने स्वीकार कर लिया कि उसने 2007 में राजपाल के हक में प्लाट का शपथ पत्र दिया था। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हो गया कि जांच अधिकारी ने भीम सिंह और कृष्ण के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है। इस बीच राजपाल ने अग्रिम जमानत ले ली। अब रिटायर्ड एसआई समेत तीन पर दर्ज हुए मामले की जांच एएसआई रैंक जांच अधिकारी के पास है।
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कोर्ट में डाली अपील के मुताबिक गांव बलियाणा निवासी राजपाल रेलवे में कैशियर के पद पर कार्यरत है। राजपाल की तरफ से करीब एक माह पहले जेएमआइसी विक्रांत की कोर्ट में अपील दायर की गई थी। इसमें बताया कि वर्ष 1986 में उसके परदादा ने पैतृक मकान उसके नाम पर कर दिया था। जिसमें राजपाल और उसका परिवार तभी से रह रहा है। इसके बाद वर्ष 2007 में राजपाल के पिता भीम सिंह ने राजपाल के हक में एक प्लाट को लेकर शपथ पत्र दिया, जिसके बाद प्लाट पर राजपाल का कब्जा हो गया। कुछ साल बाद राजपाल और उसके पिता भीम सिंह के बीच विवाद हो गया। तब भीम सिंह ने उस प्लाट को अपने दूसरे बेटे कृष्ण के नाम कराना चाहा। तब तक राजपाल ने उसकी रजिस्ट्री अपनी पत्नी निर्मला के नाम करा दी थी। ऐसे में राजपाल और उसकी पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य कई धाराओं में केस दर्ज करा दिया गया था। आर्थिक अपराध शाखा में एसआई रामकरण को मामले की जांच सौंपी गई। जांच के दौरान राजपाल ने अपने सभी दस्तावेज पेश किए, लेकिन जांच अधिकारी ने उन दस्तावेजों को संज्ञान में नहीं लिया। एसआई ने भीम सिंह और कृष्ण के साथ मिलकर गलत दस्तावेज लगाकर राजपाल को ही आरोपी ठहरा दिया। जिसके बाद राजपाल ने मामले की जांच के लिए आईजी को शिकायत दी। इस पर डीएसपी रमेश कुमार ने मामले की जांच की। जांच के दौरान भीम सिंह से भी पूछताछ की गई। जिसमें भीम सिंह ने स्वीकार कर लिया कि उसने 2007 में राजपाल के हक में प्लाट का शपथ पत्र दिया था। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हो गया कि जांच अधिकारी ने भीम सिंह और कृष्ण के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है। इस बीच राजपाल ने अग्रिम जमानत ले ली। अब रिटायर्ड एसआई समेत तीन पर दर्ज हुए मामले की जांच एएसआई रैंक जांच अधिकारी के पास है।
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