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Rohtak News: पत्रकारिता से समाज में रोशनी लाने का आह्वान
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रोहतक। पत्रकारिता का भविष्य विजुअल स्टोरी टेलिंग का है। मोबाइल पत्रकारिता, वीडियो पत्रकारिता, यू ट्यूब आधारित वैकल्पिक पत्रकारिता का स्पेस भविष्य में बढ़ेगा। पत्रकारिता के मूल सरोकार वहीं रहेंगे। पत्रकारिता से समाज में रोशनी लाने का कार्य करें , आग लगाने का नहीं। विद्यार्थियों को भविष्य की स्थिति का आंकलन करते हुए पत्रकारिता कॅरिअर के लिए खुद को तैयार करना होगा। यह गुरुमंत्र लेखक निधीश त्यागी ने सोमवार को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में जनसंचार विभाग में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से फ्यूचर ऑफ जर्नलिज्म विषय पर शुरू हुई दो दिवसीय कार्यशाला में दिया।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का समावेशी होना, सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक राजनीतिक विविधता को समझना, सत्य-तथ्य आधारित होना, सूचनाओं के संज्ञान से असली खबर निकालना, सतह के तले की हकीकत को सामने लाना, पूर्वाग्रह व दुराग्रह मुक्त होकर बात रखना हमेशा जरूरी रहेगा। पत्रकारिता घृणा फैलाने का माध्यम नहीं होना चाहिए।
भविष्य के लिए स्वयं को तैयार करने के लिए मीडिया के विद्यार्थियों को पाठक व दर्शक मानसिकता, बदलते रुझान, सामाजिक मनोविज्ञान को समझने की जरूरत है। विद्यार्थियों को प्रोद्याेगिकी-संपन्न भी भविष्य की कॅरिअर यात्रा के लिए बनना होगा। कार्यक्रम में उन्होंने शोधार्थियों, विद्यार्थियों व एलुमनाई के प्रश्नों के उत्तर दिए व पत्रकारिता का भविष्य एवं भविष्य की पत्रकारिता का खाका खींचा।
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विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत में पत्रकारिता का इतिहास गौरवशाली रहा है। पत्रकारिता बतौर मिशन स्वतंत्रता आंदोलन के साथ जुड़ी रही। भविष्य में लोकतांत्रिक व संवैधानिक मूल्यों के लिए आवाज उठाने का कार्य पत्रकारिता को करना होगा।
सहायक प्रोफेसर सुनित मुखर्जी ने कार्यक्रम संचालन-समन्वयन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-समाज के बुनियादी सवालों, गंभीर विषयों से पत्रकारिता को एंगेज होना होगा। लोकतंत्र का अस्तित्व पत्रकारिता की प्रभावी भूमिका पर भी केंद्रित रहेगा। मीडिया विद्यार्थियों से क्रिटीकल थिकिंग कौशल विकसित करने की बात उन्होंने कही। मंगलवार को कार्यशाला में सृजनात्मकता, लेखन कौशल, पत्रकारिता चिंतन व सरोकार, पत्रकारीय कंटेट क्रिएशन पर मंथन होगा।
इस दौरान विभाग के शोधार्थी जगरूप सिंह, अजय कुमार, कुलदीप, प्रिया, महिमा, आशु, साएमा, साहिल, पवन मल्होत्रा समेत विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का समावेशी होना, सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक राजनीतिक विविधता को समझना, सत्य-तथ्य आधारित होना, सूचनाओं के संज्ञान से असली खबर निकालना, सतह के तले की हकीकत को सामने लाना, पूर्वाग्रह व दुराग्रह मुक्त होकर बात रखना हमेशा जरूरी रहेगा। पत्रकारिता घृणा फैलाने का माध्यम नहीं होना चाहिए।
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भविष्य के लिए स्वयं को तैयार करने के लिए मीडिया के विद्यार्थियों को पाठक व दर्शक मानसिकता, बदलते रुझान, सामाजिक मनोविज्ञान को समझने की जरूरत है। विद्यार्थियों को प्रोद्याेगिकी-संपन्न भी भविष्य की कॅरिअर यात्रा के लिए बनना होगा। कार्यक्रम में उन्होंने शोधार्थियों, विद्यार्थियों व एलुमनाई के प्रश्नों के उत्तर दिए व पत्रकारिता का भविष्य एवं भविष्य की पत्रकारिता का खाका खींचा।
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विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत में पत्रकारिता का इतिहास गौरवशाली रहा है। पत्रकारिता बतौर मिशन स्वतंत्रता आंदोलन के साथ जुड़ी रही। भविष्य में लोकतांत्रिक व संवैधानिक मूल्यों के लिए आवाज उठाने का कार्य पत्रकारिता को करना होगा।
सहायक प्रोफेसर सुनित मुखर्जी ने कार्यक्रम संचालन-समन्वयन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-समाज के बुनियादी सवालों, गंभीर विषयों से पत्रकारिता को एंगेज होना होगा। लोकतंत्र का अस्तित्व पत्रकारिता की प्रभावी भूमिका पर भी केंद्रित रहेगा। मीडिया विद्यार्थियों से क्रिटीकल थिकिंग कौशल विकसित करने की बात उन्होंने कही। मंगलवार को कार्यशाला में सृजनात्मकता, लेखन कौशल, पत्रकारिता चिंतन व सरोकार, पत्रकारीय कंटेट क्रिएशन पर मंथन होगा।
इस दौरान विभाग के शोधार्थी जगरूप सिंह, अजय कुमार, कुलदीप, प्रिया, महिमा, आशु, साएमा, साहिल, पवन मल्होत्रा समेत विद्यार्थी उपस्थित रहे।