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Rohtak News: गैस किल्लत गहराई तो चूल्हे पर खाना बना जरूरतमंदों तक पहुंचाया
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10-पीजीआई में जन सेवा संस्थान की ओर से मरीजों व तीमारदारों को निशुल्क भोजन वितरित करते सेवादार।
- फोटो : samvad
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। गैस किल्लत के बीच जन सेवा संस्थान व सती भाई साईं दास सेवा दल चूल्हे पर लकड़़ी जलाकर पीजीआई में जरूरतमंदों को निशुल्क भोजन वितरित कर रहा है। यही नहीं, बंदर, कुत्ते व गाय माता को भी रोटी मुहैया कराई जा रही है। रोटियां कम बनने पर भीगे हुए चनों से यह कमी पूरी की गई।
पीजीआई में सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर व माइक्रोबायोलॉजी लैब के पास जन सेवा संस्थान व सती भाई साईं दास सेवा दल रोजाना दोपहर जरूरतमंदों के लिए निशुल्क भंडारा लगाता है। इसमें दाल, चावल, सब्जी, रोटी शामिल होती हैं। रोजाना इन संस्थाओं के वाहन भोजन लेकर कैंपस में पहुंचते हैं और वितरण कर लौट आते हैं।
गैस नहीं होने से तवे पर सेंकनी पड़ रहीं रोटियां
भोजन देने का काम शुक्रवार को और दिनों के बजाया मुश्किल भरा रहा। मशीन से बनने वाली रोटियां भी तवे पर सेंकनी पड़ीं। इस कारण रोटियां कम बनीं। यह कमी चावल व भीगे चनों की मदद से दूर की गई। भीगे चने बंदरों को खिलाए गए। इससे गाय व कुत्तों भी रोटी मिल पाई।
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संस्था को रोजाना तीन से चार सिलिंडरों की जरूरत
संस्था रोजाना 200 किलो आटे की रोटियां भंडारे के लिए बनाती है। बंदरों, कुत्तों व गो माता के लिए 130 किलो आटे की रोटियां अलग बनती हैं। शुक्रवार को केवल 70 किलो आटे की ही रोटियां बन पाईं। खाना बनाने के लिए संस्था को रोजाना तीन से चार सिलिंडरों की जरूरत होती है। संस्था एक हजार लोगों को रोजाना निशुल्क भोजन कराती है। इसके अलावा 500 लोगों को दस रुपये में भरपेट भोजन की सुविधा भी मुहैया कराती है। -नरेश आनंद, प्रधान, सती भाई साईं दास सेवा दल।
संस्था जरूरतमंदों को निशुल्क भोजन मुहैया कराती है। यह प्रयास जारी रहेगा। इसीलिए चूल्हे में लकड़ी जला खाना बनाया है। हालांकि यह थोड़ा असुविधाजनक है मगर 4500 लोग रोजाना पेट भरने के लिए अन्न मिलने की आस रखते हैं। इनके लिए हर गैस मिल जाए तो बेहतर हो। संस्था में हर माह 300 गैस सिलिंडरों की जरूरत होती है। फिलहाल एक सिलिंडर नहीं मिल रहा है। -डॉ. परमानंद स्वामी, संस्थापक, जन सेवा संस्थान।
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रोहतक। गैस किल्लत के बीच जन सेवा संस्थान व सती भाई साईं दास सेवा दल चूल्हे पर लकड़़ी जलाकर पीजीआई में जरूरतमंदों को निशुल्क भोजन वितरित कर रहा है। यही नहीं, बंदर, कुत्ते व गाय माता को भी रोटी मुहैया कराई जा रही है। रोटियां कम बनने पर भीगे हुए चनों से यह कमी पूरी की गई।
पीजीआई में सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर व माइक्रोबायोलॉजी लैब के पास जन सेवा संस्थान व सती भाई साईं दास सेवा दल रोजाना दोपहर जरूरतमंदों के लिए निशुल्क भंडारा लगाता है। इसमें दाल, चावल, सब्जी, रोटी शामिल होती हैं। रोजाना इन संस्थाओं के वाहन भोजन लेकर कैंपस में पहुंचते हैं और वितरण कर लौट आते हैं।
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गैस नहीं होने से तवे पर सेंकनी पड़ रहीं रोटियां
भोजन देने का काम शुक्रवार को और दिनों के बजाया मुश्किल भरा रहा। मशीन से बनने वाली रोटियां भी तवे पर सेंकनी पड़ीं। इस कारण रोटियां कम बनीं। यह कमी चावल व भीगे चनों की मदद से दूर की गई। भीगे चने बंदरों को खिलाए गए। इससे गाय व कुत्तों भी रोटी मिल पाई।
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संस्था को रोजाना तीन से चार सिलिंडरों की जरूरत
संस्था रोजाना 200 किलो आटे की रोटियां भंडारे के लिए बनाती है। बंदरों, कुत्तों व गो माता के लिए 130 किलो आटे की रोटियां अलग बनती हैं। शुक्रवार को केवल 70 किलो आटे की ही रोटियां बन पाईं। खाना बनाने के लिए संस्था को रोजाना तीन से चार सिलिंडरों की जरूरत होती है। संस्था एक हजार लोगों को रोजाना निशुल्क भोजन कराती है। इसके अलावा 500 लोगों को दस रुपये में भरपेट भोजन की सुविधा भी मुहैया कराती है। -नरेश आनंद, प्रधान, सती भाई साईं दास सेवा दल।
संस्था जरूरतमंदों को निशुल्क भोजन मुहैया कराती है। यह प्रयास जारी रहेगा। इसीलिए चूल्हे में लकड़ी जला खाना बनाया है। हालांकि यह थोड़ा असुविधाजनक है मगर 4500 लोग रोजाना पेट भरने के लिए अन्न मिलने की आस रखते हैं। इनके लिए हर गैस मिल जाए तो बेहतर हो। संस्था में हर माह 300 गैस सिलिंडरों की जरूरत होती है। फिलहाल एक सिलिंडर नहीं मिल रहा है। -डॉ. परमानंद स्वामी, संस्थापक, जन सेवा संस्थान।

10-पीजीआई में जन सेवा संस्थान की ओर से मरीजों व तीमारदारों को निशुल्क भोजन वितरित करते सेवादार।- फोटो : samvad