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Rohtak News: त्वचा पर स्वेट ग्लैंड कम होने से पशुओं को लू का खतरा अधिक

Sat, 27 Jun 2026 01:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Sat, 27 Jun 2026 01:55 AM IST
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Animals face a higher risk of heatstroke due to having fewer sweat glands on their skin.
17-डॉ. संजीव कुमार वर्मा,वेटरनरी सर्जन - फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। जिले में जून की झुलसाने वाली गर्मी से जानवर भी बेहाल हैं। इंसानों की अपेक्षा गर्मी से पशु ज्यादा प्रभावित होते हैं।पशुओं में इंसानों की अपेक्षा स्वेट ग्लैंड कम होने के कारण पशुओं को लू लगने का खतरा अधिक रता है।
चार पांवों पर चलने के कारण पशुओं के शरीर में ज्यादा गर्मी चली जाती है। पशु अस्पताल किलोई में कार्यरत वेटरनरी सर्जन डॉ. संजीव कुमार वर्मा ने बताया कि रोजाना लू से प्रभावित एक से दो केस आ रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने इसको लेकर एडवाइजरी जारी की है।
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40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में पशुओं को लू का खतरा अधिक रहता है। लू लगने पर पशुओं के शरीर का तापमान 106 फारेनहाइट तक चला जाता है। सामान्य तापमान 100 से 102 के बीच में रहता है। लू लगने पर पशुओं की फ्लुइड थेरेपी शुरू की जाती है। इसमें पशु को विटामिन सी युक्त सप्लीमेंट दिया जाता है। इसके अलावा, पशुओं को नहलाने की कोशिश की जाती है।
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स्वेट ग्लैंड कम होने से निकलता है कम पसीना
डॉ. संजीव ने बताया कि पशुओं को इंसानों के मुकाबले पशुओं में कम पसीना निकलता है। इस कारण पशुओं में इंसानों की अपेक्षा स्वेट ग्लैंड कम होना है इसलिए पशुओं को दिन में नहलाने या तालाब में लेकर जाने की सलाह दी जाती है।

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ये हैं लक्षण
पशुओं का हांफना, तेज सांस चलना, लार टपकाना, मुंह खोलकर छोटे-छोटे सांस लेना। सुस्ती या कमजोरी दिखना। चारा कम खाना व पानी कम पीना।
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ये बरतें सावधानियां...
पशुओं को छाया वाले स्थान पर रखें। पशु आवास में पंखे या फॉगर का उपयोग करें। दिन में तीन से चार बार पानी पिलाएं। सीधी धूप में न बांधें। दिन में एक बार जरूर नहलाएं। पानी पिलाने का बर्तन धातु या प्लास्टिक के बजाय मिट्टी का रखें।
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