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अमृत-2 योजना : 50.98 करोड़ की लागत से बढ़ेगी 40 एमएलडी एसटीपी की क्षमता
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रोहतक। जनस्वास्थ्य विभाग अमृत-2 प्रोजेक्ट के तहत 50.98 करोड़ रुपये की लागत से 40 एमएलडी के एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) को 60 एमएलडी में बदला जाएगा। इसका एस्टीमेट तैयार कर मुख्यालय अप्रूवल के लिए भेज दिया गया है। वहीं निगम के तहत आने वाले नौ गांव बोहर, बलियाणा, खेड़ी साद, पहरावर, कन्हैली, सुनारिया कलां व खुर्द, अस्थल बोहर व कुताना बस्ती में खराब सीवर लाइन को बदलने व नई लाइन डालने का 77 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार कर लिया गया है। इसे भी जल्द मुख्यालय भेजा जाएगा। इन दोनों प्रोजेक्ट पर 128 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
अपफ्लो एनारोबिक कीचड़ कंबल (यूएएसबी) तकनीक से चलने वाला 40 एमएलडी एसटीपी एनजीटी के नियमों को पूरा नहीं कर रहा है। क्योंकि एसटीपी पर गोबर की मात्रा ज्यादा आने के कारण बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड की मात्रा 30 एमएल ली जाती है और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड की मात्रा 50 एमएल तक ली जाती है जबकि एनजीटी के आदेश के बाद यह मात्रा 30 की जगह 10 और 50 की जगह 30 एमएल होनी चाहिए। इसी के चलते इसकी डीपीआर तैयार कर मुख्यालय भेजी गई है। नई डीपीआर में 40 एमएलडी एसटीपी को 60 एमएलडी तक बढ़ाया जाएगा और इसे नई तकनीक बायोलॉजिकल न्यूट्रेट रिमूवल ट्रीटमेंट के तहत चलाया जाएगा। इसके तहत ट्रीटमेंट होने वाले पानी को सिंचाई में भी प्रयोग किया जा सकता है। 60 एमएलडी होने के बाद शहर की ढाई लाख से ज्यादा की आबादी को इसका फायदा मिलेगा। जल्द अप्रूवल पर इसके अपग्रेडेशन का काम शुरू होगा। (संवाद)
निगम के तहत आने वाले नौ गांवों में बिछेगी सीवर लाइन
बोहर, बलियाणा, खेड़ी साद, पहरावर, कन्हैली, सुनारिया कलां व खुर्द, अस्थल बोहर व कुताना बस्ती में खराब सीवर लाइन को बदलने के साथ साथ नई सीवर लाइन डालने का काम भी किया जाएगा। इससे 50 हजार से ज्यादा की आबादी को नाली समेत ओवरफ्लो हो रहे नालों से छुटकारा मिलेगा। क्योंकि ज्यादातर गांव में नालियां ओवरफ्लो होने के कारण ग्रामीण समाधान के लिए विभाग के चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन जल्द अप्रूवल मिलने पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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वर्जन
अभी सिर्फ 40 एमएलडी एसटीपी का एस्टीमेट मुख्यालय भेजा गया है। सीवर लाइन वाला एस्टीमेट अभी तैयार करना बाकी है। जल्द ही इसे भी मुख्यालय भेजा जाएगा। नई तकनीक बायोलॉजिकल न्यूट्रेट रिमूवल ट्रीटमेंट के तहत इसे चलाया जाएगा।
- आरके शर्मा, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य व अभियांत्रिकी विभाग।
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अपफ्लो एनारोबिक कीचड़ कंबल (यूएएसबी) तकनीक से चलने वाला 40 एमएलडी एसटीपी एनजीटी के नियमों को पूरा नहीं कर रहा है। क्योंकि एसटीपी पर गोबर की मात्रा ज्यादा आने के कारण बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड की मात्रा 30 एमएल ली जाती है और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड की मात्रा 50 एमएल तक ली जाती है जबकि एनजीटी के आदेश के बाद यह मात्रा 30 की जगह 10 और 50 की जगह 30 एमएल होनी चाहिए। इसी के चलते इसकी डीपीआर तैयार कर मुख्यालय भेजी गई है। नई डीपीआर में 40 एमएलडी एसटीपी को 60 एमएलडी तक बढ़ाया जाएगा और इसे नई तकनीक बायोलॉजिकल न्यूट्रेट रिमूवल ट्रीटमेंट के तहत चलाया जाएगा। इसके तहत ट्रीटमेंट होने वाले पानी को सिंचाई में भी प्रयोग किया जा सकता है। 60 एमएलडी होने के बाद शहर की ढाई लाख से ज्यादा की आबादी को इसका फायदा मिलेगा। जल्द अप्रूवल पर इसके अपग्रेडेशन का काम शुरू होगा। (संवाद)
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निगम के तहत आने वाले नौ गांवों में बिछेगी सीवर लाइन
बोहर, बलियाणा, खेड़ी साद, पहरावर, कन्हैली, सुनारिया कलां व खुर्द, अस्थल बोहर व कुताना बस्ती में खराब सीवर लाइन को बदलने के साथ साथ नई सीवर लाइन डालने का काम भी किया जाएगा। इससे 50 हजार से ज्यादा की आबादी को नाली समेत ओवरफ्लो हो रहे नालों से छुटकारा मिलेगा। क्योंकि ज्यादातर गांव में नालियां ओवरफ्लो होने के कारण ग्रामीण समाधान के लिए विभाग के चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन जल्द अप्रूवल मिलने पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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वर्जन
अभी सिर्फ 40 एमएलडी एसटीपी का एस्टीमेट मुख्यालय भेजा गया है। सीवर लाइन वाला एस्टीमेट अभी तैयार करना बाकी है। जल्द ही इसे भी मुख्यालय भेजा जाएगा। नई तकनीक बायोलॉजिकल न्यूट्रेट रिमूवल ट्रीटमेंट के तहत इसे चलाया जाएगा।
- आरके शर्मा, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य व अभियांत्रिकी विभाग।