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जैविक खेती की अलख जगा रहा खरक जाटान का जयकरण
Updated Mon, 26 Jun 2017 07:39 PM IST
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जैविक खेती की अलख जगा रहा खरक जाटान का जयकरण
- अगली पीढ़ी के स्वस्थ भविष्य को लेकर पांच साल पहले बदली विचारधारा
- जैविक खेती के प्रति जागरूकता के लिए किसानों को देता है प्रशिक्षण
- कुछ माह पहले हिसार में मिल चुका है प्रगतिशील किसान का अवार्ड
विनीत तोमर
रोहतक।
फसलों में अंधाधुंध रासायनिक खाद के प्रयोग के बीच एक किसान ऐसा भी है जो जैविक खाद से बेहतरीन उत्पादन ले रहा है। खरक जाटान गांव के किसान जयकरण ने खुद की सोच बदली तो वह साथी किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया। आज वह अन्य किसानों को जैविक खेती के गुर भी सिखा रहे हैं। वार्मी कंपोस्ट का उत्पादन कर खेती में अतिरिक्त कमाई भी कर रहे हैं।
दरअसल, पांच साल पहले तक जयकरण भी दूसरे किसानों की तरह फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग करता था। बकौल जयकरण एक दिन उसके मन में आया कि रासायनिक खाद का प्रयोग कर हम खुद के साथ-साथ अपने बच्चों को भी जहर खिला रहे हैं। आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पांच साल पहले उसने रासायनिक खाद का प्रयोग बंद कर दिया और एक एकड़ जमीन के लिए केंचुए से खाद तैयार करने की सोची। शुरुआत में इसकी एक यूनिट लगाई। इसमें लाभ मिलता देख दूसरी यूनिट भी तैयार कर दी। अब स्थिति यह है कि जयकरण को एक एकड़ में करीब दो लाख की पैदावार मिल रही है, जबकि पहले एक से सवा लाख के बीच आय होती थी। इसमें यूरिया और डीएपी समेत अन्य खादों का खर्चा भी बचा। कम खर्च में अच्छी पैदावार होने के बाद अब जयकरण दूसरे किसानों को भी जागरूक कर रहा है। इसी वर्ष मार्च माह में वार्मिंग कंपोस्ट के क्षेत्र में योगदान के लिए जयकरण को प्रगतिशील किसान का अवार्ड भी मिल चुका है।
जैविक खेती करिए और खुद तय कीजिए फसल का दाम
जयकरण का कहना है कि रासायनिक खाद के मुकाबले जैविक खाद से तैयार हुई फसल का दाम भी अधिक रहता है। एक एकड़ में गेहूं, धान और आलू आदि की फसल बोई थी। फसल की पैदावार के बाद जिला बागवानी अधिकारी से उसका परीक्षण कराया गया। जिला बागवानी अधिकारी ने भी उसे पास कर दिया। इसके बाद गेहूं की पैदावार के प्रति कुंतल एक हजार से 1500 रुपये तक ज्यादा मिले।
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खुद तैयार करते हैं वार्मिंग कंपोस्ट और देते हैं किसानों को
खास बात यह है कि जयकरण केंचुआ से वार्मिंग कंपोस्ट तैयार करते हैं और लोगों को देते हैं। जयकरण का कहना है कि जब तक किसान इसका प्रयोग नहीं करेंगे वह रासायनिक खाद से दूर नहीं होंगे। फिलहाल वह सीआर पॉलिटेक्निक की तरफ किसानों को अपने घर पर ही तीन-तीन माह का प्रशिक्षण देते हैं। इसमें किसानों को बताया जाता है कि जैविक खेती का क्या फायदा है और उसे कैसे तैयार किया जाए?
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जैविक खेती की अलख जगा रहा खरक जाटान का जयकरण
- अगली पीढ़ी के स्वस्थ भविष्य को लेकर पांच साल पहले बदली विचारधारा
- जैविक खेती के प्रति जागरूकता के लिए किसानों को देता है प्रशिक्षण
- कुछ माह पहले हिसार में मिल चुका है प्रगतिशील किसान का अवार्ड
विनीत तोमर
रोहतक।
फसलों में अंधाधुंध रासायनिक खाद के प्रयोग के बीच एक किसान ऐसा भी है जो जैविक खाद से बेहतरीन उत्पादन ले रहा है। खरक जाटान गांव के किसान जयकरण ने खुद की सोच बदली तो वह साथी किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया। आज वह अन्य किसानों को जैविक खेती के गुर भी सिखा रहे हैं। वार्मी कंपोस्ट का उत्पादन कर खेती में अतिरिक्त कमाई भी कर रहे हैं।
दरअसल, पांच साल पहले तक जयकरण भी दूसरे किसानों की तरह फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग करता था। बकौल जयकरण एक दिन उसके मन में आया कि रासायनिक खाद का प्रयोग कर हम खुद के साथ-साथ अपने बच्चों को भी जहर खिला रहे हैं। आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पांच साल पहले उसने रासायनिक खाद का प्रयोग बंद कर दिया और एक एकड़ जमीन के लिए केंचुए से खाद तैयार करने की सोची। शुरुआत में इसकी एक यूनिट लगाई। इसमें लाभ मिलता देख दूसरी यूनिट भी तैयार कर दी। अब स्थिति यह है कि जयकरण को एक एकड़ में करीब दो लाख की पैदावार मिल रही है, जबकि पहले एक से सवा लाख के बीच आय होती थी। इसमें यूरिया और डीएपी समेत अन्य खादों का खर्चा भी बचा। कम खर्च में अच्छी पैदावार होने के बाद अब जयकरण दूसरे किसानों को भी जागरूक कर रहा है। इसी वर्ष मार्च माह में वार्मिंग कंपोस्ट के क्षेत्र में योगदान के लिए जयकरण को प्रगतिशील किसान का अवार्ड भी मिल चुका है।
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जैविक खेती करिए और खुद तय कीजिए फसल का दाम
जयकरण का कहना है कि रासायनिक खाद के मुकाबले जैविक खाद से तैयार हुई फसल का दाम भी अधिक रहता है। एक एकड़ में गेहूं, धान और आलू आदि की फसल बोई थी। फसल की पैदावार के बाद जिला बागवानी अधिकारी से उसका परीक्षण कराया गया। जिला बागवानी अधिकारी ने भी उसे पास कर दिया। इसके बाद गेहूं की पैदावार के प्रति कुंतल एक हजार से 1500 रुपये तक ज्यादा मिले।
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खुद तैयार करते हैं वार्मिंग कंपोस्ट और देते हैं किसानों को
खास बात यह है कि जयकरण केंचुआ से वार्मिंग कंपोस्ट तैयार करते हैं और लोगों को देते हैं। जयकरण का कहना है कि जब तक किसान इसका प्रयोग नहीं करेंगे वह रासायनिक खाद से दूर नहीं होंगे। फिलहाल वह सीआर पॉलिटेक्निक की तरफ किसानों को अपने घर पर ही तीन-तीन माह का प्रशिक्षण देते हैं। इसमें किसानों को बताया जाता है कि जैविक खेती का क्या फायदा है और उसे कैसे तैयार किया जाए?