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पीजीआईएमएस के डॉक्टर्स हॉस्टल भी राम भरोसे
Updated Sat, 11 Nov 2017 02:34 AM IST
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पीजीआईएमएस के डॉक्टर्स हॉस्टल भी राम भरोसे
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय संस्थान की सुरक्षा के लिए भले ही हर साल सात से आठ करोड़ का बजट खर्च करती हो, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं है। संस्थान में सुरक्षा गार्डों की संख्या में घपले पर पहले ही पुलिस और स्टेट विजिलेंस जांच चल रही है, शुक्रवार को आरडीए और सीनियर डॉक्टरों ने भी संस्थान की सुरक्षा को राम भरोसे कहा है।
आरडीए के प्रधान जंगवीर ग्रेवाल और हास्टल वार्डन डॉ. वरूण ने कहा कि हॉस्टल में कहने के सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और गेट पर सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। यहां न तो गार्डों को यह पता होता कि कौन अंदर आ रहा है और कौन बाहर जा रहा है। स्थिति यह है कि हॉस्टल से एक दो पहिया वाहन चोरी हो जाता है और इसकी एफआईआर दर्ज करवा दी जाती है, लेकिन सुरक्षा सुपरवाइजर को इसकी जानकारी नहीं होती। एक गार्ड ड्यूटी छोड़ने से पहले दूसरे गार्ड को कहने के लिए चार्ज देता है, दोनों के पास एक-दूसरे के नंबर नहीं होते। यही नहीं कई गार्ड तो ऐसे हैं कि उनके पास उनके सुपरवाइजरों तक के नंबर नहीं होते। डॉ. वरूण ने बताया कि हास्टल की दीवार टूटी हुई थी, इसी रास्ते से कोई दो पहिया वाहन को लेकर चला गया। सीसीटीवी कैमरे का भी कोई लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि अब घटना होने के बाद दीवार निर्माण का कार्य शुरू हुआ है। वहीं डॉक्टरों ने सवाल उठाया है कि संस्थान में तैनात सुरक्षा गार्डों की पहले पुलिस जांच होनी चाहिए, क्योंकि बगैर उनकी मिली भगत के ऐसे कार्य नहीं हो सकते। आरडीए के प्रधान डॉ. जंगवीर ग्रेवाल ने कहा कि भविष्य में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहनों के लिए स्टीकर जारी किए जाएंगे और इनके अलावा किसी वाहन को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। वहीं सवाल उठाया गया कि डॉक्टर्स हॉस्टल का गेट कभी बंद ही नहीं होता, जब सुरक्षा गार्ड को कहों तो वह भी इंकार कर देता है।
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रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय संस्थान की सुरक्षा के लिए भले ही हर साल सात से आठ करोड़ का बजट खर्च करती हो, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं है। संस्थान में सुरक्षा गार्डों की संख्या में घपले पर पहले ही पुलिस और स्टेट विजिलेंस जांच चल रही है, शुक्रवार को आरडीए और सीनियर डॉक्टरों ने भी संस्थान की सुरक्षा को राम भरोसे कहा है।
आरडीए के प्रधान जंगवीर ग्रेवाल और हास्टल वार्डन डॉ. वरूण ने कहा कि हॉस्टल में कहने के सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और गेट पर सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। यहां न तो गार्डों को यह पता होता कि कौन अंदर आ रहा है और कौन बाहर जा रहा है। स्थिति यह है कि हॉस्टल से एक दो पहिया वाहन चोरी हो जाता है और इसकी एफआईआर दर्ज करवा दी जाती है, लेकिन सुरक्षा सुपरवाइजर को इसकी जानकारी नहीं होती। एक गार्ड ड्यूटी छोड़ने से पहले दूसरे गार्ड को कहने के लिए चार्ज देता है, दोनों के पास एक-दूसरे के नंबर नहीं होते। यही नहीं कई गार्ड तो ऐसे हैं कि उनके पास उनके सुपरवाइजरों तक के नंबर नहीं होते। डॉ. वरूण ने बताया कि हास्टल की दीवार टूटी हुई थी, इसी रास्ते से कोई दो पहिया वाहन को लेकर चला गया। सीसीटीवी कैमरे का भी कोई लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि अब घटना होने के बाद दीवार निर्माण का कार्य शुरू हुआ है। वहीं डॉक्टरों ने सवाल उठाया है कि संस्थान में तैनात सुरक्षा गार्डों की पहले पुलिस जांच होनी चाहिए, क्योंकि बगैर उनकी मिली भगत के ऐसे कार्य नहीं हो सकते। आरडीए के प्रधान डॉ. जंगवीर ग्रेवाल ने कहा कि भविष्य में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहनों के लिए स्टीकर जारी किए जाएंगे और इनके अलावा किसी वाहन को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। वहीं सवाल उठाया गया कि डॉक्टर्स हॉस्टल का गेट कभी बंद ही नहीं होता, जब सुरक्षा गार्ड को कहों तो वह भी इंकार कर देता है।
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