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नौ माह में एक भी अंतरदेशी पत्र नहीं बिका

Mon, 09 Jul 2018 06:10 PM IST
Updated Mon, 09 Jul 2018 06:10 PM IST
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नौ माह में एक भी अंतरदेशी पत्र नहीं बिका
15 लाख की आबादी ने 240 दिन में नहीं खरीदा एक भी अंतरदेशी पत्र
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प्रवर डाकपाल बोले, गर्मी की छुट्टियों में हाउस प्रोजेक्ट बनाने वाले स्कूली बच्चे जरूर फोटो खींचकर ले गए अंतरदेशी पत्र के
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। किसी जमाने में अंतरदेशी पत्रों की इतनी मांग होती थी कि डाकखानों में हमेशा शॉर्टेज (कमी) रहती थी। लोग लाइनों में लगकर 10-12 अंतरदेशी खरीदते थे ताकि जरूरी खत लिखने के लिए इंतजार नहीं करना पड़े। मगर आज अंतरदेशी पत्रों का कोई खरीददार नहीं है। यही वजह है कि 240 दिन के अंदर करीब 15 लाख की आबादी से किसी ने भी इसको नहीं खरीदा है।
डाक विभाग पत्राचार के लिए पोस्ट कार्ड और अंतरदेशी पत्र बेचता है। पोस्ट कार्ड की तो थोड़ी बहुत बिक्री हो रही है मगर अंतरदेशी पत्रों की बिक्री पूरी तरह से रुक गई है। इससे साफ जाहिर है कि अब खत लिखने का दौर पूरी तरह से खत्म हो चुका है और यह धीरे-धीरे पढ़ाई में शामिल होता जा रहा है। डाक विभाग के अनुसार, करीब 15 लाख की आबादी वाले जनपद रोहतक में 240 दिन से एक भी ग्राहक अंदरदेशी पत्र का नहीं आया है। जिसके कारण करीब एक साल पहले मुख्य डाकघर में आए अंतरदेशी पत्र अलमारी में बंद रखे हैं। हां, जब गर्मी की छुट्टी में बच्चों को शिक्षकों ने प्रोजेक्ट बनाने का काम दिया तो उन्होंने अपने आइडिया से डाक विभाग की प्रमुख सेवा संदेश वाहन सुविधा को फोकस करते हुए प्रोजेक्ट बनाए। जिसके कारण तमाम बच्चे गर्मी की छुट्टी में डाकघरों में गए और वहां अधिकारियों से अनुरोध करके अंतरदेशी पत्रों को देखा और उनकी मोबाइल से फोटो ली। स्टूडेंट्स ने भी इनको खरीदना मुनासिब नहीं समझा।
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प्रवर डाकपाल डीवी सैनी ने बताया कि डाक विभाग की प्रमुख सेवा संदेश वाहन की धीरे-धीरे कम होती जा रही है, जिसकी वजह मोबाइल फोन और कंप्यूटर का जमाना होना है। वह बताते हैं कि पिछले आठ माह से एक भी अंतरदेशी पत्र नहीं बिका है। हां, कुछ पोस्ट कार्ड जरूर बिके हैं, वह भी शोक संदेश भेजने, आकाशवाणी में पत्र भेजने वालों ने लिए हैं। वह बताते हैं कि गर्मी के दौरान कुछ स्टूडेंट्स अपने प्रोजेक्ट के चलते अंतरदेशी पत्र देखने के लिए आए थे और वह मोबाइल से फोटो खींचकर ले गए।
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