{"_id":"5b4e5b6a4f1c1b35748b56ba","slug":"161531861866-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पवन जसिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पवन जसिया
Updated Wed, 18 Jul 2018 02:41 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो सहित....
जाट आरक्षण आंदोलन की हिंसा को लेकर फिर गरमा गर्मी
पौने दो बजे तक ऑनलाइन थे पवन जसिया
: 1 बजकर 44 मिनट पर बंद हो गया पवन का इंटरनेट
: जाट नेता बोले, छापे के दौरान थी हरियाणा पुलिस की दो गाड़ियां
: एसपी बोले, नहीं रोहतक पुलिस का मामले से कोई संबंध
: जसिया में आज जाट आरक्षण संघर्ष समिति की मीटिंग, कल आएंगे यशपाल मलिक
: पुलिस अलर्ट पर, गुप्तचर विभाग जुटा रहा पल-पल की खबर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर ढाई साल पहले हुई हिंसा के बाद फिर माहौल गरम हो गया है। जाट नेताओं का कहना है कि पवन जसिया हर रोज रोहतक में घूमते थे। ढाई साल में कोई नोटिस तक नहीं मिला। पौने दो बजे तक उनका इंटरनेट ऑन था, जो एक बजकर 44 मिनट पर लास्ट सीन दिखा रहा है। बिना किसी वारंट या नोटिस के सीबीआई उठाकर कर ले गई। साथ में पुलिस की दो गाड़ियां भी थीं। जबकि एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा का कहना है कि मामले से रोहतक पुलिस का कोई संबंध नहीं है।
जाट नेता ओमप्रकाश हुड्डा का कहना है कि जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने प्रदेश के अंदर भाईचारा कायम करने के लिए अभियान चला रखा है। जिला स्तर पर भाईचारा सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार माहौल को खराब करना चाहती है। यही कारण है कि उनके साथी पवन जसिया को सीबीआई उठाकर ले गई। इससे पहले किसी तरह का नोटिस या वारंट नहीं निकलाया गया। इतना ही नहीं, सीबीआई ढाई साल से जांच कर रही है, लेकिन पवन का कोई कसूर नहीं मिला। अब अचानक कार्रवाई समझ से बाहर है। एक तरफ सरकार वादा करती है कि जाट युवाओं को छोड़ दिया जाएगा, दूसरी तरफ नेताओं को उठाया जा रहा है।
चालान पेश करने के बाद क्यों उठाया सीबीआई ने ?
जाट नेता कृष्ण लाल हुड्डा का कहना है कि बुधवार को जिला कार्यकारिणी की मीटिंग बुलाई गई है। इसमें मामले को लेकर रणनीति बनाई जाएगी। उन्हाेंने कहा कि सीबीआई ने आज तक कोई नोटिस तक नहीं दिया। जब सीबीआई ने चालान पेश कर दिया, तो यूं उठाकर ले जाने का क्या मतलब है? अब तक पवन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है।
विज्ञापन
कार्रवाई से पुलिस का संबंध नहीं : एसपी
पवन को उठाने की सूचना पाते ही जाट आरक्षण संघर्ष समिति के महासचिव कृष्णलाल हुड्डा, ओमप्रकाश हुड्डा, जिला अध्यक्ष जयबीर टिटौली और अन्य लोग एसपी आवास पहुंचे। उन्होंने एसपी से मिलने की मांग की। एसपी ने उन्हें कार्यालय में बातचीत के लिए बुलाया। जाट नेता कृष्णलाल हुड्डा ने बताया कि एसपी ने उन्हें बताया कि पवन जसिया को सीबीआई ने उठाया है। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
जसिया से आंदोलन को खड़ा करने में अहम भूमिका रही है पवन की
जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर फरवरी 2016 में हुई हिंसा के बाद यशपाल मलिक के नेतृत्व में आंदोलन को दोबारा से उठाया गया। हिंसा से पहले जहां आंदोलन का केंद्र हिसार जिले का गांव मय्यड़ था, लेकिन हिंसा के बाद जसिया गांव केंद्र बन गया। इसमें पवन जसिया की अहम भूमिका रही। ग्रामीणों को एकजुट करना हो या लगातार धरने का संचालन और अब छोटूराम शिक्षण संस्थान के निर्माण का मामला हो। पवन ने हर सभा में मंच संचालन का कार्य किया।
विज्ञापन
जाट आरक्षण आंदोलन की हिंसा को लेकर फिर गरमा गर्मी
पौने दो बजे तक ऑनलाइन थे पवन जसिया
: 1 बजकर 44 मिनट पर बंद हो गया पवन का इंटरनेट
: जाट नेता बोले, छापे के दौरान थी हरियाणा पुलिस की दो गाड़ियां
: एसपी बोले, नहीं रोहतक पुलिस का मामले से कोई संबंध
: जसिया में आज जाट आरक्षण संघर्ष समिति की मीटिंग, कल आएंगे यशपाल मलिक
: पुलिस अलर्ट पर, गुप्तचर विभाग जुटा रहा पल-पल की खबर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर ढाई साल पहले हुई हिंसा के बाद फिर माहौल गरम हो गया है। जाट नेताओं का कहना है कि पवन जसिया हर रोज रोहतक में घूमते थे। ढाई साल में कोई नोटिस तक नहीं मिला। पौने दो बजे तक उनका इंटरनेट ऑन था, जो एक बजकर 44 मिनट पर लास्ट सीन दिखा रहा है। बिना किसी वारंट या नोटिस के सीबीआई उठाकर कर ले गई। साथ में पुलिस की दो गाड़ियां भी थीं। जबकि एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा का कहना है कि मामले से रोहतक पुलिस का कोई संबंध नहीं है।
जाट नेता ओमप्रकाश हुड्डा का कहना है कि जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने प्रदेश के अंदर भाईचारा कायम करने के लिए अभियान चला रखा है। जिला स्तर पर भाईचारा सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार माहौल को खराब करना चाहती है। यही कारण है कि उनके साथी पवन जसिया को सीबीआई उठाकर ले गई। इससे पहले किसी तरह का नोटिस या वारंट नहीं निकलाया गया। इतना ही नहीं, सीबीआई ढाई साल से जांच कर रही है, लेकिन पवन का कोई कसूर नहीं मिला। अब अचानक कार्रवाई समझ से बाहर है। एक तरफ सरकार वादा करती है कि जाट युवाओं को छोड़ दिया जाएगा, दूसरी तरफ नेताओं को उठाया जा रहा है।
विज्ञापन
चालान पेश करने के बाद क्यों उठाया सीबीआई ने ?
जाट नेता कृष्ण लाल हुड्डा का कहना है कि बुधवार को जिला कार्यकारिणी की मीटिंग बुलाई गई है। इसमें मामले को लेकर रणनीति बनाई जाएगी। उन्हाेंने कहा कि सीबीआई ने आज तक कोई नोटिस तक नहीं दिया। जब सीबीआई ने चालान पेश कर दिया, तो यूं उठाकर ले जाने का क्या मतलब है? अब तक पवन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है।
विज्ञापन
कार्रवाई से पुलिस का संबंध नहीं : एसपी
पवन को उठाने की सूचना पाते ही जाट आरक्षण संघर्ष समिति के महासचिव कृष्णलाल हुड्डा, ओमप्रकाश हुड्डा, जिला अध्यक्ष जयबीर टिटौली और अन्य लोग एसपी आवास पहुंचे। उन्होंने एसपी से मिलने की मांग की। एसपी ने उन्हें कार्यालय में बातचीत के लिए बुलाया। जाट नेता कृष्णलाल हुड्डा ने बताया कि एसपी ने उन्हें बताया कि पवन जसिया को सीबीआई ने उठाया है। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
जसिया से आंदोलन को खड़ा करने में अहम भूमिका रही है पवन की
जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर फरवरी 2016 में हुई हिंसा के बाद यशपाल मलिक के नेतृत्व में आंदोलन को दोबारा से उठाया गया। हिंसा से पहले जहां आंदोलन का केंद्र हिसार जिले का गांव मय्यड़ था, लेकिन हिंसा के बाद जसिया गांव केंद्र बन गया। इसमें पवन जसिया की अहम भूमिका रही। ग्रामीणों को एकजुट करना हो या लगातार धरने का संचालन और अब छोटूराम शिक्षण संस्थान के निर्माण का मामला हो। पवन ने हर सभा में मंच संचालन का कार्य किया।